मुमताज अहमद/न्यूज11 भारत
खलारी/डेस्क: एनके एरिया प्रबंधन पर मजदूरों की 18 सूत्री मांगों की लगातार अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए एनके क्षेत्र में कार्यरत 10 केंद्रीय श्रम संगठनों के संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर मंगलवार को महाप्रबंधक कार्यालय डकरा के समक्ष जोरदार धरना दिया गया. धरने में बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष कर्मचारियों ने हिस्सा लेकर प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी जताई.
संयुक्त मोर्चा के नेताओं ने कहा कि मजदूरों की समस्याओं और मांगों को लेकर प्रबंधन को पहले ही 18 सूत्री मांग पत्र सौंपकर समाधान की मांग की गई थी. मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होने के कारण संयुक्त मोर्चा ने आंदोलन का रास्ता अपनाया और पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत एकदिवसीय धरना दिया.
धरने में सभी कर्मचारियों को संडे/पीएचडी देने, बायोमेट्रिक अटेंडेंस नहीं कराने की मांग प्रमुखता से उठी. इसके साथ ही सिविल एवं एएंडएम विभाग में एएमसी/सीएमसी के माध्यम से हुए करीब 45 करोड़ रुपये के कार्यों की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा पिछले तीन वर्षों में सीएसआर के तहत हुए कार्यों और सामग्री खरीद की जांच कराने की मांग की गई. चूरी खदान में चाल धंसने की घटना को भी जांच के दायरे में लाने की मांग नेताओं ने उठाई.
वक्ताओं ने कहा कि प्रबंधन की कथित हठधर्मिता के कारण मजदूरों की समस्याएं लंबित हैं. उन्होंने कहा कि प्रबंधन को मजदूरों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना होगा. नेताओं ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा, “अभी तो झांकी है, बड़ा आंदोलन अभी बाकी है.” उन्होंने कहा कि मांगों का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा.
धरने की अध्यक्षता संयुक्त मोर्चा के वरिष्ठ नेताओं ने संयुक्त रूप से की, जबकि संचालन शैलेश कुमार ने किया. मौके पर ललन प्रसाद सिंह, विनय सिंह मानकी, प्रेम कुमार, गोल्डेन प्रसाद यादव, शैलेश कुमार, सुनील कुमार सिंह, अमर भूषण सिंह, हरेंद्र सिंह, मिथिलेश कुमार सिंह, शैलेन्द्र कुमार सिंह, देवपाल मुंडा, राघो चौबे, अनिल कुमार चौबे, राघवेंद्र पासवान, ध्वजा राम धोबी, कृष्णा चौहान, सोनू पांडेय, बहुरा मुंडा, अशोक कुमार सिंह, अरविन्द कुमार, रमेश सिंह, धीरज कुमार, संजीव रंजन सिंह, उदय कुमार सिंह, सुरेश साव, कन्हाई पासी, मिथिलेश सिंह, प्रमोद पाठक, सुजीत कुमार, पजू महतो, मुमताज अहमद, मनोज कुमार, बीरेन पासवान, ईशान गंझू, नरेश प्रसाद, हलीम खान, अनुप रजक एवं मुबारक खान सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी एवं श्रमिक नेता मौजूद रहे.
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