गोपाल शरण शर्मा
ब्रज में शारदीय अरु चैत्र नवरात्रि शक्ति-उपासना के प्रमुख अवसर हैं। इन दिनन में घर-घर देवी की पूजा, दुर्गा सप्तशती कौ पाठ, व्रत, भजन अरु कीर्तन करौ जात है। भक्तजन नौ दिनन तलक माता के अलग-अलग स्वरूपन की आराधना करैं हैं। अष्टमी अरु नवमी पै कन्या-पूजन की विशेष परंपरा है। छोटी-छोटी कन्याओं कूं देवी कौ स्वरूप मानिकैं भोजन करायौ जात है अरु दक्षिणा, वस्त्र तथा उपहार भेंट करैं हैं। या परंपरा नारी-शक्ति के सम्मान अरु मातृ-तत्त्व की प्रतिष्ठा कौ संदेश देत है।
नवरात्रि के समय ब्रज के बाजारनि में पूजा-सामग्री, चुनरी, नारियल, पुष्प अरु प्रसाद की दुकानें सजि जात हैं। मंदिरनि में भक्तन की भीड़ रहै है अरु वातावरण देवी-भजनन सौं गूंज उठै है। भक्तन के मुख तैं बार-बार निकरै है–'जय माता दी', 'जय अम्बे गौरी' अरु 'जय जगदम्बे'।
लोकजीवन में शक्ति की महिमा
ब्रज की शाक्त उपासना कौ एक महत्त्वपूर्ण पक्ष लोकजीवन है। ग्रामीण अंचलन में देवी कूं परिवार की रक्षक अरु संकट हरनवारी मान्यौ जात है। बालक के जन्म, विवाह, गृह-प्रवेश अरु अन्य मंगल अवसरनि पै देवी की पूजा करी जात है। अनेक परिवार अपनी कुलदेवी के प्रति विशेष श्रद्धा रखैं हैं अरु समय-समय पै उनके दर्शन करन जात हैं।
ब्रज की लोकमाताएं देवी के गीत गावत भक्ति अरु ममता कौ अनूठौ संसार रचैं हैं। इन गीतनि में देवी की महिमा, भक्तन की पीर, परिवार की मंगलकामना अरु संकटनि तैं रक्षा की प्रार्थना समाई रहै है।
लोकगीतनि में देवी कूं कभी मैया, कभी भवानी अरु कभी जगजननी कहिकैं पुकारौ जात है। भक्त अरु भगवती कौ संबंध केवल आराधना कौ नायं, बल्कि आत्मीयता कौ भी है। भक्त देवी कूं अपनी माता मानिकैं सुख-दुख कहै है अरु उनकी कृपा की कामना करै है। ब्रज की संस्कृति में शक्ति-तत्त्व कौ एक विशेष स्थान है। राधा-कृष्ण की उपासना में राधा की प्रधानता, देवी के प्रति लोकश्रद्धा अरु नवरात्रि के उत्सव ये सब ब्रज की धार्मिक चेतना के विविध पक्ष हैं। ब्रज में शक्ति कौ अर्थ केवल शारीरिक बल नायं, बल्कि सृजन, प्रेम, धैर्य, करुणा अरु अन्याय के विरोध की सामर्थ्य भी है।
देवी दुर्गा दुष्ट शक्तिन के विनाश की प्रतीक हैं, तौ जगदम्बा ममता अरु संरक्षण की प्रतिमूर्ति हैं। काली कौ स्वरूप अन्याय अरु अज्ञान के विनाश की प्रेरणा देत है। इम प्रकार देवी के विविध रूप जीवन के अलग-अलग आदर्शनि कूं प्रकट करैं हैं।
नारी-शक्ति कौ सम्मान
ब्रज की धार्मिक परंपरा में नारी कूं मातृशक्ति के रूप में सम्मान देन की भावना भी देवी-उपासना सौं जुड़ी है। हालांकि वास्तविक जीवन में नारी-सम्मान की स्थापना केवल पूजा सौं नायं, बल्कि समान अवसर, शिक्षा, सुरक्षा अरु सम्मान प्रदान करन सौं ही संभव है।
शक्ति अरु भक्ति कौ समन्वय
ब्रज की विशेषता या है कि इहां अनेक धार्मिक धाराएं परस्पर संवाद करैं हैं। कृष्ण-भक्ति, राधा-तत्त्व, शिव-आराधना अरु देवी-उपासना मिलिकैं ब्रज की आध्यात्मिक परंपरा कूं समृद्ध बनावैं हैं। शक्ति अरु भक्ति कौ या समन्वय ब्रज के धार्मिक जीवन कूं व्यापक दृष्टि प्रदान करै है।
शक्ति बिना सृष्टि की कल्पना अधूरी मानी गई है। भक्त के जीवन में शक्ति कौ अर्थ आत्मबल, सदाचार, श्रद्धा अरु कठिनाइन सौं जूझन की क्षमता भी है। देवी की आराधना मनुष्य कूं साहस, धैर्य अरु सेवा की प्रेरणा देत है। ब्रज में शाक्त उपासना केवल देवी के मंदिरनि में पूजा करन तलक सीमित नायं है। या ब्रजवासियन के लोकविश्वास, पारिवारिक संस्कार, धार्मिक उत्सव अरु सांस्कृतिक चेतना कौ अभिन्न अंग है। नवरात्रि के व्रत, कन्या-पूजन, ग्रामदेवी की आराधना अरु लोकगीतनि में प्रकट मातृशक्ति की महिमा ब्रज की जीवंत परंपरा कूं दर्शावै है।
ब्रजभूमि में जहां राधा-कृष्ण के प्रेम की मधुर धारा बहै है, वहीं जगदम्बा की शक्ति अरु दुर्गा की वीरता की उपासना भी भक्तन के हृदय में विराजै है। इही विविधता ब्रज की आध्यात्मिक समृद्धि कौ आधार है। शाक्त उपासना हमैं या संदेश देत है कि शक्ति कौ सच्चौ स्वरूप सृजन, करुणा, न्याय अरु लोकमंगल में निहित है। जब मनुष्य अपने भीतर के सदुणनि कूं जागृत करै है अरु समाज में प्रेम, सेवा अरु सम्मान की भावना बढ़ावै है, तब शक्ति-आराधना कौ वास्तविक उद्देश्य सिद्ध होत है।
(लेखक साहित्यकार हैं)