विदेश। ब्राजील में 80 साल के लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा चौथी बार राष्ट्रपति चुनाव जीत गए हैं। पहले दौर की वोटिंग में वे फ्लावियो बोल्सोनारो से पिछड़ गए थे। लेकिन दूसरे दौर में उन्होंने पूरा खेल पलट दिया। फ्लावियो पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सानारो के बेटे हैं। लूला ने 2022 में उनके पिता को भी हराया था।
पहली बार हुआ ऐसा
ब्राजील में 1989 से सीधे राष्ट्रपति चुनाव हो रहे हैं। तब से यह पहला मौका है, जब पहले राउंड में दूसरे नंबर पर रहा उम्मीदवार आखिरी राउंड में जीतकर राष्ट्रपति बना। पहले चरण में फ्लावियो को 47 फीसदी वोट मिले थे। वहीं, लूला को 45.16 फीसदी वोट मिले। बोल्सोनारो परिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति का करीबी माना जाता है। 2022 के चुनाव में दूसरे चरण में लूला को 50.90 फीसदी और जायर बोल्सानारों को 49.10 प्रतिशत वोट मिले थे।
जेल से सत्ता तक का सफर
बता दें कि लूला 2002 से 2010 तक लगातार दो बार ब्राजील के राष्ट्रपति रहे। इसके बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ा। उनका राजनीतिक सफर उतार चढ़ाव से भरा रहा है। 2018 में भ्रष्टाचार के मामले में उन्हें जेल जाना पड़ा। पर बाद में सजा रद्द हो गई। फिर 2022 का चुनाव लड़कर वे दोबारा राष्ट्रपति बने।
ब्राजील में दो चरणों में कैसे होता है चुनाव
पहले चरण में सभी उम्मीदवार मैदान में उतरते हैं। अगर किसी को 50 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिल जाएं तो वह सीधे राष्ट्रपति बन जाता है। ऐसा न होने पर सबसे ज्यादा वोट पाने वाले दो उम्मीदवार दूसरे चरण में पहुंचते हैं। इस चरण में पहले दौर में बाहर हुए उम्मीदवारों के वोट अपने आप किसी को नहीं मिलते। जिसे ज्यादा वोट मिलते हैं वही राष्ट्रपति बनता है।
पिछड़ने के बाद लूला कैसे जीते
पहले राउंड में हारे में उम्मीदवारों के समर्थकों को दूसरे राउंड में लूला या फ्लावियो में से किसी एक को चुनना था। इसी से जीत का हिसाब बदल गया। चुनाव से पहले के सर्वे में 49 प्रतिशत महिलाओं ने लूला का साथ दिया। वहीं फ्लावियों को 40 प्रतिशत महिलाओं का समर्थन मिला। 52 प्रतिशत कैथोलिक वोटर लूला के साथ दिखे और फ्लावियो को 42 प्रतिशत का समर्थन मिला। लूला ने कहा कि ब्राजील को अपने फैसले खुद लेने चाहिए। अमेरिका के दबाव के बीच देश की आजादी बनाए रखने पर उनके जोर ने भी मतदाताओं को प्रभावित किया।
संसद में विरोधी दल मजबूत
जीत के बाद भी लूला के लिए सरकार चलाना आसान नहीं होगा। ब्राजील की संसद में दक्षिणपंथी दल मजबूत हैं। जायर बोल्सानारो की लिबरल पार्टी और उसके सहयोगियों को निचले सदन में 280 से ज्यादा और सीनेट में 50 तक सीटें मिलने का अनुमान है। ऐसे में फैसले लागू कराने के लिए लूला को दूसरी पार्टियों का साथ लेना होगा। सरकारी खर्च और गरीबों को मिलने वाली मदद जैसे मुद्दों पर संसद में टकराव हो सकता है। माना जा रहा है कि मजबूत विपक्ष के कारण चुनावी वादे पूरे करना उनके लिए मुश्किल हो सकता है।
गरीबों और मजदूरों से किए तीन बड़े वादे
चुनाव प्रचार के दौरान लूला ने गरीब परिवारों का खर्च घटाने और मजदूरों की जिंदगी बेहतर बनाने पर जोर दिया। उन्होंने तीन बड़े वादे किए। पहला, गरीब परिवारों को आर्थिक मदद देने वाली सरकारी योजना की रकम 15 प्रतिशत बढ़ाई जाएगी। दूसरा, शनिवार और रविवार को देशभर में बस और मेट्रो का सफर मुफ्त होगा। इसके लिए संसद की मंजूरी होगी। तीसरा, गरीबी और बेरोजगारी घटाने के लिए रोजगार के ज्यादा मौके बनाए जाएंगे।
बढ़ता कर्ज और महंगाई बढ़ाएंगे परेशानी
लूला का नया कार्यकाल आर्थिक दबाव के बीच शुरू होगा। देश में ब्याज दरें ऊंची हैं। सरकारी कर्ज बढ़ रहा है और आम लोगों पर भी कर्ज का बोझ बढ़ा है। ब्राजील सरकार के अनु्मान के अनुसार अगले साल आर्थिक विकास दर 2.3 प्रतिशत रह सकती है, जबकि सरकारी कर्ज जीडीपी के 82 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गया है।
इंटरनेशनल इनवेस्टमेंट और फाइनेंशिएल सेवा कंपनी में से एक गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, अगले कार्यकाल में सरकारी खर्च को काबू करना लूला सरकार के लिए आसान नहीं होगा। लोगों पर बढ़ते कर्ज को देखते हुए लूला ने प्रचार में कर्ज से राहत की योजना रखी थी और ऑनलाइन सट्टेबाजी पर अस्थायी रोक का कदम भी उठाया गया। दूसरी ओर मजबूत दक्षिणपंथी दल कारोबारियों के पक्ष में आर्थिक सुधार मांग सकते हैं। इससे सरकारी खर्च और गरीबों की मदद को लेकर टकराव बन सकता है।