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रांची/डेस्क: राजनीति की गलियारों में अरविंद केजरीवाल का नाम आज काफी चर्चित है, लेकिन एक वक्त था जब अरविंद केजरीवाल का राजनीति से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं था. एक आम युवा की तरह वह भी कभी एक साधारण नौकरी किया करते थे. अरविंद केजरीवाल के बारे में ये बात शायद बहुत कम लोगों को ही पता होगी कि उन्होंने अपनी पहली नौकरी झारखंड के जमशेदपुर में की थी, जहां उन्होंने तक़रीबन तीन सालों तक काम भी किया.
टाटा स्टील से में रहे 3 साल
अरविंद केजरीवाल ने आईआईटी खड़गपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद उन्होंने अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत देश की दिग्गज औद्योगिक कंपनी टाटा स्टील से की थी. साल 1989 में वह टाटा स्टील से जुड़े और उनकी पोस्टिंग जमशेदपुर में हुई. जमशेदपुर में केजरीवाल ने ग्रेजुएट ट्रेनी के तौर पर काम किया.
केजरीवाल ने टाटा स्टील में करीब तीन साल तक काम किया. इसके बाद उन्होंने 1992 में इस्तीफा दे दिया. सरकारी नौकरी की तैयारी करने के लिए उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला लिया. इसके बाद उन्हें सफलता भी मिली. उन्होंने भारतीय राजस्व सेवा यानी आईआरएस की परीक्षा पास की और इनकम टैक्स विभाग में अधिकारी बन गए.
अरविंद केजरीवाल का राजनीतिक सफ़र
समय के साथ आगे चलकर उनका जीवन सामाजिक आंदोलनों से जुड़ा. भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान वह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए. और यही वह वक्त जब अरविंद केजरीवाल ने राजनीति में अपना कदम रखा. 24 नवंबर 2012 में उन्होंने आम आदमी पार्टी बनाई और इसके बाद लगातार उन्होंने दिल्ली की जनता के दिलों में राज किया.
2013 में हुए विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस की पूर्व सीएम शीला दीक्षित को हराया और पहली बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बन गए. इसके बाद 2015 में हुए चुनाव में वापस उनकी पार्टी ने 70 में से रिकॉर्ड तोड़ 67 सीटें जीतीं और अरविंद केजरीवाल लगातार दूसरी बार सीएम बने. इसके बाद 2020 में हुए चुनव में भी जनता ने उन पर पूरा भरोसा जताया और लगातार तीसरी बार अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री बन गए.
हालांकि हाल में हुए चुनाव में अरविंद केजरीवाल को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद वह दिल्ली की राजनीति में सक्रीय हैं.
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