टीटीडीआई 2026 में भारत की 31वीं रैंक बताती है कि 'विकास भी, विरासत भी' का संकल्प अब जमीन पर दिखाई दे रहा है।
किसी देश का पर्यटन केवल सुंदर पहाड़ों, प्राचीन मंदिरों या समुद्र तटों से नहीं बढ़ता। पर्यटक को वहां पहुंचने के लिए सुगम सड़क और हवाई संपर्क, ठहरने के लिए होटल या होमस्टे, सही जानकारी, सुरक्षा, स्वच्छता और बेहतर सेवाएं चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण है ऐसा अनुभव, जिसे वह जीवनभर याद रखे। विश्व आर्थिक मंच का यात्रा एवं पर्यटन विकास सूचकांक (टीटीडीआई) इन्हीं पहलुओं के आधार पर देशों का आकलन करता है। टीटीडीआई-2026 में भारत की 31वीं रैंक पर्यटन क्षेत्र में हो रहे बदलावों की वैश्विक स्वीकृति है।
रैंकिंग में उल्लेखनीय छलांग: भारत 2014 में 65वें स्थान पर था। 2024 में वह 39वें स्थान पर पहुंचा और अब 160 अर्थव्यवस्थाओं के आकलन में 31वें स्थान पर है। भारत का स्कोर 4.42 है, जो 2024 की तुलना में 4.3 प्रतिशत अधिक है। नई पद्धति के आधार पर पुनर्गणित 2019 के 4.36 स्कोर से भी यह 1.4 प्रतिशत अधिक है। भारत दक्षिण एशिया और निम्न मध्यम आय वाले देशों में पहले स्थान पर है।यह उपलब्धि केवल रैंकिंग में सुधार नहीं है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकास भी, विरासत भी' के दृष्टिकोण के साथ पर्यटन को संस्कृति, अर्थव्यवस्था और रोजगार से जोड़ने की दिशा में हुई प्रगति का संकेत है।
बदली पद्धति में भी भारत आगे: टीटीडीआई-2026 में मूल्यांकन पद्धति बदली है। 2019 में चार बड़े क्षेत्रों और 90 संकेतकों के आधार पर आकलन होता था, जबकि अब 17 स्तंभों और 102 संकेतकों को आधार बनाया गया है। लोगों की राय पर आधारित संकेतक 33 से घटकर 18 रह गए हैं। इसलिए पुरानी और नई रैंकिंग की सीधी तुलना उचित नहीं होगी। हालांकि, समान आधार पर बढ़ा हुआ स्कोर भारत की प्रगति को स्पष्ट करता है।13 संकेतकों में शीर्ष दस: भारत 13 संकेतकों में दुनिया के शीर्ष दस देशों में शामिल है। विदेशी पर्यटकों के औसत प्रवास और पर्यटन संबंधी आंकड़े समय पर उपलब्ध कराने में भारत पहले स्थान पर है। विदेशी पर्यटक यहां औसतन 17-18 दिन ठहरते हैं, जो प्रमुख पर्यटन देशों के औसत से दोगुने से अधिक है।
हवाईअड्डा संपर्क में भारत चौथे स्थान पर है। कीमतों की प्रतिस्पर्धा, होटल दरों, क्रयशक्ति और अच्छी आय वाली पर्यटन नौकरियों में छठा स्थान मिला है। सड़क घनत्व में भारत दसवें स्थान पर है। नए राजमार्ग, बेहतर रेल सेवाएं, नए हवाईअड्डे और क्षेत्रीय उड़ानें पर्यटन को गति दे रही हैं। उड़ान योजना के 687 मार्ग 95 हवाईअड्डों को जोड़ रहे हैं।विविधता भारत की बड़ी ताकत: भारत की सबसे बड़ी पर्यटन शक्ति उसकी विविधता है। यात्रा संसाधनों में भारत दुनिया में चौथे स्थान पर है। प्राकृतिक संसाधनों में सातवीं, सांस्कृतिक संसाधनों में नौवीं और व्यापार, शिक्षा तथा अन्य गैर-अवकाश यात्रा संसाधनों में आठवीं रैंक मिली है।
