इंदौर। वैभव सूर्यवंशी ने बेहद कम समय में भारतीय क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई है। रिकॉर्ड, तेज बल्लेबाजी और कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक पहुंचने की उनकी उपलब्धियों ने उन्हें देश के सबसे चर्चित युवा क्रिकेटरों में शामिल कर दिया है। लेकिन भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (बीसीसीआई) की नजर सिर्फ वैभव सूर्यवंशी पर नहीं है। बोर्ड वैभव जैसे कई युवा खिलाड़ियों को चिह्नित कर उनके लंबे और सफल करियर की योजना पर काम कर रहा है।मुंबई स्थित बीसीसीआई मुख्यालय में गुरुवार को हुई महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में वैभव सूर्यवंशी के भविष्य को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। बैठक से निकलकर जो सबसे महत्वपूर्ण बात सामने आई, वह यह है कि बीसीसीआई युवा प्रतिभाओं को जल्दबाजी में बड़े मंच पर पहुंचाने के बजाय उन्हें चरणबद्ध तरीके से तैयार करना चाहता है।बोर्ड की रणनीति साफ है किसी खिलाड़ी को एक-दो श्रृंखलाओं की सफलता का सितारा नहीं, बल्कि वर्षों तक भारतीय क्रिकेट की सेवा करने वाला खिलाड़ी बनाना है।
बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने भी वैभव के भविष्य को लेकर बोर्ड की गंभीरता स्पष्ट की है। उनके अनुसार, बीसीसीआई चाहता है कि वैभव या उनके जैसी प्रतिभा वाले खिलाड़ी लंबे समय तक देश के लिए खेलें और भारतीय क्रिकेट को मजबूत करें। इसके लिए उनके करियर के हर कदम पर नजर रखी जा रही है।सैकिया ने यह भी कहा है कि बोर्ड इस बात को लेकर सतर्क है कि वैभव की प्रतिभा किसी एक श्रृंखला या एक-दो साल की सफलता तक सीमित न रह जाए। इसलिए उन्हें जल्दबाजी में आगे बढ़ाने के बजाय उनकी उम्र, क्षमता और विकास को ध्यान में रखते हुए एक-एक कदम आगे बढ़ाने की नीति अपनाई जा रही है।
वैभव के साथ 10 से 15 युवा खिलाड़ी भी विशेष निगरानी में
बीसीसीआई की योजना केवल एक खिलाड़ी पर केंद्रित नहीं है। सेंटर ऑफ़ एक्सेलन्स निगरानी में वैभव की आयु वर्ग के करीब 10 से 15 अन्य प्रतिभाशाली खिलाड़ी भी हैं। इन खिलाड़ियों के प्रदर्शन के साथ उनकी शारीरिक क्षमता, तकनीक, मानसिक मजबूती, कौशल विकास और भविष्य की संभावनाओं पर लगातार नजर रखी जा रही है।सेंटर ऑफ़ एक्सेलन्स के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण इन युवा खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और विकास में विशेष रुचि ले रहे हैं। उद्देश्य केवल प्रतिभा की पहचान करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि सही प्रतिभा को सही समय पर सही मार्गदर्शन और उचित अवसर मिल सके।भारतीय क्रिकेट में प्रतिभा की कभी कमी नहीं रही, लेकिन चुनौती हमेशा यह रही है कि प्रतिभाशाली खिलाड़ी लंबे समय तक अपनी क्षमता को बनाए रखते हुए लगातार आगे बढ़ सकें। कम उम्र में मिली सफलता के साथ अपेक्षाएं, दबाव और लगातार क्रिकेट खेलने का बोझ भी बढ़ता है। बीसीसीआई अब इन पहलुओं को ध्यान में रखते हुए खिलाड़ियों के विकास की लंबी योजना तैयार कर रहा है।
जल्दबाजी नहीं, सही समय पर अगला कदम
वैभव सूर्यवंशी का करियर इस नई सोच का महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है। इतनी कम उम्र में रिकॉर्ड बनाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के बाद उनके लिए अवसरों की कमी नहीं होगी, लेकिन बीसीसीआई का जोर उन्हें लगातार बड़े मुकाबलों में उतारने के बजाय सही समय पर सही स्तर की चुनौती देने पर है।यानी यह तय किया जाएगा कि खिलाड़ी को कब आगे बढ़ाना है, किस स्तर पर कितना क्रिकेट खिलाना है, कब उसे अनुभव देना है और कब उसके शारीरिक तथा मानसिक विकास को प्राथमिकता देनी है।लक्ष्य केवल अगली श्रृंखला के लिए खिलाड़ी तैयार करना नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए भारतीय क्रिकेट की मजबूत नींव बनाना है।
