शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना का खास महत्व है । नौ दिनों तक भक्त मां के अलग-अलग रूपों की पूजा करते हैं, सुबह और शाम दीप जलाकर आरती की जाती है । धार्मिक मान्यता है कि आरती के जरिए भक्त मां के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति जाहिर करते हैं।
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इस दौरान कई घरों और मंदिरों में ‘अम्बे तू है जगदम्बे काली’ आरती गाई जाती है। इस आरती में मां दुर्गा के कई रूपों का वर्णन है , उन्हें काली, सिंहवाहिनी और अष्टभुजा जैसे नामों से पुकारा गया है।
नवरात्रि में आरती का क्या महत्व है?
हिंदू धार्मिक परंपरा में आरती को पूजा का अहम हिस्सा माना जाता है। पूजा के दौरान दीपक जलाकर देवी की आरती की जाती है। भक्त मां दुर्गा से परिवार की सुख-शांति और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हैं। मान्यता है कि मां की आरती करने से मन को शांति मिलती है और भक्तों को मुश्किल समय में हिम्मत मिलती है।
‘अम्बे तू है जगदम्बे काली’ आरती क्यों है खास?
यह आरती मां दुर्गा के शक्ति और ममता, दोनों रूपों को सामने रखती है। इसमें मां को अपने भक्तों की रक्षा करने वाली और दुख दूर करने वाली देवी के रूप में याद किया गया है । आरती में भक्त धन-दौलत के बजाय मां के चरणों में स्थान और भक्ति की कामना करते हैं। कुछ धार्मिक मान्यताओं में इस आरती को पांच आरतियों के बराबर फल देने वाला भी बताया जाता है।
मां दुर्गा की आरती
अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली।
तेरे ही गुण गावें भारती,
ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती।
तेरे भक्त जनों पे माता, भीड़ पड़ी है भारी,
भीड़ पड़ी है भारी।
दानव दल पर टूट पड़ो मां, करके सिंह सवारी,
करके सिंह सवारी।
सौ-सौ सिंहों से भी बलशाली, है अष्ट भुजाओं वाली,
दुष्टों को तू ही ललकारती,
ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती।
मां-बेटे का है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता,
बड़ा ही निर्मल नाता।
पूत कपूत सुने हैं, पर ना माता सुनी कुमाता,
माता सुनी कुमाता।
सब पे करुणा दर्शाने वाली, अमृत बरसाने वाली,
दुखियों के दुखड़े निवारती,
ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती।
नहीं मांगते धन और दौलत, ना चांदी ना सोना,
ना चांदी ना सोना।
हम तो मांगें तेरे चरणों में छोटा सा कोना,
छोटा सा कोना।
सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली,
सतियों के सत को संवारती,
ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती।
चरण शरण में खड़े तुम्हारी, ले पूजा की थाली,
ले पूजा की थाली।
वरद हस्त सर पर रख दो मां, संकट हरने वाली,
संकट हरने वाली।
मां भर दो भक्ति रस प्याली, अष्ट भुजाओं वाली,
भक्तों के कारज तू ही सारती,
ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती।
नवरात्रि के नौ दिनों में भक्त अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार मां दुर्गा की पूजा, आरती और भजन करते हैं। इस दौरान मां से परिवार की खुशहाली, शांति और शक्ति की कामना की जाती है ।