राजेश जायसवाल, महराजगंज: भारत-नेपाल सीमा से सटे नौतनवा क्षेत्र में एक चर्चित सीए से काम करने वाले लगभग सैकड़ो व्यापारियों की जीएसटी और आईजीएसटी से जुड़े कथित लेनदेन को लेकर व्यापारियों में चिंता बढ़ती जा रही है। बताया जा रहा है कि बड़ी संख्या में व्यापारियों ने अपने जीएसटी पोर्टल से जुड़े लॉगिन विवरण और ई-मेल की जानकारी एक चर्चित सीए (चार्टर्ड अकाउंटेंट) को दी थी। अब उन्हीं व्यापारिक फर्मों के नाम से आईजीएसटी विभाग की ओर से नोटिस पहुंचने का दावा किया जा रहा है।
व्यापारियों के अनुसार, उनके जीएसटी खातों का इस्तेमाल कर कथित तौर पर लाखों रुपये के लेनदेन अथवा बिलिंग का खेल किया गया। विभागीय नोटिस मिलने के बाद जब व्यापारियों ने संबंधित सीए से संपर्क किया तो उन्हें मामले के जल्द निपटारे का आश्वासन दिया गया। हालांकि, पिछले करीब 1 वर्ष से चल रहे इस कथित 'मैनेजमेंट' को लेकर व्यापारी अब असमंजस में हैं। सूत्रों का ही बताना है कि का सभी व्यापारियों को अस्वासन देकर सुला दिया है कि मामला जल्द ही मैनेज हो जाएगा और किसी व्यापारी को पैसा नहीं जमा करना पड़ेगा यह आश्वासन सुनने के बाद व्यापारी असमंजस में पड़े है। व्यापारी के सामने आगे कुआं बीच में खाई की स्थिति बनी हुई है जाए तो किधर जाए?
व्यापारियों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि विभागीय नोटिस का नियमानुसार जवाब दिया जाता है तो कथित लेनदेन से जुड़े टैक्स और अन्य देनदारियों का भुगतान किसकी जिम्मेदारी होगी। वहीं दूसरी ओर, कुछ व्यापारी अभी भी मामले को संबंधित सीए के भरोसे छोड़कर बैठे हैं।
बताया जा रहा है कि पिछले करीब एक वर्ष से कई व्यापारियों को नोटिस मिल रहे हैं और वे समाधान की उम्मीद में संबंधित सीए के संपर्क में हैं। लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, व्यापारियों की चिंता भी बढ़ती जा रही है। जीएसटी पोर्टल की आधिकारिक गाइड में भी करदाताओं को यूजरनेम और पासवर्ड किसी के साथ साझा नहीं करने की सलाह दी गई है। पोर्टल पर अनधिकृत गतिविधि की आशंका होने पर पासवर्ड तत्काल बदलने और जीएसटी हेल्पडेस्क को सूचित करने का निर्देश है।
इधर, सूत्रों के अनुसार आईजीएसटी से जुड़े मामले की जांच आगे बढ़ रही है और कथित रूप से जिन फर्मों के नाम से रिटर्न अथवा लेनदेन दर्ज हुए हैं, उनकी भूमिका की भी जांच की जा रही है। हालांकि, इस मामले में संबंधित विभाग की आधिकारिक रिपोर्ट और संबंधित सीए का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
अब सवाल यह है कि जिन व्यापारियों की फर्मों के नाम पर कथित तौर पर लेनदेन हुए हैं, वे स्वयं विभाग के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे या पूरे मामले के निपटारे के लिए सीए के भरोसे रहेंगे। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वास्तविक लेनदेन क्या था और जिम्मेदारी किसकी बनती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, जिन व्यापारियों को नोटिस मिला है, उन्हें अपने स्तर पर जीएसटी रिकॉर्ड, रिटर्न, ई-वे बिल और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर विभाग के समक्ष तथ्य रखने चाहिए। DGGI देशभर में फर्जी इनवॉइस और गलत तरीके से ITC लेने जैसे मामलों की जांच करता है।