अमेठी: अवैध पटाखे का कारोबार दशकों से अमेठी के कई गांवों तक फैला हुआ है।इस गोरखधंधे में शामिल कारोबारी विस्फोटक सामाग्री विभागीय मिलीभगत से खुलेआम बड़े शहरों से ले आकर गांव-गांव तक पहुंचाते हैं जबकि पुलिस प्रशासन इन गतिविधियों से पूरी तरह अंजान है।
बीते साल महिला हुई थी घायल
दिलचस्प है कि अवैध रूप से पटाखा बनाते समय विस्फोट के बाद ही प्रशासन को जांच-पड़ताल की याद आती है। बीते वर्षों में कई अवैध पटाखा बनाने का कारोबार होते समय विस्फोट हो चुके हैं बावजूद इसके प्रशासन घटनाओं पर अमल नहीं कर रहा है। इसी क्रम में बीते शुक्रवार की रात को अमेठी के मोहनगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत हसवा गांव में पटाखा बनाते समय विस्फोट होने से एक महिला गंभीर रूप से झुलस गई थी। घायल महिला को ग्रामीणों की मदद से स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया,जहां पर उसकी हालत अभी भी चिंताजनक बनी हुई है। घटना के बाद से गांव में दहशत का माहौल कायम है।
फिर हुआ धमाका, महिला झुलसी
ग्रामीणों की मानें तो हसवा गांव में शुक्रवार देर रात अवैध रूप से पटाखा बनाते समय विस्फोट हो गया। धमाका इतना तेज था कि आसपास धुआं फैलने के साथ ही कई घरों में दरारें भी देखी गईं। धमाके की आवाज सुनकर सैकड़ों ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। हालांकि सूचना के बावजूद पुलिस घटनास्थल पर देर से ही पहुंची। इस घटना में जरीना बानो पत्नी साहिबान अली गंभीर रूप से झुलस गई थी। ग्रामीणों ने महिला को रात्रि दो बजे के लगभग प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कराया। मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में भर्ती महिला की कमर के नीचे का 90 फीसद हिस्सा बुरी तरह झुलस गया है ऐसे में हालत चिंताजनक बनी हुई है। गांव के लोग इस मसले पर खुलकर कुछ नहीं बोल रहे हैं जबकि स्थानीय पुलिस भी कुछ साफ बताने से बच रही है।हादसे का शिकार महिला चूड़ी बेचने के साथ-साथ पटाखा बनाने का काम भी करती थी परिवार में कुल छ:बच्चे हैं जिनमें चार बेटियां और दो बेटें हैं।
पहले हो चुकी कई की मौत
बताते चलें कि अमेठी के मोहनगंज थाना क्षेत्र में अवैध रूप से पटाखा बनाने की यह पहली घटना नहीं है इससे पहले फूला गांव और कमई गांव में भी पुलिस अवैध आतिशबाजी निर्माण के तीन मामलों में कार्यवाही कर चुकी है। जनपद के बाजार शुकुल बाजार थाना अंतर्गत महोना गांव में एक दशक पूर्व अवैध पटाखा निर्माण के समय विस्फोट में 9 की मौत हो गई थी। जगदीशपुर थानाक्षेत्र के दो गांवों में अवैध पटाखा बनाते समय विस्फोट में चार की जान गई थी।
लेकिन अवैध पटाखा निर्माण खेल जारी
इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में बिना लाइसेंस के अवैध पटाखा बनाने का निर्माण रूकने का नाम नहीं ले रहा है।ग्रामीण कहते हैं कि आबादी के बीच घरों में ही विस्फोटक सामग्री से आतिशबाजी तैयार की जाती है,जिससे कभी भी बड़ा हादसा घटित हो सकता है।वहीं बिना लाइसेंस के बड़ी मात्रा में बारूद और अन्य जलनशील सामग्री को घर में रखने एवं उसकी आपूर्ति को लेकर जिम्मेदार महकमे पर सवाल उठ रहे हैं,जबकि प्रभारी थाना अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि ऐसी कोई घटना उनके संज्ञान में नहीं आई है।