छत्तीसगढ़ में पुलिस स्मृति दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि देश की एकता, अखंडता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्राण न्योछावर करने वाले जवानों का बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने इस दिन को सिर्फ शहीदों को याद करने तक सीमित न रखते हुए पुलिस सेवा की परंपरा और उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने का अवसर बताया।
पुलिस स्मृति दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में शहीद जवानों के साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र के प्रति समर्पण को याद किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिसकर्मी कठिन परिस्थितियों में भी अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं और नागरिकों की सुरक्षा के साथ समाज में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार काम करते हैं।
'स्मरण के साथ सेवा परंपरा आगे बढ़ाने का संकल्प भी'
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि पुलिस स्मृति दिवस का महत्व शहीदों को श्रद्धांजलि देने के साथ उनके आदर्शों को अपने आचरण में उतारने में भी है। जिन जवानों ने देश और समाज की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया, उनका साहस आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।उन्होंने पुलिस बल की जिम्मेदारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि जवान विपरीत परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटते। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में उनकी भूमिका अहम है।
नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में जवानों के बलिदान को किया याद
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद से प्रभावित रहे इलाकों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदेश ने शांति, सुरक्षा और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। इस बदलाव में पुलिस और सुरक्षा बलों के जवानों के साहस, पराक्रम और बलिदान की बड़ी भूमिका रही है।लंबे समय तक हिंसा और भय का सामना करने वाले क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना और विकास की राह आसान बनाना बड़ी चुनौती रही है। ऐसे में शहीद जवानों का योगदान प्रदेश की सुरक्षा यात्रा का अहम हिस्सा है।
शहीद पुलिसकर्मियों का बलिदान रहेगा याद
पुलिस स्मृति दिवस उन पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि देने का अवसर है, जिन्होंने ड्यूटी के दौरान देश और नागरिकों की रक्षा करते हुए अपनी जान गंवाई। यह दिन पुलिस बल के प्रति सम्मान जताने के साथ सुरक्षा, सेवा और कर्तव्य के मूल्यों को दोहराने का भी संदेश देता है।मुख्यमंत्री के संदेश के केंद्र में भी यही बात रही कि शहीदों को याद करना तभी सार्थक है, जब उनके दिखाए रास्ते पर चलते हुए जनसेवा और नागरिकों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता कायम रखी जाए।