उज्जैन में नागपंचमी और सावन के तीसरे सोमवार पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। महाकाल मंदिर के तीसरे तल पर स्थित भगवान नागचंद्रेश्वर के कपाट रविवार रात 12 बजे खोले गए। पट खुलते ही दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतार लग गई, जो करीब डेढ़ किलोमीटर तक पहुंच गई। देशभर से लाखों श्रद्धालु भगवान नागचंद्रेश्वर और बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचे हैं।

पट खुलते ही उमड़ी भीड़

भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट साल में सिर्फ एक बार नागपंचमी के दिन 24 घंटे के लिए खोले जाते हैं। इस बार रविवार रात 12 बजे मंदिर के पट खोले गए।इससे पहले रात करीब 11:30 बजे विशेष पूजन की प्रक्रिया शुरू हुई। महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीत गिरि महाराज और संतों ने भगवान नागचंद्रेश्वर का पूजन-अभिषेक किया। पूजा के बाद आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन शुरू कर दिए गए।श्रद्धालु सोमवार मध्यरात्रि 12 बजे तक भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन कर सकेंगे। इसके बाद विधिवत पूजा-अर्चना के बाद मंदिर के कपाट अगले नागपंचमी तक बंद कर दिए जाएंगे।
डेढ़ किलोमीटर तक लगी कतार
रात से ही मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगनी शुरू हो गई थी। देर रात तक यह कतार करीब डेढ़ किलोमीटर तक पहुंच गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु घंटों इंतजार कर भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन की बारी का इंतजार करते नजर आए।नागपंचमी और सावन के तीसरे सोमवार का संयोग होने से उज्जैन में इस बार सामान्य दिनों की तुलना में श्रद्धालुओं की संख्या काफी ज्यादा है।
नागपंचमी और महाकाल की तीसरी सवारी का दुर्लभ संयोग
इस बार नागपंचमी के साथ बाबा महाकाल की तीसरी सवारी भी एक ही दिन पड़ रही है। इस वजह से उज्जैन में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं।एक ओर भक्त साल में सिर्फ एक बार खुलने वाले नागचंद्रेश्वर मंदिर में दर्शन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सावन के तीसरे सोमवार पर बाबा महाकाल के दर्शन और सवारी में शामिल होने के लिए भी श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी है।
तीसरे तल पर विराजमान हैं नागचंद्रेश्वर
भगवान नागचंद्रेश्वर का मंदिर महाकालेश्वर मंदिर के तीसरे तल पर स्थित है। महाकाल मंदिर के तीन खंड माने जाते हैं। सबसे नीचे भगवान महाकालेश्वर, दूसरे तल पर ओंकारेश्वर और तीसरे तल पर नागचंद्रेश्वर विराजमान हैं।मंदिर में स्थापित भगवान नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा बेहद दुर्लभ मानी जाती है। इसमें भगवान शिव माता पार्वती और भगवान गणेश के साथ फन फैलाए नाग पर विराजमान हैं।मान्यता है कि इस प्रतिमा को नेपाल से लाया गया था। मंदिर के निर्माण को लेकर यह भी मान्यता है कि राजा भोज ने करीब 1050 ईस्वी में इसका निर्माण कराया था।
तीन बार होती है विशेष पूजा
नागपंचमी पर भगवान नागचंद्रेश्वर की त्रिकाल पूजा की परंपरा है।
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पहली पूजा: 16 अगस्त की रात 12 बजे
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दूसरी पूजा: 17 अगस्त दोपहर 12 बजे
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तीसरी पूजा: 17 अगस्त शाम को
इन विशेष पूजाओं के दौरान मंदिर में धार्मिक परंपराओं के अनुसार भगवान का पूजन-अभिषेक किया जाता है।दो दिन में 13.59 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किए महाकाल के दर्शनसावन के दौरान महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पहुंच रही है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 15 अगस्त को 6,57,218 और 16 अगस्त को 7,02,469 श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए। इस तरह दो दिनों में कुल 13,59,687 श्रद्धालु महाकाल मंदिर पहुंचे।मंदिर समिति की ओर से श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए दर्शन, प्रवेश-निकासी, पेयजल, जूता स्टैंड और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।