भारत की महासागरीय नीति को मिली नई गति

भारत की महासागर नीति में नया सुधार, सेशेल्स और जापान के साथ मजबूत साझेदारी

प्रधानमंत्री मोदी की सेशेल्स और जापान के प्रधानमंत्री ताकाइची की भारत यात्रा ने भारत की महासागर नीति को नई दिशा दी। समुद्री सुरक्षा और साझेदारी में वृद्धि।

By : स्वदेश डेस्क
भारत की महासागर नीति में नया सुधार, सेशेल्स और जापान के साथ मजबूत साझेदारी

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प्रो. अंशु जोशी

भारत के प्रधानमंत्री की सेशेल्स यात्रा और जापान के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा ने भारत की गतिशील 'महासागर' नीति को नई गति प्रदान की है। इस सप्ताह सेशेल्स और जापान के साथ भारत की उच्चस्तरीय कूटनीतिक सहभागिता ने यह स्पष्ट किया है कि भारत हिंद महासागर और व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा, विकास और साझेदारी पर आधारित एक समावेशी समुद्री व्यवस्था के निर्माण के लिए योजनाबद्ध ढंग से आगे बढ़ रहा है। रक्षा सहयोग, संपर्क-सुविधाओं के विस्तार और 'मुक्त, खुले तथा समावेशी' समुद्री क्षेत्र की अवधारणा के माध्यम से भारत स्वयं को तटीय और हिंद-प्रशांत देशों के विश्वसनीय सुरक्षा एवं विकास साझेदार के रूप में पुनर्स्थापित कर रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 27 से 29 जून, 2026 तक की सेशेल्स राजकीय यात्रा, सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस की स्वर्ण जयंती तथा भारत-सेशेल्स राजनयिक संबंधों की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर हुई। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के बीच हुई वार्ता में स्वास्थ्य, शिक्षा, डिजिटल परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा तथा विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा और रक्षा सहयोग जैसे विषय प्रमुख रहे। दोनों देशों ने शिपिंग, अंतरिक्ष, क्षमता निर्माण सहित 19 समझौतों और समझौता ज्ञापनों (एमओयू) की घोषणा की। भारत ने 1,250 करोड़ रुपये की ऋण सहायता (क्रेडिट लाइन) उपलब्ध कराने के साथ-साथ गश्ती पोतों सहित रक्षा सहयोग बढ़ाने का भी निर्णय लिया, ताकि अवैध मछली पकड़ने, मादक पदार्थों की तस्करी और समुद्री डकैती जैसी चुनौतियों से निपटने में सेशेल्स की क्षमता सुदृढ़ हो सके।

सेशेल्स ने प्रधानमंत्री मोदी को 'गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन' (नीले क्षितिज का संरक्षक) सम्मान प्रदान किया, जो समुद्री शासन, पर्यावरण संरक्षण और द्वीपीय देशों के सतत विकास में भारत की भूमिका की अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति का प्रतीक है। ये सभी पहलू दर्शाते हैं कि भारत अपनी महासागर नीति के अंतर्गत रक्षा कूटनीति, विकास सहयोग और जलवायु-संवेदनशील दृष्टिकोण को एक साथ जोड़कर हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी भूमिका को सुदृढ़ कर रहा है।

दूसरी ओर, इसी सप्ताह जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की नई दिल्ली यात्रा ने भारत-जापान विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी को और गहरा किया। दोनों देशों ने सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तथा समुद्री सहयोग के क्षेत्रों में संबंधों को नई दिशा दी। वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने 'स्वतंत्र और मुक्त हिंद-प्रशांत', नौवहन की स्वतंत्रता तथा विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई, जो भारत की महासागर नीति के मूल सिद्धांतों के अनुरूप है।

दोनों प्रधानमंत्रियों की वार्ता के बाद रक्षा, समुद्री सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों से जुड़े अनेक समझौते हुए। भारत और जापान ने नौसैनिक तथा तटरक्षक सहयोग को और विस्तारित करने, अधिक संयुक्त अभ्यास आयोजित करने, बंदरगाह यात्राओं की संख्या बढ़ाने तथा सूचना साझाकरण को सुदृढ़ करने पर भी सहमति व्यक्त की, ताकि समुद्री डकैती और अन्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री अपराधों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।

