अमेरिका के मिडटर्म चुनाव 2026 के शुरुआती नतीजों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नॉर्थ कैरोलाइना में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार और पूर्व गवर्नर रॉय कूपर ने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइकल व्हाटली को हराकर सीनेट की सीट अपने नाम कर ली। जॉर्जिया में जॉन ओसॉफ ने भी अपनी सीट बरकरार रखी है। इन नतीजों से अमेरिकी संसद में डेमोक्रेटिक पार्टी की स्थिति मजबूत होने के संकेत मिले हैं।
नॉर्थ कैरोलाइना में रॉय कूपर ने पलटा चुनावी समीकरण
नॉर्थ कैरोलाइना की सीनेट सीट इस चुनाव में सबसे चर्चित मुकाबलों में शामिल थी। पूर्व गवर्नर रॉय कूपर ने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइकल व्हाटली को शिकस्त देकर यह सीट डेमोक्रेटिक पार्टी के खाते में डाल दी। व्हाटली को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन हासिल था। ऐसे में कूपर की जीत को रिपब्लिकन पार्टी के लिए राजनीतिक झटके के तौर पर देखा जा रहा है.कूपर की यह जीत इसलिए भी अहम है, क्योंकि नॉर्थ कैरोलाइना में लंबे समय बाद डेमोक्रेटिक पार्टी को सीनेट में प्रतिनिधित्व मिला है। निवर्तमान रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस ने दोबारा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया था। उनकी खाली हुई सीट पर कूपर और व्हाटली के बीच सीधा मुकाबला था।
जीत के बाद समर्थकों को संबोधित करते हुए कूपर ने कहा कि राज्य के मतदाताओं ने अपनी आवाज बुलंद की है। उन्होंने आम लोगों की आर्थिक परेशानियों का जिक्र करते हुए कहा कि मध्यम वर्ग के लिए बेहतर जीवन हासिल करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है, जबकि देश के सबसे अमीर लोगों की संपत्ति बढ़ रही है।
वॉशिंगटन की राजनीति पर भी साधा निशाना
रॉय कूपर ने अपने चुनावी संबोधन में वॉशिंगटन की राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने वहां फैली अव्यवस्था और भ्रष्टाचार को आम नागरिकों के हितों के खिलाफ बताया। कूपर के मुताबिक, नॉर्थ कैरोलाइना के लोगों ने अपने मतदान के जरिए बदलाव का संदेश दिया है.उन्होंने भरोसा दिलाया कि सीनेट में पहुंचने के बाद वह मतदाताओं की आवाज को राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचाएंगे। उनका चुनाव प्रचार मुख्य रूप से महंगाई, खाद्य पदार्थों और ऊर्जा की बढ़ती कीमतों जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहा।
जॉर्जिया में जॉन ओसॉफ ने बचाई अपनी सीट
डेमोक्रेटिक पार्टी को जॉर्जिया से भी राहत मिली है। मौजूदा सीनेटर जॉन ओसॉफ ने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक कॉलिन्स को हराकर दोबारा जीत दर्ज की। ओसॉफ की जीत को डेमोक्रेट्स के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में इस राज्य में डोनाल्ड ट्रंप को बढ़त मिली थी। इसके बावजूद डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अपनी सीट बचाने में सफल रहे।
मिडटर्म चुनाव में किसकी कितनी सीटें दांव पर?
अमेरिका में राष्ट्रपति का कार्यकाल चार साल का होता है। राष्ट्रपति चुनाव के ठीक दो साल बाद मध्यावधि यानी मिडटर्म चुनाव कराए जाते हैं। इसमें राष्ट्रपति पद के लिए मतदान नहीं होता, बल्कि अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में राजनीतिक दलों की ताकत का फैसला होता है.इस बार प्रतिनिधि सभा (House of Representatives) की सभी 435 सीटों पर चुनाव हो रहा है। वहीं 100 सदस्यीय सीनेट की 33 नियमित सीटों के अलावा दो रिक्त पदों के लिए भी विशेष चुनाव कराए जा रहे हैं। यानी सीनेट की कुल 35 सीटों पर मतदान हुआ है। इसके अतिरिक्त 36 राज्यों में गवर्नर पद के चुनाव भी इस प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
फिलहाल रॉय कूपर और जॉन ओसॉफ की जीत ने डेमोक्रेटिक पार्टी की स्थिति को मजबूत किया है, लेकिन इससे सीनेट पर नियंत्रण का फैसला अपने आप नहीं हो जाता। प्रतिनिधि सभा के नतीजे भी सत्ता के इस समीकरण में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। अब सबकी निगाहें बाकी सीटों की मतगणना और अंतिम चुनावी नतीजों पर टिकी हैं।