वैभव ने भी अपनी कम उम्र में विभिन्न स्तरों पर अपनी क्षमता दिखाई है। इंग्लैंड में टी-20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला के दौरान भारत का प्रतिनिधित्व करने के बाद शुरुआती मुकाबलों में उनका प्रदर्शन भले ही अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहा, लेकिन जिम्बाब्वे में भारत की 3-0 की जीत के दौरान उन्होंने शानदार प्रदर्शन कर श्रृंखला के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का पुरस्कार हासिल किया।इसके बाद श्रीलंका में भारत ए की त्रिकोणीय श्रृंखला में तेज शतक लगाकर उन्होंने अपनी प्रतिभा का एक और प्रभावशाली प्रदर्शन किया। घरेलू सत्र की शुरुआत में उन्हें पूर्वी क्षेत्र का उपकप्तान बनाया गया। दलीप ट्रॉफी में भी उन्होंने अपनी बल्लेबाजी से प्रभावित किया।लेकिन बीसीसीआई के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात उनके रिकॉर्ड नहीं, बल्कि यह है कि इस प्रतिभा को किस तरह लंबे समय तक विकसित और सुरक्षित रखा जाए।
महिला क्रिकेट की अगली पीढ़ी भी बीसीसीआई की प्राथमिकता
भारतीय क्रिकेट के भविष्य को लेकर बीसीसीआई की दीर्घकालिक योजना केवल पुरुष क्रिकेट तक सीमित नहीं है। महिला क्रिकेट में भी बोर्ड भविष्य की मजबूत टीम तैयार करने के लिए युवा और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान, प्रशिक्षण और कौशल विकास पर विशेष ध्यान दे रहा है।भारतीय महिला क्रिकेट ने पिछले कुछ वर्षों में जिस तेजी से अपनी पहचान बनाई है, उसके बाद अब सबसे बड़ी चुनौती इस सफलता को लगातार आगे बढ़ाने की है। बीसीसीआई की कोशिश है कि मौजूदा टीम के साथ-साथ अगली पीढ़ी की खिलाड़ियों की भी एक मजबूत श्रृंखला तैयार रहे।युवा महिला खिलाड़ियों को कम उम्र में पहचानकर उन्हें बेहतर प्रशिक्षण, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा का अनुभव तथा उच्च स्तरीय मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। लक्ष्य केवल एक-दो प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसा मजबूत प्रतिभा समूह विकसित करना है, जिससे आने वाले वर्षों में भारतीय महिला टीम के पास हर स्तर पर विकल्प उपलब्ध रहें।जिस तरह पुरुष क्रिकेट में वैभव सूर्यवंशी और उनके जैसे युवा खिलाड़ियों की प्रगति पर सेंटर ऑफ़ एक्सेलन्स की नजर है, उसी तरह महिला क्रिकेट की उभरती प्रतिभाओं के विकास को भी लंबी अवधि की योजना के तहत देखा जा रहा है।बीसीसीआई की सोच साफ है भारतीय क्रिकेट का भविष्य तभी मजबूत होगा, जब पुरुष और महिला दोनों वर्गों में प्रतिभाओं की निरंतर श्रृंखला तैयार होती रहे। आज की सफलता के साथ-साथ कल की टीम तैयार करना ही इस दीर्घकालिक योजना का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
सिर्फ सितारे नहीं, मजबूत प्रतिभा समूह तैयार करने पर जोर
बीसीसीआई की इस नई रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि भारतीय क्रिकेट का भविष्य किसी एक खिलाड़ी पर निर्भर नहीं होना चाहिए। वैभव सूर्यवंशी जैसे खिलाड़ी भारतीय क्रिकेट के लिए विशेष हो सकते हैं, लेकिन उनके साथ-साथ कई अन्य प्रतिभाओं को भी पहचानना और विकसित करना उतना ही जरूरी है।उत्कृष्टता केंद्र के माध्यम से एक मजबूत प्रतिभा समूह तैयार करने की कोशिश की जा रही है, ताकि आने वाले वर्षों में भारतीय टीम के पास अलग-अलग प्रारूपों के लिए तैयार खिलाड़ियों की कमी न हो।पुरुष और महिला दोनों क्रिकेट में यह सोच भविष्य की टीम तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव है। अब केवल आज की टीम और अगले टूर्नामेंट को ध्यान में रखकर योजना नहीं बनाई जा रही, बल्कि यह भी देखा जा रहा है कि पांच, सात और दस साल बाद भारतीय क्रिकेट किन खिलाड़ियों के दम पर आगे बढ़ेगा।वैभव सूर्यवंशी इस नई सोच का फिलहाल सबसे चर्चित चेहरा जरूर हैं, लेकिन बीसीसीआई की नजर उनके जैसे कई अन्य युवा खिलाड़ियों पर भी है।
भारतीय क्रिकेट की असली तैयारी शायद यही है आज किसी एक सितारे को चमकते हुए देखना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना कि आने वाले वर्षों में भारतीय क्रिकेट के आसमान में नए सितारों की कमी कभी न हो।