जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण जन्मस्थान से विकास का स्वस्तिवाचन कर रहे ‘मुख्यमंत्री योगी’
आगरा। हमारा उत्तर प्रदेश बदल रहा है। वास्तव में बदल रहा है। अब हमारे उत्तर प्रदेश में न भय है, न दंगे हैं और न ही कोई महामारी। आज उत्तर प्रदेश ‘उत्सवों’ का प्रदेश बन रहा है। पर्व-त्योहार हमारी संवेदनाओं और परंपराओं का जीवंत रूप बनकर हमारे सामने आ रहे हैं। उत्तर प्रदेश में मौसम के बदलाव की सूचना अब हमें उत्सवों से मिल रही है। उत्तर प्रदेश को पहले ‘उत्तम’ और अब ‘उत्सव’ प्रदेश बनाने की पटकथा कोई और नहीं, बल्कि खुद प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लिख रहे हैं। प्रयागराज में कुंभ, अयोध्या में दीपोत्सव, बरसाने की होली के बाद श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर पूरी मथुरा नगरी सजी है। नंदलाल के स्वागत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद ‘स्वस्तिवाचन’ कर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अपनी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को नई पहचान दिलाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। यह मुख्यमंत्री योगी ही हैं, जो लगातार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर विकास योजनाओं के सुदृढ़ीकरण, नवीनीकरण और आधुनिकीकरण के लिए करोड़ों रुपये की धनराशि जारी कर ब्रज के सांस्कृतिक बुनियादी ढांचे को और मजबूत कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में ‘नव-सृजन’ का आधार बन रही है मुख्यमंत्री योगी की ‘उत्सवधर्मिता’
योगी आदित्यनाथ सरकार की समग्रतावादी सोच ने वर्षों से उपेक्षित पड़ी प्रदेश की कला-संस्कृति के साथ-साथ तीर्थों व धार्मिक स्थलों के विकास के नए रास्ते तलाशे हैं। उप्र सरकार की इस समग्रतावादी सोच ने न केवल आर्थिक व सांस्कृतिक विकास को गति दी, बल्कि धार्मिक पर्यटन के सहारे स्थानीय रोजगारों में वृद्धि भी की है। जो लोग उत्तर प्रदेश की राजनीति की धुरी केवल अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को मान रहे थे, वे तब चकित हुए, जब उन्होंने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन करते देखा। यह वही मुख्यमंत्री योगी हैं, जिन्होंने प्रयागराज के कुंभ को अंतरराष्ट्रीय ब्रांड की तरह प्रस्तुत किया। अयोध्या में शुरू हुई दीपोत्सव की परंपरा हर साल रिकॉर्ड बनाने लगी और बाद में यह चित्रकूट, काशी, मथुरा सहित पूरे प्रदेश का उत्सव बन गई। उत्तर प्रदेश में तीर्थों को विकसित करने की मुख्यमंत्री की दृष्टि यहीं नहीं रुकी। उन्होंने धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को स्थानीय रोजगार व आर्थिक आधार बनाने की दृष्टि से अयोध्या के साथ नैमिष, देवीपाटन, विंध्याचल, चित्रकूट, काशी, मथुरा और श्रावस्ती-कुशीनगर-सारनाथ में सौंदर्यीकरण के काम कराए। सिर्फ इन स्थलों का ही विकास नहीं कराया गया, बल्कि यहां तक कनेक्टिविटी देने का काम भी एक्सप्रेस-वे और एयरपोर्ट के माध्यम से हो रहा है। ब्रज तीर्थ क्षेत्र विकास परिषद, विंध्यधाम तीर्थ विकास परिषद और चित्रकूट धाम तीर्थ विकास परिषद के साथ चौरी-चौरा शताब्दी वर्ष जैसे आयोजनों के माध्यम से देश-विदेश का ध्यान उप्र की कला-संस्कृति और विशाल आध्यात्मिक परंपरा की ओर आकर्षित हुआ है।
प्रदेश में अब तक जितने मुख्यमंत्री हुए हैं, योगी को छोड़कर किसी भी मुख्यमंत्री की सोच में उत्तर प्रदेश के समग्र विकास का चिंतन दिखाई नहीं दिया। हालांकि कुछ मुख्यमंत्री उप्र को ऐसे भी मिले, जिन्होंने प्रदेश के विकास के स्वप्न देखे, लेकिन वे स्वप्न कभी सैफई की हवाई पट्टी तो कभी लखनऊ-नोएडा के पार्क बनाने तक में पूरे हो गए। लंबे अंतराल के बाद प्रदेश को एक ऐसा मुख्यमंत्री मिला है, जिसके चिंतन में ब्रज की होली-जन्माष्टमी, अयोध्या की रामनवमी-रामलीला, चित्रकूट की कामदगिरि परिक्रमा, वाराणसी की शिवरात्रि और संगीत सम्मेलन, बुंदेलखंड की लोक परंपरा समान रूप से झलकती है।
जो लोग प्रदेश की राजनीति पर बारीकी से नजर रखते हैं, वे भी कहने लगे हैं
‘दैहिक दैविक भौतिक तापा। राम राज नहिं काहुहि ब्यापा।
सब नर करहिं परस्पर प्रीती। चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती॥’
साढ़े चार साल में न केवल प्रदेश बदला है, बल्कि अधिकारियों से लेकर राजनीति के सोचने का तरीका भी बदल गया है। रामराज्य का अर्थ केवल उत्सव के रूप में ही नहीं लिया जाना चाहिए, बल्कि प्रदेश के जर्जर स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के उपायों की सफलता में भी देखा जाना चाहिए। योगी सरकार की प्राथमिकता केवल विकास परियोजनाओं का निर्माण नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की गौरवशाली विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक संरक्षित और आधुनिक रूप में पहुंचाना भी है। सच कहें तो आज मुख्यमंत्री योगी की उत्सवधर्मिता की सोच मन में उमंग और उत्साह के नए प्रवाह को जन्म दे रही है। वास्तव में आज उत्तर प्रदेश बदल रहा है।
मधुकर चतुर्वेदी