इंदौर. नौनिहालों और असहाय मातृशक्ति के जीवन में बदलाव लाने की ऐसी लगन लगी कि अहिल्या नगरी इंदौर की प्रीति अय्यर को उनकी यह प्रीत शहर से गांव तक खींच ले गई। प्रीति अय्यर का मूलत: पेशेवर कार्य एस्ट्रोलॉजी है। वे धर्मग्रंथ, संहिता, वास्तुशास्त्र के द्वारा लोगों की समस्याओं का समाधान बताती हैं। स्वर विज्ञान के माध्यम से तय समय, तय दिशा एवं निश्चित नक्षत्र में जाप करके कैंसर रोग से कैसे मुक्ति पाई जा सकती है, इस पर उनका गहन अध्ययन व कार्य है। वे अयादी वास्तु, पंचशील वास्तु और कृष्णमूर्ति ज्योतिष द्वारा इस कार्य को करती हैं। इसी के साथ प्रीति का सामाजिक सरोकार भी व्यापक है।

बस्ती पाठशाला : भारतीय दृष्टिकोण से अक्षर ज्ञान: बस्ती पाठशाला के माध्यम सेे शिवाजी नगर और आसपास के क्षेत्रों में उन्होंने 60-70 बच्चों को पढ़ाने-लिखाने का अभियान लिया है। भारतीय दृष्टिकोण से अक्षर ज्ञान देने की पहल की। इसके लिए प्रीति अय्यर ने ई-बुक भी बनाई है, जो हिन्दी-अंग्रेजी वर्णमाला के साथ ही शिक्षा को सनातन संस्कारों से भी जोड़ती है। उनकी बुक में ए फॉर एप्पल की जगह ए फॉर अर्जुन लिया गया है, बी से भीष्म, सी से चाणक्य, इसी तरह हिन्दी वर्णमाला में स्वर अ-अथर्ववेद, आ-आर्य, इ-इन्द्र, ई-ईशान, उ-उर्वशी, ऊ-ऊषा आदि बनाई है। इसको उन्होंने बाल संस्कार दीप अक्षरों से आचरण तक नाम दिया है जो बच्चों में भारतीय जीवन पद्धति को पढ़ने और खेल-खेल में सीखने की ललक पैदा करता है।

40 से अधिक गांवों की मातृशक्ति से संपर्क
प्रीति अय्यर ने 'सीखो-सिखाओ और कमाओÓ सूत्र वाक्य के द्वारा 10 वर्षों में कनाड़िया, देपालपुर, पीथमपुर, आगर मालवा तक के 40 से अधिक गांवों में पहुंचकर 5 हजार से अधिक महिलाओं को हैंडीक्रॉफ्ट, कैंडल बनाना, लाख की चूड़ियां, मेहंदी, कास्ट्यूम ज्वेलरी, परंपरागत नक्काशी और जुगाड़ से आकर्षक वस्तुएं बनाने का प्रशिक्षण दिया है। इस अभियान में 350 से अधिक महिलाएं उनके साथ जुड़कर जरूरतमंद महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रशिक्षण दे रही हैं। श्री श्री कलाश्री प्रोग्रेसिव फाउंडेशन (2020) द्वारा महिलाओं, बच्चों में सकारात्मक बदलाव का अभियान लिया गया है। नगर निगम एवं अन्य मंच से भी उनके इस प्रयास को प्रोत्साहन के रूप में सम्मानित किया है।
18 हजार लोगों का जीवन रोशन कर चुकीं उमा झंवर
समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और जरूरतमंदों की सहायता करने का क्षेत्र व्यापक है। अगर किसी दृष्टिबाधित के अंधकारमय जीवन में प्रकाश लौटाने का निमित्त बनकर कार्य करने का जज्बा आंकड़ों की दृष्टि से 18 हजार पर पहुंच जाए तो यह ईश्वरीय कार्य के रूप में देखा जाना चाहिए। इंदौर में मुरलीधर पारमार्थिक ट्रस्ट के अंतर्गत संचालित एम.के.आई. बैंक की संचालिका उमा झंवर विगत 18 वर्ष से इस कार्य को बड़ी तन्मयता से कर रही हैं। अंगदान, देहदान, नेत्रदान का जागरूकता अभियान उन्होंने स्कूल, कॉलेज, संस्थानों, संगठनों यहां तक कि इंदौर से बाहर देवास, सोनकच्छ, उज्जैन, आगर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी तक में इस अभियान से लोगों को नेत्रदान और जरूरतमंद को रोशनी लौटाने का संदेश पहुंचाया है।

हर जगह कलेक्शन सेंटर- उमा झंवर बताती हैं कि मालवा-निमाड़ के लगभग सभी जिलों में हमने तकनीकी दृष्टि से ट्रेंड व्यक्ति और कलेक्शन सेंटर का निर्धारण किया है। 2010 में इस एम.के.आई. बैंक का शुभारंभ डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने किया था, तब उन्होंने कहा था कि नेत्रदान करने वाले आपके पास नहीं आएंगे, इसके लिए उनके पास जाना होगा, जागरूकता बढ़ानी होगी। हम इंदौर समेत मध्यप्रदेश, चित्रकूट, यहां तक कि 20 राज्यों में नि:शुल्क नेत्रदान का अभियान 'कॉर्नियल ब्लाइंड फ्री इंडियाÓ संकल्प के साथ चला रहे हैं और अभी तक 17800 से अधिक सफल कॉर्नियल प्रत्यार्पण के द्वारा लोगों की रोशनी लौटाई जा चुकी है। हमारे यहां 20 लोगों का स्टॉफ है। इनमें सभी महिला कर्मचारी हैं, जो इस पूरे कार्य का संचालन करती हैं।