नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को बहुप्रतीक्षित IPO लाने के लिए बाजार नियामक SEBI से हरी झंडी मिल गई है। 4 सितंबर 2026 को मिली इस मंजूरी के बाद NSE के करीब एक दशक पुराने लिस्टिंग प्लान को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।
करीब 30,000 करोड़ रुपये के अनुमानित आकार के साथ NSE का IPO भारत का सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम बन सकता है। यदि यह आकार कायम रहता है तो यह 2024 में आए Hyundai Motor India के करीब 27,870 करोड़ रुपये के IPO और 2022 के LIC IPO को पीछे छोड़ सकता है।
14.89 करोड़ शेयरों की होगी बिक्री
NSE का प्रस्तावित IPO पूरी तरह Offer for Sale (OFS) होगा। इसके तहत मौजूदा शेयरधारक कुल 14.89 करोड़ शेयर बिक्री के लिए पेश करेंगे। यानी IPO से मिलने वाली रकम सीधे शेयर बेचने वाले मौजूदा निवेशकों को मिलेगी, NSE को नहीं। ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) के मुताबिक, इस OFS के जरिए एक्सचेंज की करीब छह फीसदी हिस्सेदारी बिक्री के लिए रखी जाएगी।
SBI समेत ये बड़े शेयरधारक बेचेंगे हिस्सेदारी
NSE IPO में कई मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेच सकते हैं। इनमें भारतीय स्टेट बैंक (SBI) भी शामिल है। SBI अपनी 3.23 फीसदी हिस्सेदारी में से करीब 2.48 करोड़ शेयर बेचने की योजना में है। इसके अलावा MS Strategic (Mauritius) Limited करीब 1.60 करोड़ शेयरों की बिक्री करेगी। वहीं, NSE की सबसे बड़ी शेयरधारक LIC, जिसके पास एक्सचेंज की करीब 10.72 फीसदी हिस्सेदारी है, प्रस्तावित IPO में अपना कोई शेयर नहीं बेच रही है।
30 हजार करोड़ का IPO बना सकता है नया रिकॉर्ड
मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक NSE IPO का आकार करीब 30,000 करोड़ रुपये हो सकता है। अगर यह अनुमान सही साबित होता है तो NSE भारत के IPO बाजार में नया रिकॉर्ड बना सकता है। इससे पहले ह्यूंडई मोटर्स इंडिया का करीब 27,870 करोड़ रुपये का IPO सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गमों में शामिल था। NSE का प्रस्तावित इश्यू इस आंकड़े को पार कर सकता है। वहीं, अनुमानित 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के बाजार पूंजीकरण के साथ NSE की लिस्टिंग देश की सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनियों की श्रेणी में इसे पहुंचा सकती है।
15 सितंबर को लॉन्च हो सकता है IPO
रिपोर्टों के मुताबिक NSE IPO को 15 सितंबर 2026 के आसपास लॉन्च किए जाने की संभावना है। वहीं इसकी शेयर बाजार में लिस्टिंग 24-25 सितंबर के आसपास हो सकती है। हालांकि, IPO की आधिकारिक तारीख और अन्य विवरण कंपनी की ओर से तय किए जाने के बाद ही अंतिम रूप से स्पष्ट होंगे। सूत्रों के अनुसार, NSE IPO का प्राइस बैंड 11 सितंबर के आसपास घोषित किया जा सकता है। बाजार में मौजूद अनुमानों के मुताबिक शेयर की कीमत करीब 2,000 रुपये के आसपास हो सकती है।
NSE की वित्तीय स्थिति कैसी है?
वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो NSE का वित्त वर्ष 2025-26 में शुद्ध लाभ करीब 15 फीसदी घटकर 10,302 करोड़ रुपये रहा था। हालांकि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कंपनी ने बेहतर प्रदर्शन किया। अप्रैल से जून की तिमाही में NSE का शुद्ध लाभ 7 फीसदी बढ़कर 3,120 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि कुल आय 9 फीसदी बढ़कर 5,252 करोड़ रुपये रही। एनएसई भारतीय इक्विटी डेरिवेटिव बाजार में प्रमुख स्थान रखता है और वैश्विक स्तर पर सबसे सक्रिय एक्सचेंजों में शामिल है।
करीब 10 साल से अटका था NSE का IPO
एनएसई की लिस्टिंग योजना करीब एक दशक से नियामकीय अड़चनों के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही थी। वर्ष 2016 से एनएसई की लिस्टिंग योजना पर को-लोकेशन विवाद और डार्क-फाइबर मामले का असर रहा। इन मामलों में कुछ ब्रोकरों को एक्सचेंज के ट्रेडिंग सिस्टम तक कथित तौर पर तेज या तरजीही पहुंच दिए जाने के आरोपों की जांच हुई थी। हाल के घटनाक्रमों के बाद एनएसई की लिस्टिंग की राह काफी हद तक साफ हुई है। जुलाई में NSE ने सेबी के साथ विवाद से जुड़े मामले के निपटारे के लिए 1,491.21 करोड़ रुपये की संचयी समझौता राशि का भुगतान पूरा किया था।
NSE IPO क्यों है खास?
एनएसई की लिस्टिंग सिर्फ कंपनी के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय पूंजी बाजार के लिए भी अहम मानी जा रही है। IPO के जरिए NSE पहली बार शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनी के रूप में सामने आएगा। करीब 1.8 लाख शेयरधारकों वाले एनएसई के इस IPO पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। हालांकि निवेशकों को IPO में पैसा लगाने से पहले कंपनी के आधिकारिक दस्तावेज, वैल्यूएशन, प्राइस बैंड और जोखिमों का अध्ययन जरूर करना चाहिए।