गोण्डा: बच्चों को सुरक्षित घर पहुंचाने निकली स्कूल की गाड़ी रास्ते में ही अपने एक पहिए से ‘आजाद’ हो गई। चलते वाहन से अचानक पहिया निकलकर कई मीटर दूर जा गिरा और गाड़ी में बैठे बच्चों की सांसें अटक गईं। संयोग अच्छा था कि चालक ने किसी तरह वाहन पर नियंत्रण बनाए रखा और गाड़ी पलटने से बच गई। वरना स्कूल वाहन की फिटनेस का हिसाब किसी फाइल में नहीं, बल्कि अस्पताल में लिखी जा रही कहानी में मिलता।
टला बड़ा हादसा
घटना श्री साईं कॉलेज एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स कॉलेज की बताई जा रही है। विद्यालय की करीब आठ गाड़ियों में शामिल एक वाहन बच्चों को लेकर कचनापुर रोड से वापस लौट रहा था। इसी दौरान अचानक उसका पहिया निकल गया। पहिया अलग होते ही वाहन का संतुलन बिगड़ा, लेकिन चालक ने किसी तरह गाड़ी रोककर बड़ा हादसा टाल दिया। किसी बच्चे को गंभीर चोट नहीं आई। हादसे के बाद अभिभावकों में नाराजगी है। उनका सवाल सीधा है—जब वाहन बच्चों को लेकर सड़क पर दौड़ रहा था तो उसकी तकनीकी जांच और फिटनेस की जिम्मेदारी किसकी थी? आखिर पहिया निकलने तक खराबी किसी को क्यों नहीं दिखी?
फिटनेस प्रमाणपत्र ठीक, पहिया गलत निकला!
स्कूल वाहनों की फिटनेस को लेकर विभागीय नियमों की लंबी सूची है। लेकिन जमीन पर हाल यह है कि बच्चों को लेकर दौड़ रहे वाहन का पहिया ही चलते-चलते निकल जा रहा है। सवाल यह नहीं कि पहिया कैसे निकला, सवाल यह है कि अगली बार अगर पहिया निकलने के साथ चालक का नियंत्रण भी निकल गया तो जिम्मेदारी कौन लेगा? अभिभावकों ने स्कूल की सभी गाड़ियों की तकनीकी जांच कराने, नियमित मेंटीनेंस सुनिश्चित करने और सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराने की मांग की है।
दो बार जांच हुई, दोनों बार स्कूल पर ‘ताला’ मिला
मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि विद्यालय के संबंध में एआरटीओ विभाग को पहले शिकायतें मिल चुकी हैं। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक स्कूल का दो बार निरीक्षण किया गया, लेकिन दोनों बार परिसर में ताला लटका मिला। यानी जांच टीम पहुंची, स्कूल बंद मिला और मामला शायद कागजों में सुरक्षित लौट आया। अब उसी स्कूल की गाड़ी का पहिया सड़क पर निकलने के बाद पुराने निरीक्षण भी चर्चा में आ गए हैं। सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि शिकायतों के बाद भी विद्यालय का वास्तविक निरीक्षण नहीं हो सका तो स्कूल की गाड़ियों की फिटनेस और सुरक्षा व्यवस्था की सच्चाई कैसे सामने आती?
हादसे के बाद नोटिस, अब होगी जांच
एआरटीओ के अनुसार घटना का संज्ञान लिया गया है। विद्यालय प्रबंधन को नोटिस जारी किया जाएगा और जांच के बाद नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। देखना यह होगा कि कार्रवाई सिर्फ नोटिस तक सीमित रहती है या विद्यालय की सभी गाड़ियों की वास्तव में तकनीकी जांच होती है।
प्रयोगशाला नहीं बच्चों की सुरक्षा
बच्चों की सुरक्षा कोई प्रयोगशाला नहीं कि हादसा होने के बाद व्यवस्था की जांच की जाए। स्कूल वाहनों में ब्रेक, टायर, पहिए, स्टीयरिंग, फिटनेस और अन्य सुरक्षा मानकों की नियमित जांच जरूरी है। क्योंकि सड़क पर बच्चों की जिंदगी सवार होती है, और इस जिंदगी का पहिया किसी दिन सिर्फ निकलकर दूर न जा गिरे, इसकी जिम्मेदारी स्कूल और विभाग दोनों की है।