जबलपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने छात्र आंदोलन की परंपरा का स्वागत करते हुए आंदोलन की नीयत और लक्ष्यों पर भी बात करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करना गलत नहीं है, बल्कि यह ठीक ही है। छात्रों और सरकार के बीच जारी वर्तमान गतिरोध को उन्होंने विवाद मानने से इनकार किया। डॉ. भागवत ने जोर देकर कहा कि देश को तोड़ने की मानसिकता से होने वाले आंदोलन स्वीकार नहीं किए जा सकते हैं।
डॉ. भागवत रविवार को जबलपुर के श्रीराम कॉलेज में महाकोशल प्रांत के महाविद्यालयीन छात्रों के साथ संवाद कर रहे थे। डॉ. भागवत इन दिनों तीन दिन के प्रवास पर जबलपुर में हैं। एक सवाल के जवाब में डॉ. भागवत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कोई संबंध नहीं है, हां संघ के लोग जरूर सरकार में है। संघ विचार से प्रेरित संगठन स्वयं अपने संसाधनों से चलाते हैं, वे किसी से कोई धन नहीं लेते हैं। खुद के समर्पण से वे संगठन चलाते हैं।
डॉ. भागवत ने कहा कि संघ का काम व्यक्ति निर्माण है। व्यक्ति निर्माण में सारे अच्छे गुण शामिल हैं और संघ के व्यक्ति निर्माण में सद्गुणों के साथ राष्ट्रीयता के लिए समर्पित होने का भाव सिखाया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज संघ से जो लोग हैं, वे बदले में कुछ पाने के लिए नहीं आए है, वे स्वयं को संघ का घटक मानते हैं, और इसी संकल्प के साथ वे संघ में काम करते है। इसी आधार पर हम कहते है कि सब मिलकर संघ को चलाते है।
समाज में वैचारिक विभाजन की प्रवृत्ति और संस्कारों की कमी संबंधी सवाल पर डॉ. भागवत ने कहा कि हमें सबसे पहले अपने को ठीक करना है, अगर हम ठीक हो गए, तो सब कुछ ठीक होगा। कार्यक्रम के समापन सत्र में उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में भागीदार होने की बात कही।
संकट में सहायता करना हिन्दू का स्वभाव
डॉ. भागवत ने कहा कि हिन्दू धर्म मानव धर्म है। इसका उदाहरण हमें कोरोना के समय देखने को मिला। सभी ने एक दूसरे की सहायता की। जो संकट में था, उसे सहारा दिया और जिस तरह से कोरोना आया, उसी तरह से वह चला भी गया। संवाद के बीच डॉ. भागवत ने लव जिहाद, मतांतरण जैसे मुद्दों पर भी युवाओं के सवालों के जवाब देकर उन्हें संतुष्ट किया।