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लाइफस्टाइल/डेस्क: जर्मनी के बवेरिया में एक सुनसान फार्महाउस...वहां रहने वाले छह लोग और एक ऐसी रात, जिसने इस जगह को इतिहास के सबसे रहस्यमयी हत्या मामलों में शामिल कर दिया. साल 1922 में हुई Hinterkaifeck Murder की गुत्थी आज भी पूरी तरह सुलझ नहीं पाई है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उन छह लोगों को किसने और क्यों मारा?
31 मार्च की रात क्या हुआ था?
Hinterkaifeck बवेरिया में स्थित एक अलग-अलग फार्महाउस था. 31 मार्च 1922 की रात वहां रहने वाले छह लोगों की हत्या कर दी गई. मृतकों में 63 वर्षीय Andreas Gruber, उनकी 72 वर्षीय पत्नी Cazilia Gruber, उनकी 35 वर्षीय विधवा बेटी Viktoria Gabriel, Viktoria के सात साल की बेटी Cäzilia और दो साल के बेटे Josef के साथ नई नौकरानी Maria Baumgartner शामिल थीं.Maria ने उसी दिन फार्महाउस में काम शुरू किया था. जांच के मुताबिक, परिवार के चार सदस्यों को खलिहान की ओर ले जाया गया, जहां उनके सिर पर वार कर हत्या की गई. इसके बाद घर के अंदर मौजूद दो अन्य लोगों को भी मार दिया गया. हत्या में इस्तेमाल किया गया औजार बाद में फार्महाउस की तलहटी में मिला था.

हत्या से पहले ही कुछ अजीब हो रहा था
इस केस को रहस्यमयी बनाने वाली बात सिर्फ छह हत्याएं नहीं थीं. हत्या से कुछ समय पहले फार्महाउस के आसपास कुछ अजीब घटनाओं की चर्चा हुई थी. परिवार की पिछली नौकरानी ने करीब छह महीने पहले काम छोड़ दिया था. बाद में यह बात सामने आई कि उसने अटारी से अजीब आवाजें सुनने की बात कही थी. हत्या से कुछ दिन पहले Andreas Gruber ने बर्फ पर जंगल से फार्महाउस की ओर आते पैरों के निशान भी देखे थे. उन्हें एक ऐसा अखबार भी मिला था जिसे परिवार ने खरीदा नहीं था. परिवार ने घर के अटारी से कदमों की आवाज सुनने की बात भी कही थी. हालांकि, इन घटनाओं के कई विवरण बाद की रोपोर्टिंग और गवाहियों से जुड़े हैं, इसलिए इन्हें हत्या से निश्चित रूप से जोड़ना सही नहीं होगा.

चार दिन तक घर में पड़े रहे शव
हत्या के बाद तुरंत किसी को घटना की जानकारी नहीं हुई. 1 अप्रैल को कुछ लोग फार्महाउस पहुंचे, लेकिन परिवार की ओर से कोई जवाब नहीं मिला. 4 अप्रैल को स्थानीय लोगों ने वहां जाकर जांच की. इसी दौरान खलीहान में चार शव मिले और बाद में घर के अंदर दो और शव बरामद हुए. यानी हत्या और शव मिलने के बीच करीब चार दिन का अंतर था. इस मामले की जांच लंबे समय तक चली. कई लोगों से पूछताछ हुई और अलग-अलग संभावनाओं पर विचार किया गया, लेकिन किसी संदिग्ध के खिलाफ ऐसा सबूत नहीं मिला सका जिससे उसे हत्यारा साबित किया जा सके. बाद की पुलिस समीक्षा में भी केस को सुलझाना बेहद मुश्किल माना गया, खासकर इसलिए क्योंकि उस समय आधुनिक फॉरेंसिक जांच और क्राइम-सीन सुरक्षित रखने की सुविधाएं आज जैसी नहीं थी.