अंकित पाण्डेय, गौरीगंज (अमेठी): सरकारी योजनाओं का सहारा पाने की उम्मीद रखने वाले दिव्यांगजनों के लिए प्रमाण पत्र बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज है। लेकिन जब इसी दस्तावेज में आंख का विवरण गलत दर्ज हो और दिव्यांगता का प्रतिशत भी कम लिखा हो, तो पात्रता से जुड़ी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अमेठी के पिंडोरिया गांव निवासी रामऔतार के मामले में ऐसी ही गड़बड़ी सामने आई है।
दाहिनी आंख खराब, प्रमाण पत्र में बाईं आंख प्रभावित
रामऔतार की दाहिनी आंख खराब है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से वर्ष 2023 में जारी दिव्यांग प्रमाण पत्र में बाईं आंख को प्रभावित दर्शाया गया है। प्रमाण पत्र में उनकी दिव्यांगता 30 प्रतिशत दर्ज है। आंख की स्थिति का गलत विवरण दर्ज होने से प्रमाण पत्र की शुद्धता पर सवाल उठ रहे हैं। अब पीड़ित को इसमें सुधार होने का इंतजार है।
40 प्रतिशत की शर्त बनी चिंता की वजह
दिव्यांगजन कल्याण से जुड़ी कई सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए कम से कम 40 प्रतिशत दिव्यांगता का प्रमाण पत्र आवश्यक होता है। ऐसे में रामऔतार के प्रमाण पत्र में 30 प्रतिशत दिव्यांगता दर्ज होने से योजनाओं का लाभ पाने में बाधा आने की आशंका है। हालांकि, पात्रता संबंधित योजना के नियमों पर निर्भर करती है। ऐसे में प्रमाण पत्र में दर्ज विवरण और दिव्यांगता के प्रतिशत की सही जांच जरूरी है।
सर्वर की त्रुटि बताकर सीएमओ ने दिया भरोसा
मामले पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अंशुमान सिंह ने सर्वर की त्रुटि को गड़बड़ी की वजह बताया है। उन्होंने प्रमाण पत्र में आवश्यक संशोधन कराने का आश्वासन दिया है। अब सवाल है कि वर्ष 2023 में जारी प्रमाण पत्र की गलती दूर करने में कितना समय लगेगा और रामऔतार को सही विवरण वाला प्रमाण पत्र कब तक मिल पाएगा।
गलती सुधरेगी, तभी मिलेगी राहत
दिव्यांग प्रमाण पत्र में दर्ज एक गलत विवरण किसी व्यक्ति के लिए सरकारी योजनाओं तक पहुंचने में परेशानी खड़ी कर सकता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के सामने चुनौती सिर्फ प्रमाण पत्र में संशोधन करने की नहीं, बल्कि दिव्यांगता का सही आकलन और अभिलेखों की शुद्धता सुनिश्चित करने की भी है। रामऔतार को आश्वासन के बाद अब वास्तविक कार्रवाई का इंतजार है।