लाजपत आहूजा
राहुल गांधी की कांग्रेस 'रिजीम चेंज' (सत्ता पलटने) के बयानों की देशव्यापी प्रतिक्रिया के बाद अब सुरक्षात्मक रूख अपना रही है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा कह रहे हैं कि रिजीम चेंज का मतलब चुनाव के द्वारा सत्ता बदलने से ही है। वे भूल गए कि आज के युग में उनका और उनके नये साथियों का 'प्रशांतभूषण और नेहा बोरा' का पूरा डिजीटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है। रही बात देश के नागरिकों की तो वे भी पूरा हिसाब किताब रखना सीख चुके हैं।
कैम्ब्रिज के शब्दकोश के अनुसार अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति में रिजीम चेंज का मतलब खूनी तरीके से सत्ता पलटना ही है। बांग्लादेश में कट्टरपंथी संगठनों के सहयोग से भी सत्ता बदली गई।
रिजीम चेंज का सपोर्ट करने वाली कांग्रेस की कमजोर सफाई
अमरीका, ईरान में ऐसे ही रिजीम चेंज की बात करता रहा है। तब कांग्रेस इसका विरोध करती थी। राहुल के बेड़े में हाल ही में शामिल, नये साथी खुलकर यही बात कर रहे हैं। यह रिश्ता स्पष्टता से सामने आ जाने पर कांग्रेस कमजोर सफाई देने को विवश हो गई है। दिल्ली प्रेस क्लब में प्रशांत भूषण, खुलकर सामने आ गए कि हाँ, हम रिजीम चेंज चाहते हैं। हम सब चाहते हैं। इससे पहले एक साक्षात्कार में कह चुके हैं कि क्रांति करनी होगी तो खून खराबा तो होगा ही। उसी प्रेस क्लब में नेहा बोरा से एक राष्ट्रीय चैनल के संवाददाता ने उनके बंग्लादेश से प्रेरणा लेने के बारे में पूछने पर उसे खदेड़ दिया गया। इन दोनों के सहारे अपना खेल खेलनी वाली कांग्रेस इनका अतीत न जानती हो, इतना भोलापन तो कौन मानेगा?
रिजीम चेंज की बात करने वालो की पृष्ठभूमि
प्रशांत भूषण रोहिंग्या के भारत में वकील हैं। जम्मू-कश्मीर में जनमत संग्रह के पक्षधर हैं। आप के संस्थापकों में से एक फिर निकाले गए हैं। आज तक बाकी चुनाव तो दूर, मोहल्ला कमेटी का चुनाव भी नहीं जीते हैं। महत्वाकांक्षा तो असीम है। नेहा बोरा एक सैन्य परिवार से संबंध रखने वाली महिला हैं, उसके आचरण के कारण अपने पिता से ही अबोला है, जिसे वह छिपाती नहीं हैं। काक्रोचों के पहले आन्दोलन से चर्चा में आईं। वहीं 23 दिन की भूख हड़ताल के बाद जोर से नृत्य करते देखी गई। अभी सुप्रीम कोर्ट में प्रदर्शन के दौरान सबसे आगे रखते देखे गए। नेहा का संबंध कम्युनिस्ट (एमएल) से है। उनके बंगलादेश वाले बयान कम्युनिस्ट पार्टी आफ इंडिया के नेता किनारा करते नजर आए। एक चैनल के हल्ला बोल कार्यक्रम में कहते हुये दिखे कि उनका संगठन अलग है।
राजनैतिक पंडितों का यह कहना ग़ैरतलब है कि पहले के नेहरू- गांधी परिवार पर गलत नीतियों पर सवाल उठते थे। अब के नीयत पर प्रश्न उठते हैं, जहां देश हित नेपथ्य में है।

(लेखक, विश्व संवाद केंद्र न्यूज के अध्यक्ष हैं)