ग्वालियर। जिले के झांसी रोड स्थित एजी ऑफिस पुल के पास संचालित दारुल कुरान मदरसा अब सिर्फ बच्चों के संरक्षण और संचालन को लेकर ही नहीं, बल्कि जमीन के मालिकाना हक को लेकर भी सवालों के घेरे में है। जिस जमीन पर मदरसा और मस्जिद संचालित हो रही है, उसके शासकीय होने की बात सामने आने के बाद प्रशासन ने राजस्व रिकॉर्ड खंगालना शुरू कर दिया है। जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि जमीन का कितना हिस्सा मस्जिद के नाम पर दर्ज है और कितना वक्फ बोर्ड का नाम दर्ज है, ऐसा किस आधार पर हुआ।
उल्लेखनीय है कि दो दिन पहले मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग और बाल कल्याण समिति के संयुक्त जांच दल ने मदरसे का निरीक्षण किया था। इस दौरान वहां से 26 बच्चों को रेस्क्यू किया गया। अब मदरसे के संचालन के साथ जमीन के रिकॉर्ड, निर्माण की अनुमति, बच्चों से वसूले जाने वाले शुल्क और निर्माण कार्य में खर्च होने वाली राशि को लेकर भी जांच की तैयारी है।
चूंकि संबंधित जमीन एजी ऑफिस को शासन की ओर से दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इसी जमीन से लगी हुई मस्जिद भी बनी हुई है। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक शासकीय खसरे में संबंधित स्थान पर मस्जिद ईदगाह दर्ज होने की जानकारी है, लेकिन इसका क्षेत्रफल कितना है और वास्तविक स्थिति क्या है, यह रिकॉर्ड निकलवाने के बाद ही स्पष्ट होगा। प्रशासन यह भी जांचेगा कि जमीन वक्फ बोर्ड के नाम पर दर्ज है या नहीं। यदि ऐसा है, तो उसके दस्तावेज और दर्ज किए जाने का आधार भी देखा जाएगा।
20 हजार वर्गफुट से अधिक क्षेत्र में निर्माण, अनुमति की जांच करेगा निगम
मदरसा और मस्जिद का परिसर करीब 20 हजार वर्गफुट से अधिक क्षेत्र में फैला बताया जा रहा है। परिसर में नया निर्माण भी कराया जा रहा है। ऐसे में नगर निगम यह जांच करेगा कि निर्माण के लिए नियमानुसार अनुमति ली गई थी या नहीं। यदि बिना अनुमति निर्माण पाया जाता है, तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई भी की जाएगी।
दाखिले का नियम को लेकर चौंकाने वाला खुलासा
मदरसे में दाखिले के लिए बच्चों की न्यूनतम उम्र छह से सात साल निर्धारित होने की जानकारी सामने आई है। इसके बावजूद रेस्क्यू की गई छह बच्चियों की उम्र पांच साल से भी कम बताई जा रही है।
प्रवेश शुल्क 1200 रुपये देरी पर रोज जुर्माना भी
मदरसे में दाखिले के लिए निर्धारित नियमों में शुल्क का उल्लेख किया गया था। प्रत्येक बच्चे का प्रवेश शुल्क प्रतिवर्ष के लिए 1200 रुपए तय था। इसके अलावा मासिक शुल्क लड़कियों के लिए 800 रुपए और लड़कों के लिए 600 रुपए निर्धारित किया गया था। शुल्क समय पर जमा नहीं करने पर प्रतिदिन पांच रुपए जुर्माना लगाने का प्रावधान भी बताया गया है। अब जांच में इन नियमों के साथ यह भी देखा जाएगा कि वास्तव में कितनी राशि वसूली जाती थी और उसका हिसाब रखा जाता था या नहीं।
निर्माण के फंड पर भी सवाल
मदरसे में बच्चों से लिए जाने वाले शुल्क का स्पष्ट हिसाब किताब सामने नहीं आया है। इसके अलावा परिसर में कराए जा रहे निर्माण कार्य के लिए राशि कहां से आ रही थी, इसकी जानकारी भी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में प्रशासन के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि मदरसे और मस्जिद के रखरखाव तथा निर्माण का खर्च किस स्रोत से पूरा किया जा रहा था।
आयोग के निर्देश नहीं थे फिर भी बाल गृह में कराई बच्चों से मुलाकात
मदरसे से रेस्क्यू कर बाल गृह भेजे गए बच्चों के परिजन रविवार दोपहर जिलाधीश निवास पहुंचे। उन्होंने बच्चों से मुलाकात कराने की मांग की। इसके बाद डीपीओ उपासना राय ने सीडब्ल्यूसी सदस्य रश्मि त्रिपाठी से फोन पर संपर्क कर परिजनों की मुलाकात कराने की बात कही। इसके बाद परिजनों को बाल गृह ले जाकर बच्चों से मिलवाया गया। हालांकि बाल संरक्षण आयोग के निर्देश थे कि जांच पूरी होने तक बच्चों की परिजनों से मुलाकात नहीं कराई जाए। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि स्पष्ट निर्देशों के बावजूद मुलाकात कैसे करा दी गई। यह भी सवाल है कि क्या इस संबंध में बाल कल्याण समिति से औपचारिक चर्चा और अनुमति ली गई थी? मामले में डीपीओ उपासना राय का पक्ष जानने के लिए कई बार फोन किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।
प्रश्न यह भी जिनके जवाब चाहिए
-मदरसे के लिए जमीन कहां से मिली। किस अधिकारी ने दी?
- अगर जमीन सरकारी है तो गड़बड़ी करने वाले अधिकारी कौन हैं?
-जमीन का कितना हिस्सा मस्जिद और कितना मदरसे के नाम पर दर्ज है?
-मदरसे में अब तक धार्मिक शिक्षा लेने वाले बच्चे अब कहां हैं और क्या कर रहे हैं?
-नियमित जांच की जिम्मेदारी किसकी? क्या यह नियमित जांच कर रहे थे, अगर जांच कर रहे थे तो यह गड़बड़ियां सामने क्यों नहीं आई जो अब आ रही है?
-मदरसा चलाने के लिए फंड कहां से आ रहा था?
-मदरसे में पढ़ने वाले बच्चों ने बयान में प्रताड़ित किए जाने की बात बताई है फिर अब तक अपराधिक मामला दर्ज क्यों नहीं किया गया है?
क्या बोले अधिकारी
मामला सामने आने के बाद एसडीएम अतुल सिंह ने कहा कि झांसी रोड पर स्थित अदरसरे की जमीन की जांच की जाएगी। इसके लिए रिकॉर्ड निकलवाया जा रहा है।
पक्ष देने से किया इनकार
मदरसे से जुड़े मोहम्मद शाकिर से पक्ष जानने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने कुछ भी बताने से इनकार करते हुए फोन काट दिया।