नई दिल्लीः डिजिटल अरेस्ट के नाम पर हो रही ठगी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। गुरुवार, 29 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सवाल उठाया कि लगातार जागरूकता अभियान चलने और खबरें सामने आने के बाद भी पढ़े-लिखे लोग ठगों के जाल में कैसे फंस रहे हैं? अदालत को बताया गया कि हाल ही में एक महिला ने इस तरह की ठगी में 2.5 करोड़ रुपये गंवा दिए।
महिला से 2.5 करोड़ रुपये की ठगी
सुप्रीम कोर्ट में यह सुनवाई डिजिटल अरेस्ट से जुड़े मामले में हुई । अदालत की मदद कर रहीं वरिष्ठ वकील एनएस नप्पिनई ने बताया कि लोगों को जागरूक करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं, लेकिन ठगी के मामले अब भी सामने आ रहे हैं। इस पर CJI सूर्यकांत ने हैरानी जताई कि जब लोगों को लगातार ऐसी घटनाओं के बारे में बताया जा रहा है, तब भी वे ठगों की बातों पर भरोसा क्यों कर लेते हैं ।
बैंकों की जवाबदेही पर भी सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि ठगी होने के बाद कार्रवाई करना ही काफी नहीं है. बल्कि समय रहते पैसे के गलत लेनदेन को रोकना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सामने बैंकों की जवाबदेही का मुद्दा भी रखा है अदालत चाहती है कि अगर बैंक की लापरवाही के कारण किसी ग्राहक के साथ साइबर ठगी होती है, तो उसे हुए नुकसान की भरपाई का नियम बनाया जाए । इस बारे में RBI के प्रस्तावित नियमों पर विचार किया जा रहा है।
क्या है डिजिटल अरेस्ट?
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठग खुद को पुलिस, CBI या किसी जांच एजेंसी का अधिकारी बताते हैं। वे फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी का डर दिखाकर लोगों से पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।
ध्यान रखें: कोई भी असली पुलिस अधिकारी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी का डर दिखाकर जांच के नाम पर पैसे जमा करने को नहीं कहता। ऐसा कॉल आने पर पैसे न भेजें और तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें।