कटनी। मध्य प्रदेश के कटनी शहर के पुरानी बस्ती इलाके में रहने वाले सुनील कुमार ताम्रकार भले ही अब इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन उनके अंग किसी और के शरीर में जिंदगी की धड़कन बनकर चलते रहेंगे। निधन के बाद उनके परिवार ने उनकी इच्छा के मुताबिक अंगदान का फैसला लिया। अंगदान को लेकर बनाए गए निर्देश के अनुसार गुरुवार को नदीपार मुक्तिधाम में प्रशासन ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर उन्हें अंतिम विदाई दी।
दुख की घड़ी में परिवार ने लिया बड़ा फैसला
सुनील कुमार ताम्रकार ताम्रकार समाज से थे और शेर चौक के रहने वाले थे। उनके जाने से परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा। लेकिन स्वजनों ने इसी घड़ी में समाज के लिए कुछ करने का संकल्प लिया। उन्होंने अंगदान का रास्ता चुना, ताकि किसी और का घर उजड़ने से बच सके। परिवार का यह फैसला पूरे शहर के लिए एक मिसाल बन गया है।
इंदौर के अस्पताल में हुई अंगदान की प्रक्रिया
अंगदान की पूरी प्रक्रिया इंदौर के एक अस्पताल में कराई गई। इसके बाद सुनील ताम्रकार का पार्थिव शरीर कटनी में उनके घर लाया गया। यहां से अंतिम यात्रा निकली और नदीपार मुक्तिधाम पहुंची।
मुक्तिधाम में मिला राजकीय सम्मान
प्रदेश शासन की ओर से सुनील ताम्रकार और उनके परिवार के इस मानवीय फैसले को सम्मान देते हुए राजकीय सम्मान दिया गया। मुक्तिधाम में गार्ड ऑफ ऑनर के साथ उन्हें आखिरी सलामी दी गई। शहर के समाजसेवी और व्यापारी भी बड़ी संख्या में मुक्तिधाम पहुंचे और श्रद्धांजलि अर्पित की।