बृजेश ’कबीर’, हरदोई: स्नातक एमएलसी चुनाव में हरदोई के तीन छोड़ बाकी जनप्रतिनिधियों के मतदाता होने पर सवाल उठा तो ’नाक पर दिया रख’ (मतदान की पूर्वसंध्या) भाजपा जिलाध्यक्ष अजीत सिंह बब्बन ने पूर्ववर्ती श्रीकृष्ण शास्त्री को साथ लेकर डैमेज कंट्रोल शुरू किया। इसके बाद अटल बिहारी वाजपेई मार्ग स्थित भाजपा जिला मुख्यालय से एक और दृश्य सामने आया। सूबे की सत्ता में साझीदार सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पंचायती राज मंत्री के प्रतिनिधियों में महत्वपूर्ण सेंट्रल यूपी के प्रतिनिधि सुनील अर्कवंशी की जरूरत आन पड़ी दिखी। पार्टी से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, बैठक में स्नातक प्रत्याशी इंजी. अवनीश कुमार सिंह और शिक्षक प्रत्याशी उमेश द्विवेदी के समर्थन में मतदान की अपील की गई।
’स्वदेश’ की पड़ताल के बाद लोकल भाजपा के गलियारों में शुरू हुई कसरत
इसे महज औपचारिक चुनावी बैठक मानकर छोड़ देना आसान है, लेकिन आखिरी दौर में सहयोगी दल के ऐसे पदाधिकारी की मौजूदगी संगठन के लिए सामाजिक संपर्क और मतदाताओं तक पहुंच की अहमियत भी बताती है। स्नातक मतदाता सूची को लेकर ’स्वदेश’ की पड़ताल में जिले के कई प्रमुख जनप्रतिनिधियों के नाम दर्ज न होने का सवाल उठा था। ऐसे में भाजपा के लिए चुनौती केवल प्रत्याशी के पक्ष में अपील करना नहीं, बल्कि सीमित और विशिष्ट मतदाता वर्ग तक प्रभावी संपर्क बनाना भी है। स्नातक निर्वाचन सामान्य चुनाव से अलग है। यहां मतदाता सूची में नाम दर्ज होना ही मतदान की पहली शर्त है। अंतिम समय में मतदाताओं से संपर्क और मतदान के लिए प्रेरित करने पर जोर इसी जरूरत की ओर संकेत करता है।
क्यूं आन पड़ी सुनील अर्कवंशी की ज़रूरत, ’आइकॉन’ तो पार्टी विधायक अलका अर्कवंशी हैं
संगठन खड़ा करने में सुनील को महारत है। चूंकि पत्रकार से नेता बने हैं तो मुट्ठी में ताकत रखने का हुनर जानते हैं, जो आता है समाज को जागरूक करने से। सुनील अर्कवंशी समाज को एक मतदाता के तौर पर सशक्त कर रहे हैं, ये कोई ढकी छिपी बात नहीं है। जाहिर है, स्नातक एमएलसी चुनाव में भी उनके स्वजातीय मतदाताओं की अच्छी संख्या होगी। यही वजह है, सुनील आज भाजपा जिला मुख्यालय के मुख्य सोफे पर बब्बन और शास्त्री संग अगल बगल हैं। संडीला विधानसभा क्षेत्र के जातीय समीकरण पर 2024 में प्रकाशित एक अनुमान में अर्कवंशी समाज की संख्या करीब 43 हजार बताई गई थी। यह आंकड़ा आधिकारिक जनगणना या वर्तमान मतदाता सूची का आंकड़ा नहीं है, लेकिन क्षेत्र में समुदाय की उल्लेखनीय मौजूदगी का संकेत जरूर देता है और उस समूह में सुनील अर्कवंशी की स्वीकार्यता का भी। हालांकि, पूरे अर्कवंशी समाज को किसी एक दल या प्रत्याशी का समर्थक मानना सही नहीं होगा। स्नातक चुनाव में निर्णायक तथ्य यह है, संबंधित व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में दर्ज हो और वह मतदान करे। सुनील अर्कवंशी की भूमिका को इसी संदर्भ में देखना उचित होगा। समाज के लोगों तक पहुंच, मतदाता जागरूकता और संगठनात्मक समन्वय।
बब्बन ने मांगा समर्थन, सुनील की कार्यकर्ताओं से संपर्क बढ़ाने की अपील
बैठक में भाजपा जिलाध्यक्ष अजीत सिंह ‘बब्बन’ ने पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से आपसी समन्वय के साथ मतदाताओं से संपर्क करने और पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में मतदान की अपील की। भाजपा मीडिया प्रभारी अतुल सिंह चाऊंपुर के अनुसार, सुभासपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुनील अर्कवंशी ने पार्टी कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर मतदाताओं तक पहुंचने और उन्हें मतदान के लिए प्रेरित करने को कहा। बैठक में सुभासपा प्रदेश उपाध्यक्ष संजीव कुमार सिंह, नरेश राज, शिवराम, काशीराम और संदीप सिंह समेत अन्य पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।
सवाल बना रहेगा- इस चुनाव को लेकर माननीय क्यूं रहे ’बेरुख’
लखनऊ खंड स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए आज मतदान होना है। ऐसे में अंतिम दौर की बैठकों का लक्ष्य साफ है, मतदाताओं तक पहुंचना और मतदान के दिन उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास करना। लेकिन हरदोई में उठे एक सवाल का जवाब संगठन को आगे भी देना होगा, जब चुनाव के लिए मतदाता तैयार करने की बात आती है, तो क्या राजनीतिक दल अपने पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने की जिम्मेदारी भी उतनी ही गंभीरता से निभाते हैं? आज फिर लाला माधव राम जौहर की ग़ज़ल की दो लाइनें याद आई हैं, जो कल की रपट के आगे के सिलसिले में हैं...
महमिल-नशीं जब आप थे लैला के भेस में,
मजनूँ के भेस में कोई ख़ाना-ख़राब था...