बिजनेस। दिवाली से ठीक पहले आम आदमी की जेब पर असर डालने वाले कई नियम 1 नवंबर से बदल गए हैं। तेल कंपनियों ने कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम 17 रुपए तक बढ़ा दिए हैं। दूसरी तरफ फोन, टोल, म्यूचुअल फंड और ऑनलाइन कारोबार से जुड़े बदलाव कुछ राहत भी लेकर आए हैं। नवंबर 2026 के इन पांच बदलावों को आसान भाषा में समझ लीजिए।
कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़े, घरेलू गैस पर राहत
तेल कंपनियों ने त्योहार से पहले कॉमर्शियल सिलेंडर 17 रुपए तक महंगा कर दिया। रकम छोटी दिखती है, लेकिन रेस्टोरेंट और ढाबे चलाने वालों का खर्च इससे थोड़ा बढ़ेगा। ऐसे में चाय, नाश्ता और खाने की थाली के दाम चढ़ सकते हैं। शादी के सीजन में कैटरिंग का बिल भी ऊपर जा सकता है। राहत की बात यह है कि 14 किलो वाले घरेलू सिलेंडर के दाम जस के तस हैं।
कॉलर का असली नाम और टोल का लोकल पास
अब अनजान नंबर से कॉल आने पर स्क्रीन पर नंबर के साथ उस इंसान का असली नाम भी दिखेगा। यह वही नाम होगा, जो उसने सिम लेते वक्त आधार जैसी सरकारी ID में दर्ज कराया था। इसके लिए कोई एप डाउनलोड नहीं करना होगा और न ही कोई सर्विस चालू करनी होगी। दूरसंचार विभाग ने सभी टेलीकॉम कंपनियों के लिए यह नियम जरूरी कर दिया है। अब तक लोग अनजान नंबर पहचानने के लिए ट्रूकॉलर जैसे एप पर निर्भर थे। नई व्यवस्था से फर्जी और फ्रॉड कॉल से बचना आसान होगा।
प्राइवेट व्हीकल के लिए टोल पर बड़ा अपडेट
टोल प्लाजा के पास रहने वालों के लिए भी राहत आई है। टोल से 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले निजी वाहन मालिकों को अब हर बार टोल नहीं भरना पड़ेगा। सरकार ने 1,500 रुपए या 3,000 रुपए की तय फीस पर पूरे एक साल का लोकल FASTag पास देने का नियम लागू कर दिया है। रोज टोल से गुजरने वालों का महीने का बड़ा खर्च बचेगा। साल में एक बार फीस भरिए और बेफिक्र होकर सफर कीजिए।
म्यूचुअल फंड एप पर निवेशकों को बड़ा अपडेट
म्यूचुअल फंड कंपनियों के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निवेश करते समय अब डायरेक्ट प्लान अपने आप चुना हुआ दिखेगा। कोई निवेशक रेगुलर प्लान चुनेगा तो स्क्रीन पर पहले ही चेतावनी आ जाएगी। उसमें बताया जाएगा कि रेगुलर प्लान में 0.66 से 1.7 प्रतिशत तक एक्स्ट्रा खर्च लगता है। डायरेक्ट प्लान में डिस्ट्रीब्यूटर का कमीशन नहीं कटता, इसलिए एक्सपेंस रेशियो कम रहता है। सीधे निवेश करने वाले आम लोगों को इसका सीधा फायदा होगा।
छोटे ऑनलाइन विक्रेताओं को दूसरे राज्यों में बिक्री की आसानी
इतना ही नहीं 1 नवंबर से छोटे ई-कॉमर्स विक्रेता दूसरे राज्यों में दफ्तर खोले बिना पूरे देश में सामान बेच सकेंगे। CBIC ने GST नियमों में ढील दी है। इसके तहत विक्रेता जिस प्लेटफॉर्म पर माल बेचते हैं, जैसे अमेजन या फ्लिपकार्ट, उसके गोदाम का पता दूसरे राज्यों में अपने GST रजिस्ट्रेशन के पते के तौर पर दे सकेंगे। इसका फायदा देश के करीब 9.5 लाख छोटे कारोबारियों और सप्लायर्स को मिलेगा।