जापान की 'स्वतंत्र और मुक्त हिंद-प्रशांत' अवधारणा, जिसकी परिकल्पना पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने की थी, बाद में फुमियो किशिदा द्वारा विकसित की गई और अब प्रधानमंत्री ताकाइची उसे आगे बढ़ा रही हैं। यह दृष्टि भारत के साथ समुद्री क्षेत्रीय जागरूकता, आपदा राहत, संपर्क-सुविधाओं तथा हिंद महासागर और व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग के रूप में व्यावहारिक स्वरूप ग्रहण कर रही है। भारत के लिए जापान ऐसा समुद्री साझेदार है, जिसकी आर्थिक एवं तकनीकी क्षमता भारत की भौगोलिक स्थिति और नौसैनिक शक्ति के साथ मिलकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उभरती चुनौतियों, विशेषकर चीन की आक्रामक गतिविधियों, के बीच संतुलन और स्थिरता स्थापित करने में सहायक है।

भारत की समकालीन समुद्री रणनीति का आधार 2015 में मॉरीशस में घोषित 'सागर' (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) दृष्टि रही है। इस पहल ने वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति में हिंद महासागर के महत्व को रेखांकित करते हुए विश्वास, पारदर्शिता और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के सम्मान पर बल दिया।इसके माध्यम से भारत ने स्वयं को एक ऐसे क्षेत्रीय नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित किया, जो अपनी तथा पड़ोसी द्वीपीय देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, आर्थिक एवं सामरिक सहयोग को गहरा करने और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

वर्ष 2025 में मॉरीशस में ही घोषित 'महासागर' नीति, 'सागर' की अवधारणा का विस्तारित स्वरूप है। यह केवल हिंद महासागर तक सीमित न रहकर वैश्विक समुद्री परिदृश्य और विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण की विकास एवं सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं को केंद्र में रखती है। मॉरीशस, मालदीव, सेशेल्स तथा प्रशांत महासागर के द्वीपीय देशों के साथ भारत की बढ़ती सक्रियता इसी व्यापक समुद्री दृष्टि का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य विभिन्न समुद्री साझेदारियों को एक समन्वित और दक्षिण-केंद्रित ढांचे में जोड़ना है।

समग्र रूप से देखें तो प्रधानमंत्री मोदी की सेशेल्स यात्रा और प्रधानमंत्री ताकाइची की भारत यात्रा यह स्पष्ट करती हैं कि भारत द्विपक्षीय शिखर बैठकों का उपयोग अपनी समुद्री रणनीति को क्रमिक रूप से सुदृढ़ करने के लिए कर रहा है। हिंद महासागर, हिंद-प्रशांत और वैश्विक दक्षिण—इन तीनों परस्पर जुड़े क्षेत्रों में भारत समानांतर रूप से अपनी उपस्थिति और प्रभाव का विस्तार कर रहा है। पश्चिमी हिंद महासागर में भारत रक्षा सहयोग, क्षमता निर्माण और जलवायु साझेदारी के माध्यम से द्वीपीय देशों को सशक्त बना रहा है, जबकि जापान के साथ उसकी साझेदारी हिंद महासागर से आगे बढ़कर पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बहुपक्षीय समुद्री सहयोग और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रही है।

यह संतुलित और बहुआयामी दृष्टिकोण भारत को क्षेत्रीय 'नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर' के साथ-साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र की एक प्रभावशाली महाद्वीपीय और समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है। यह उन पारंपरिक पश्चिमी अवधारणाओं को भी चुनौती देता है, जिनमें भारत को मुख्यतः एक महाद्वीपीय शक्ति के रूप में देखा जाता था। ऐसे समय में, जब अमेरिका सहित अनेक बड़ी शक्तियां युद्धों और भू-राजनीतिक तनावों में उलझी हुई हैं, भारत सुरक्षा और विकास को परस्पर पूरक बनाते हुए अपनी महासागर नीति के माध्यम से न केवल अपने पड़ोस, बल्कि पूरे वैश्विक दक्षिण के साथ सतत, संतुलित और दूरदर्शी साझेदारी का विस्तार कर रहा है।

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