किसी देश में पर्यटन केवल इसलिए नहीं बढ़ता कि वहां सुंदर पहाड़, प्राचीन मंदिर या समुद्र तट हैं। पर्यटक को वहां पहुंचने के लिए अच्छी सड़क और उड़ान चाहिए। ठहरने के लिए होटल या होमस्टे चाहिए। सही जानकारी, सुरक्षा, साफ-सफाई और अच्छा व्यवहार भी चाहिए। सबसे बढ़कर, उसे ऐसा अनुभव चाहिए, जिसे वह जीवन भर याद रख सके। विश्व आर्थिक मंच का यात्रा एवं पर्यटन विकास सूचकांक इन्हीं बातों को परखता है। उसकी 2026 की रिपोर्ट बताती है कि भारत ने इस दिशा में मजबूत कदम बढ़ाए हैं।
भारत 2014 में विश्व में 65वें स्थान से 2024 में 39वें स्थान तक और अब उससे आगे बढ़कर 160 अर्थव्यवस्थाओं में 31वें स्थान पर पहुंच गया है। हमारा कुल स्कोर 4.42 है, जो 2024 के मुकाबले 4.3 प्रतिशत अधिक है। नई पद्धति से दोबारा गणना किए गए 2019 के 4.36 स्कोर की तुलना में भी यह 1.4 प्रतिशत की बढ़त है। भारत दक्षिण एशिया और निम्न मध्यम आय वाले देशों में पहले स्थान पर है। यह केवल रैंकिंग में सुधार नहीं है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकास भी, विरासत भी’ के विचार पर चल रही पर्यटन नीति के असर की वैश्विक पहचान है।इस बार की रैंकिंग को समझने के लिए एक बात जानना जरूरी है। 2019 के सूचकांक में चार बड़े क्षेत्र और 90 संकेतक थे। 2026 में 17 स्तंभों और 102 संकेतकों पर देशों को परखा गया है। लोगों की राय पर आधारित संकेतक 33 से घटकर 18 रह गए हैं। यानी आकलन पहले से अधिक वास्तविक आंकड़ों पर टिका है। देशों की संख्या भी 140 से घटकर 110 हुई है, इसलिए पुरानी और नई रैंक को सीधे जोड़कर देखना ठीक नहीं होगा। लेकिन समान आधार पर बढ़ा हुआ स्कोर भारत की प्रगति को साफ तौर पर साबित करता है।
भारत 13 संकेतकों में दुनिया के शीर्ष दस देशों में शामिल है। विदेशी पर्यटकों के औसत प्रवास और पर्यटन आंकड़े समय पर देने में भारत पहले स्थान पर है। ज्ञात रहे कि भारत में विदेशी पर्यटकों का औसत प्रवास 17-18 दिन के लगभग होता है, जो कि अन्य प्रमुख पर्यटन देशों के औसत की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा है। हवाई अड्डा संपर्क में चौथा और कीमतों की प्रतिस्पर्धा, होटल दरों, क्रय शक्ति तथा अच्छी आय वाली पर्यटन नौकरियों में छठा स्थान मिला है। सड़क घनत्व में भारत दसवें स्थान पर है। देश में बने नए राजमार्ग, बेहतर रेल सेवाएं, नए हवाई अड्डे और क्षेत्रीय उड़ानें अब पर्यटन को भी गति दे रही हैं। उड़ान योजना के 687 मार्ग 95 हवाई अड्डों को जोड़ रहे हैं।भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता है। यात्रा संसाधनों के मामले में हम दुनिया में चौथे स्थान पर हैं। प्राकृतिक संसाधनों में सातवीं, सांस्कृतिक संसाधनों में नौवीं और व्यापार, शिक्षा तथा दूसरे गैर-अवकाश यात्रा संसाधनों में आठवीं रैंक मिली है। बड़े खेल स्टेडियमों और शीर्ष विश्वविद्यालयों में भारत तीसरे तथा वैश्विक शहरों में पांचवें स्थान पर है। इसका अर्थ है कि भारत केवल छुट्टियां बिताने का देश नहीं है। वह सम्मेलन, खेल, शिक्षा, विवाह, अध्यात्म, स्वास्थ्य और व्यवसाय से जुड़ी यात्राओं के लिए भी बड़ा केंद्र बन रहा है।
अभी हाल ही में विश्व पर्यटन दिवस पर घोषित टूरिज्म डिजिटल स्टैक प्रारंभ होने पर आने वाले वर्षों में डिजिटल पर्यटन सेवाओं की रैंकिंग और केंद्र एवं राज्यों की सरकारों द्वारा पर्यटन में निवेश पर दी जाने वाली सहूलियतों एवं रियायतों के चलते होटल कमरों की तेजी से बढ़ रही संख्या से आबादी के अनुपात में कमरों की उपलब्धता के संकेतकों में भी आने वाले सुधार अवश्यंभावी हैं। इसका सीधा लाभ नए शहरों, गांवों, होमस्टे और स्थानीय कारोबारों को मिल रहा है।फिर भी यह उपलब्धि आत्मसंतोष का कारण नहीं हो सकती। हमें अच्छे होटल, प्रशिक्षित गाइड, अंतिम छोर तक सुविधाजनक संपर्क और बेहतर गंतव्य प्रबंधन पर और काम करना है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीक से यात्राओं को सरल तथा व्यक्तिगत बनाना है। कम प्रसिद्ध स्थलों को भी ऐसा बनाना है कि पर्यटक उन्हें आसानी से खोज सके, बुक कर सके और वहां सुरक्षित अनुभव पा सके। यात्रा एवं पर्यटन विकास सूचकांक की 31वीं रैंक मंजिल नहीं, सही दिशा का प्रमाण है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पर्यटन भारत की जीवंत सभ्यता को दुनिया से जोड़ने और हर क्षेत्र में रोजगार पैदा करने की बड़ी शक्ति बन रहा है।

गजेंद्र सिंह शेखावत
(लेखक भारत सरकार में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री हैं।)