Gwalior Madrasa Raid:ग्वालियर में बच्चों की सुरक्षा और मदरसे के संचालन से जुड़े नियमों को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की टीम ने एजी ऑफिस के पास स्थित दारूल कुरआन मदरसे का निरीक्षण कर 22 बच्चों को रेस्क्यू किया। अधिकारियों के मुताबिक, जांच के दौरान मदरसा प्रबंधन जरूरी दस्तावेज और मान्यता से जुड़े रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करा सका।
ग्वालियर के मदरसे में क्या मिला?
बाल कल्याण समिति से मिली सूचना के बाद राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष निवेदिता शर्मा महिला एवं बाल विकास विभाग और बाल कल्याण समिति के अधिकारियों के साथ मदरसे पहुंचीं। टीम ने परिसर का निरीक्षण किया और वहां रह रहे बच्चों की स्थिति के साथ उनके रहने, पढ़ाई और देखरेख की व्यवस्थाओं की जानकारी ली।
अधिकारियों के अनुसार, मदरसे में 4 से 16 साल तक के बच्चे मौजूद थे। जांच में नियमित पढ़ाई की व्यवस्था और बच्चों की देखभाल के लिए पर्याप्त स्टाफ को लेकर भी सवाल सामने आए। प्रबंधन से बच्चों से संबंधित रिकॉर्ड और संस्था के संचालन के दस्तावेज मांगे गए, लेकिन मौके पर ये उपलब्ध नहीं कराए जा सके।
22 बच्चों को बाल कल्याण समिति की निगरानी में भेजा
कार्रवाई के दौरान बच्चों को मदरसे से निकालकर उनकी उम्र के हिसाब से अलग-अलग गृहों में भेजा गया। बाल कल्याण समिति की निगरानी में उनकी देखरेख की व्यवस्था की गई है.हालांकि, बच्चों के संबंध में एक आंकड़े पर स्पष्टता जरूरी है। उपलब्ध रिपोर्ट के शुरुआती हिस्से में कुल 22 बच्चों को रेस्क्यू किए जाने की बात कही गई है, जबकि आगे 15 बालकों और 8 बालिकाओं का जिक्र है। इन दोनों आंकड़ों का जोड़ 23 होता है। इसलिए बच्चों का सटीक लिंगवार विवरण संबंधित अधिकारियों से पुष्टि के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
तीन बच्चियों के कमरे में बंद होने की जानकारी
निरीक्षण के दौरान आयोग की अध्यक्ष निवेदिता शर्मा के हवाले से बताया गया कि तीन बच्चियां कमरे में बंद मिली थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, मदरसा प्रबंधन ने अधिकारियों को इस बारे में पहले जानकारी नहीं दी थी.इस घटनाक्रम के बाद बच्चों की सुरक्षा, उनके रहने की परिस्थितियों और संस्था में निगरानी की व्यवस्था को लेकर जांच का दायरा बढ़ गया है। हालांकि, बच्चियों को कमरे में बंद रखने की परिस्थितियों और इसकी वजह के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस संबंध में जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
गुप्त सूचना के बाद पहुंची थी टीम
मदरसे में बच्चों को रखे जाने और जरूरी मान्यता नहीं होने की सूचना पहले बाल कल्याण समिति को मिली थी। इसके बाद मामला राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग तक पहुंचा और अधिकारियों ने मौके पर जाकर जांच की.दोपहर से शाम तक चली कार्रवाई में बच्चों के दस्तावेज, संस्था के संचालन से जुड़े रिकॉर्ड और देखरेख की व्यवस्थाओं की पड़ताल की गई। अधिकारियों के मुताबिक, मदरसे की मान्यता और बच्चों को वहां रखने से संबंधित जरूरी दस्तावेज मौके पर नहीं मिले। इन तथ्यों के आधार पर संबंधित नियमों के तहत जांच की जा रही है।
कुछ दिन पहले लापता हुआ था 13 साल का बच्चा
मामले में एक और अहम जानकारी सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ दिन पहले इसी मदरसे में रहने वाला 13 साल का एक बच्चा लापता हो गया था। वह सागरताल क्षेत्र के मेवाती मोहल्ले के रहने वाले परिवार का था और मदरसे में रहकर पढ़ाई करता था।
अब आगे क्या होगा?
अब आगे की कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि जांच में मदरसे के संचालन, बच्चों को वहां रखने और उनकी देखरेख से जुड़े नियमों के उल्लंघन की क्या स्थिति सामने आती है। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर मदरसा प्रबंधन के खिलाफ किसी अंतिम निष्कर्ष या कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है।