भारत में नई औद्योगिक क्रांति

भारत चल पड़ा है नई औद्योगिक क्रांति के पथ पर

भारत में नई औद्योगिक क्रांति शुरू, डेटा केंद्र और सेमीकंडक्टर उत्पादन में वृद्धि। वैश्विक कंपनियों ने योग्यता केंद्र स्थापित किये।

By : नरेंद्र कुमार
भारत चल पड़ा है नई औद्योगिक क्रांति के पथ पर

भारत में आज एक नई औद्योगिक क्रांति प्रारम्भ हो चुकी है। यह विचार अमेरिका के एक जाने-माने निवेश बैंक जेफ्रीज ने व्यक्त किया है। भारत में विशेष रूप से डेटा केंद्र स्थापित करने के उद्देश्य से करोड़ों अमेरिकी डॉलर का निवेश होता हुआ दिखाई दे रहा है। केंद्र सरकार की ओर से डेटा केंद्र स्थापित करने पर टैक्स में भारी छूट भी प्रदान की जा रही है। अतः भारत में डेटा केंद्र स्थापित करने की जैसे होड़ सी मच गई है। पिछले पांच वर्षों में भारत में डेटा केंद्रों की क्षमता दोगुनी हो चुकी है और आगामी पांच वर्षों में यह क्षमता बढ़कर 10 GW होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। वैश्विक स्तर पर डेटा केंद्र अब एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में उभर रहा है।

साथ ही, भारत में सेमीकंडक्टर उत्पादन इकाइयों को उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत लाभ प्रदान किया जा रहा है। इसके लिए 1,300 करोड़ अमेरिकी डॉलर की राशि निर्धारित की गई है। इसका परिणाम यह है कि सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में विनिर्माण इकाइयों की स्थापना हेतु भारत में 2,000 करोड़ अमेरिकी डॉलर का निवेश किया जा चुका है और यह आगे भी जारी है।भारत आज उन चुनिंदा देशों में से एक है, जिनके पास स्पेस क्षेत्र से संबंधित नवीनतम तकनीक उपलब्ध है। भारत में स्पेस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था वर्ष 2030 तक पांच गुना तक बढ़ सकती है। वैश्विक स्तर पर एयरोस्पेस के क्षेत्र में मांग एवं आपूर्ति में असंतुलन के चलते भारत लाभ की स्थिति में पहुंच गया है, क्योंकि कम लागत और कुशल इंजीनियरिंग टैलेंट आज भारत में ही संभव है।

इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में भारत आज केवल पुर्जों को इकट्ठा कर उत्पाद बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस क्षेत्र में उच्चस्तरीय उत्पादों का निर्माण भी करने लगा है। छह वर्षों में मोबाइल कंपोनेंट में घरेलू वैल्यू एडीशन लगभग 20 प्रतिशत से बढ़कर 50 प्रतिशत तक होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।सोलर के क्षेत्र में भारत आज वैश्विक स्तर पर दूसरा सबसे बड़ा सोलर पीवी उत्पादक देश बन गया है। वर्तमान में भारत की 35 GW की सोलर क्षमता चालू है, जबकि 100 GW की क्षमता पर निर्माण कार्य चल रहा है। एशिया की सबसे बड़ी 100 कंपनियों की सूची में आज भारत की 34 कंपनियां शामिल हो चुकी हैं। पूर्व में भारत फार्मा, टेक्सटाइल, चमड़ा उत्पाद, कृषि उत्पाद, स्टील, ऑटोमोबाइल एवं सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में ही वैश्विक स्तर पर निर्यात करने में सफल हो रहा था, परंतु आज स्थितियां बदल गई हैं। डेटा केंद्र, सेमीकंडक्टर, स्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भी भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है।

भारत में उपलब्ध टैलेंट एवं श्रम के भरोसे विश्व की कई बड़ी कंपनियों के बीच भारत में विशाल वैश्विक योग्यता केंद्रों (GCC) की स्थापना करने की होड़ सी लग गई है। ब्रिटेन की फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका ने चेन्नई में एक विशाल वैश्विक योग्यता केंद्र स्थापित किया है। बैंक ऑफ अमेरिका ने अपना सबसे बड़ा बैंक ऑफिस कार्यालय पुणे में स्थापित किया है, जहां उसके विश्वभर के बैंक कार्यालयों में कार्यरत 11,000 कर्मचारी इस केंद्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। अमेरिका के पुराने वित्तीय संस्थानों में से एक बैंक ऑफ न्यूयॉर्क मेलॉन ने भी पुणे एवं चेन्नई में वैश्विक योग्यता केंद्र स्थापित किए हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में कार्य करने वाली बोस्टन की एक कंपनी ने फरवरी 2026 में हैदराबाद में विशाल अंतरराष्ट्रीय कार्यालय स्थापित किया है।

बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई एवं पुणे में आज 1,700 से अधिक वैश्विक योग्यता केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं और इनमें 19 लाख से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। भारत आज आउटसोर्सिंग हब से आगे बढ़कर उच्चस्तरीय टैलेंट केंद्र के रूप में स्थापित हो रहा है। भारत में स्थापित कुल वैश्विक योग्यता केंद्रों में लगभग 65 प्रतिशत केंद्र अमेरिकी कंपनियों द्वारा स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों पर विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान का कार्य सम्पन्न हो रहा है तथा टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नए उत्पादों का निर्माण भी किया जा रहा है। स्वास्थ्य क्षेत्र की अमेरिकी कंपनी टूब्रिज ने फरवरी 2026 में मुंबई में वैश्विक योग्यता केंद्र स्थापित किया है, जिसका आगे विस्तार किया जाना है। इसी प्रकार बीमा, बैंकिंग, स्वास्थ्य, साइबर सिक्युरिटी, फार्मा एवं सुरक्षा के क्षेत्र में कार्यरत अनेक कंपनियां भारत में अपने वैश्विक योग्यता केंद्र स्थापित कर रही हैं।

पूर्व में अमेरिका एवं अन्य विकसित देशों को भारत से ब्रेन ड्रेन हो रहा था, परंतु अब परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और विशेष रूप से अमेरिका से भारत को रिवर्स ब्रेन ड्रेन होने लगा है। ट्रम्प प्रशासन की नीतियों के चलते अन्य देशों से अमेरिका जाने वाले टैलेंट के लिए वहां रहना कठिन हो रहा है।

अमेरिका एवं अन्य यूरोपीय देशों में पूंजीवाद एवं साम्यवाद की नीतियों के चलते जन्म दर लगातार कम हो रही है। इन देशों में समाज में प्रत्येक व्यक्ति केवल अपने आप पर ध्यान केंद्रित किए हुए है। विवाह जैसी पवित्र संस्था को पश्चिमी देशों ने केवल व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सुख के संदर्भ में देखना शुरू कर दिया है। भारतीय दर्शन में अपने कुल को आगे बढ़ाने के लिए विवाह को एक पवित्र संस्था माना गया है, जबकि पश्चिमी देशों में विवाह को आवश्यक नहीं माना जा रहा और लिव-इन रिलेशनशिप का चलन भी बढ़ रहा है। तलाक की दर में वृद्धि, जीवन-यापन की बढ़ती लागत और परिवार की बढ़ती आर्थिक जिम्मेदारियों ने भी इस स्थिति को प्रभावित किया है। पश्चिमी देशों में बच्चे पैदा करने का निर्णय भी बचत एवं खर्च की दृष्टि से लिया जा रहा है। सामान्य परिवार चलाने की लागत बढ़ने के कारण 'डबल इनकम नो किड्ज' यानी DINK का विचार भी जोर पकड़ता जा रहा है। इन आर्थिक एवं सामाजिक परिस्थितियों में नागरिकों का ध्यान भौतिक विकास और व्यक्तिगत सुख पर अधिक केंद्रित हो गया है तथा परिवार एवं समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव कमजोर पड़ा है।

आज पश्चिमी देशों के नागरिक, विशेष रूप से प्रौढ़ नागरिक, जीवन के अंतिम पलों को सहज बनाने के उद्देश्य से भारत की ओर भी आकर्षित हो रहे हैं। भारत की आध्यात्मिक नगरी ऋषिकेश, हरिद्वार, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे स्थानों पर विकसित देशों के नागरिकों की संख्या बढ़ रही है। कुछ विदेशी नागरिक गोवा जैसे राज्यों में भी आकर बस रहे हैं। पहले ये लोग योग एवं आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने के उद्देश्य से भारत आते हैं, परंतु यहां मिलने वाली मानसिक एवं आत्मिक शांति के कारण भारत में ही बसने का निर्णय लेते हैं।

कुल मिलाकर, भारत आज केवल परंपरागत क्षेत्रों का निर्यातक देश नहीं रह गया है। डेटा केंद्र, सेमीकंडक्टर, स्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर, सुरक्षा और वैश्विक योग्यता केंद्रों के विस्तार ने भारत को नई औद्योगिक क्रांति के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ाया है।

प्रहलाद सबनानी

(लेखक भारतीय स्टेट बैंक के सेवानिवृत्त उपमहाप्रबंधक हैं।)

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