बड़े खेल स्टेडियमों और शीर्ष विश्वविद्यालयों में भारत तीसरे तथा वैश्विक शहरों में पांचवें स्थान पर है। इसका अर्थ है कि भारत अब केवल छुट्टियां बिताने का गंतव्य नहीं, बल्कि सम्मेलन, खेल, शिक्षा, विवाह, अध्यात्म, स्वास्थ्य और व्यवसाय से जुड़ी यात्राओं का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है।विरासत और विकास का समन्वय: पर्यटन मंत्रालय ने केवल दर्शनीय स्थलों के विकास के बजाय पूरे गंतव्य के समग्र विकास पर जोर दिया है। स्वदेश दर्शन के तहत 15 विषयों पर आधारित पर्यटन सर्किटों में 5,295 करोड़ रुपये से अधिक की 76 परियोजनाएं मंजूर हुईं, जिनमें 75 पूरी हो चुकी हैं। स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत 2,207 करोड़ रुपये से अधिक की 53 परियोजनाएं आगे बढ़ रही हैं। प्रसाद योजना के तहत 54 परियोजनाओं से तीर्थस्थलों पर स्वच्छता, सुरक्षा, सुविधाओं और रोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है।
डिजिटल सुविधा से आसान हुई यात्रा: ई-वीजा अब 172 देशों के नागरिकों के लिए उपलब्ध है। करीब 78 प्रतिशत वीजा इलेक्ट्रॉनिक रूप से जारी होते हैं और लगभग 95 प्रतिशत ई-वीजा आवेदनों का निपटारा 72 घंटे के भीतर हो जाता है। इनक्रेडिबल इंडिया डिजिटल प्लेटफॉर्म, निधि प्लस और बहुभाषी पर्यटक हेल्पलाइन ने जानकारी और सेवाओं तक पहुंच आसान की है। तकनीक छोटे होटल, गाइड, टूर ऑपरेटर और स्थानीय सेवा प्रदाताओं को भी बड़े बाजार से जोड़ रही है।रोजगार और अर्थव्यवस्था को बल: पर्यटन का प्रभाव अर्थव्यवस्था और रोजगार पर भी दिखाई देता है। राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में पर्यटन का योगदान 5.22 प्रतिशत है। वर्ष 2023-24 में इस क्षेत्र ने 8.46 करोड़ रोजगारों को सहारा दिया। वर्ष 2025 में घरेलू पर्यटक यात्राएं 428.55 करोड़, विदेशी पर्यटक यात्राएं 2.53 करोड़ और पर्यटन से विदेशी मुद्रा आय 2,76,831 करोड़ रुपये रही।
इन आंकड़ों के पीछे गाइड, टैक्सी चालक, कारीगर, बुनकर, लोक कलाकार, छोटे होटल, ढाबे और होमस्टे संचालित करने वाले लाखों परिवार हैं। इसलिए पर्यटन का विस्तार सीधे सामान्य नागरिक की आय और आजीविका से जुड़ता है।टिकाऊ पर्यटन पर जोर: पर्यटन की दीर्घकालिक सफलता प्रकृति और स्थानीय समाज के संतुलन पर निर्भर है। पर्यटन स्थिरता में भारत की सातवीं रैंक महत्वपूर्ण है। हमारा लक्ष्य केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि उनका प्रवास बढ़ाना, स्थानीय उत्पादों की खरीद को प्रोत्साहित करना और नए गंतव्यों से परिचित कराना भी है। 'पर्यटन मित्र', 'पर्यटन दीदी', ग्रामीण होमस्टे, स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और समुदाय की भागीदारी इसी दिशा के प्रयास हैं।
अभी लंबी यात्रा बाकी: यह उपलब्धि आत्मसंतोष का कारण नहीं हो सकती। अच्छे होटल, प्रशिक्षित गाइड, अंतिम छोर तक सुगम संपर्क और बेहतर गंतव्य प्रबंधन पर अभी और काम करना होगा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीक के माध्यम से यात्राओं को अधिक सरल और व्यक्तिगत बनाना होगा। कम प्रसिद्ध स्थलों को भी विकसित करना होगा, ताकि पर्यटक उन्हें आसानी से खोज और बुक कर सकें।टीटीडीआई में भारत की 31वीं रैंक मंजिल नहीं, बल्कि सही दिशा में बढ़ते कदमों का प्रमाण है। पर्यटन भारत की जीवंत सभ्यता को दुनिया से जोड़ने के साथ देश के हर क्षेत्र में रोजगार और आर्थिक अवसर पैदा करने की बड़ी शक्ति बन रहा है। 'विकास भी, विरासत भी' का यही समन्वय भारत को विश्व पर्यटन मानचित्र पर और सशक्त स्थान दिला सकता है।

गजेन्द्र सिंह शेखावत
(लेखक भारत सरकार में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री हैं।)