इंदौरः परंपराएं समय के साथ भले ही अपने कदम धीमे कर लें, लेकिन वे व्यक्ति, परिवार, समाज को जोड़े रखने का मूलमंत्र बनी रहती हैं। लेकिन परंपरा में जब एक बार ब्रेक लग जाए तो उसकी शुरुआत आसान नहीं होती और जब उसकी शुरुआत में समाज ही अवरोध बनकर खड़ा हो जाए, तब उस मातृशक्ति की हिम्मत की दाद देनी होगी, जिसने परिवार-समाज के आक्रोश की चिंता किए बिना ससुर की उस परंपरा को पुनर्जीवित कर दिया और पुनर्जीवन भी ऐसा कि अब अखाड़े में पुरुष पहलवान ही दांव नहीं लगाते, बल्कि बेटियां कुश्ती, पहलवानी और शस्त्र कला में पारंगत हो रही हैं।
बात हो रही है अहिल्या नगरी इंदौर में बड़ी ग्वालटोली क्षेत्र में स्थित प्राचीन 'श्रीरामनाथ गुरु व्यायामशाला' की। पूर्वजों से मिली विरासत को स्वयं लंबे समय तक रामनाथजी ने व्यायामशाला को आगे बढ़ाया, लेकिन आधुनिकता के चलते करीब चार दशक पूर्व उन्हीं के सामने बंद हो गई थी। बाद में उनकी बहू हेमलता मुन्ना बौरासी ने इस बंद व्यायामशाला को संचालित करने का साहसिक कदम ससुरजी की बारहवीं पर उठाया। आज यह व्यायामशाला पुन: 'श्रीरामनाथ गुरु व्यायामशाला-बालिका शस्त्र कला दल' के रूप में अपनी पहचान राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण अक्षरों में अंकित कर रही है। हेमलता बौरासी ने असंभव को संभव कर दिखाया।

आत्मरक्षा से शुरू होकर यहां पहुंची बात-हेमलता बौरासी मूलत: रतलाम से हैं। विवाह होकर इंदौर आईं। उनकी तीन बेटियां और एक बेटा है। पहलवानी के क्षेत्र में दुश्मन बहुत होते हैं, ऐसे में लड़ाई-झगड़े के अनेक घटनाक्रम देखने के बाद उन्होंने तय किया कि बेटियों को अपनी आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देना ही चाहिए और इसके लिए उन्होंने ससुरजी के बंद अखाड़े को शुरू करने का विचार रखा। परिवार व समाज ने इसका खुला विरोध किया। यह कहकर कि बेटियां अब छोटे कपड़े पहनकर कुश्तियां लड़ेंगी? लेकिन हेमलता के पति मुन्ना बौरासी ने बेेटियों को आत्मरक्षा के गुर सिखाने की पत्नी की इस पहल का न केवल स्वागत किया, बल्कि हर कदम पर सहयोग भी किया।
मध्यप्रदेश का पहला महिला अखाड़ा-इंदौर का श्रीरामनाथ गुरु व्यायामशाला मप्र का पहला महिला अखाड़ा है, जो इंदौर में गणेश चतुर्थी पर तो परंपरागत चल समारोह में विभिन्न हैरतअंगेज प्रदर्शन करता ही है, साथ ही इस अखाड़े की महिला टीम राज्य के अलग-अलग हिस्सों में भी जुलूसों, कार्यक्रमों में प्रदर्शन कर चुकी है। हेमलता मुन्ना बौरासी इसकी मुख्य संचालिका हैं और अब उनकी बेटी नीलिमा बौरासी विगत 6-7 सालों से लड़कियों को कुश्ती के साथ ही लाठी, बनेटी, तलवारबाजी कें भी गुर सिखाती हैं। वर्तमान में अखाड़े में 60 लड़कियां हैं, जिनमें 35 से अधिक तलवारबाजी और 25 कुश्ती के गुर सीख रही हैं।
अनंत चतुर्दशी पर महिला वर्ग में प्रथम स्थान-हेेमलता बताती हैं कि श्रीरामनाथ गुरु व्यायामशाला में महिला-पुरुष दोनों को प्रशिक्षण दिया जाता है। अभ्यास सत्र एक साथ आयोजित किए जाते हैं, लेकिन प्रशिक्षण देेने वाले महिला-पुरुष अलग-अलग अभ्यास करवाते हैं। प्रशिक्षण अभ्यास शाम से लेकर रात्रि 11 बजे तक चलता है। यहां प्रशिक्षण का कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। इस वर्ष अनंत चतुर्दशी की झांकियों में इस व्यायामशाला के अखाड़ा प्रदर्शन में बालिकाओं के तलवारबाजी, लाठी, बनेटी को प्रथम स्थान मिला। यह सफलता महिला शक्ति और उनकी पारंपरिक कलाओं में बढ़ती रुचि और भागीदारी को भी रेखांकित करती है।

राष्ट्रीय कुश्ती में नीलिमा को कांस्य पदक
हेमलता की बेटी नीलिमा, रेणुका व आश्रय बौरासी पहलवानी और तलवारबाजी की कलाकार हैं। बेटे पुष्पेन्द्र ने भी यहीं से कुश्ती के गुर सीखे हैं। 2012 में नीलिमा को 8वीं राष्ट्रीय कुश्ती चैम्पियनशिप में सीनियर वर्ग में कांस्य पदक मिला था। नीलिमा मप्र की ऐसी पहली खिलाड़ी बनीं, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सीनियर वर्ग में पदक प्राप्त हुआ। नीलिमा खेल युवक कल्याण में कोच पद पर कार्यरत हैं। नीलिमा ने अभिनेत्री अनुष्का शर्मा की प्रशिक्षक का भी दायित्व निर्वाह किया है। 'सुल्तान' फिल्म में अनुष्का ने पहलवान की भूमिका निभाई थी। यही नहीं, आमिर की दंगल में फातिमा व सान्या के साथ तलवारबाजी के अभ्यास में भी उन्हें देखा जा सकेगा।