मध्यप्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों के छठवें वेतनमान और बकाया एरियर का मामला एक बार फिर कानूनी पेच में फंस गया है. जबलपुर हाईकोर्ट के आदेश के बाद शिक्षकों को एरियर मिलने की उम्मीद जगी दी. लेकिन राज्य सरकार ने फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी. अब सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस निर्देश पर अंतरिम रोक लगा दी है.
डेढ़ महीने होगी सुनवाई
मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अगली सुनवाई करीब डेढ़ महीने बाद होनी है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था कि यदि 23 नवंबर 2026 तक भुगतान नहीं किया जाता है, तो स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इसी निर्देश पर रोक लगाई है।
2006 से 2016 तक के एरियर का मामला
जबलपुर हाईकोर्ट ने पात्र शिक्षकों की सेवा अवधि उनकी पहली नियुक्ति से जोड़ने और वर्ष 2006 से छठवें वेतनमान का लाभ देने का आदेश दिया था. इसके तहत वर्ष 2006 से 2016 तक के बकाया एरियर के भुगतान के निर्देश भी शामिल थे.इस फैसले से उन शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद थी, जो लंबे समय से वेतनमान और बकाया राशि के लाभ की मांग कर रहे थे।
15 से 20 हजार रुपये तक बढ़ सकता था वेतन
रिपोर्ट के मुताबिक, हाईकोर्ट के फैसले से करीब 70 हजार शिक्षकों को लाभ मिलने की संभावना थी. पात्र शिक्षकों के मासिक वेतन में औसतन 15 हजार से 20 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी का अनुमान जताया गया था. हालांकि, वास्तविक लाभ प्रत्येक शिक्षक की नियुक्ति, सेवा अवधि और वेतन निर्धारण पर निर्भर करेगा।
अब क्या करना होगा?
अब नजर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर है. उसी से स्पष्ट होगा कि हाईकोर्ट के आदेश और शिक्षकों के बकाया भुगतान के मामले में आगे क्या दिशा तय होती है.