होर्मुज में ओमान की बढ़ती रणनीतिक भूमिका

होर्मुज में ओमान की बढ़ती रणनीतिक भूमिका

होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन में ओमान और ईरान के सहयोग से वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री यातायात पर प्रभाव पड़ने की संभावना है। इससे क्षेत्रीय और वैश्विक संतुलन में परिवर्तन हो सकता है।

By : स्वदेश डेस्क
होर्मुज में ओमान की बढ़ती रणनीतिक भूमिका

इस सप्ताह होर्मुज जलडमरूमध्य के यातायात और सुरक्षा के ईरान के साथ सह-प्रबंधन में ओमान के दावों ने वैश्विक रणनीतिक हलकों का ध्यान आकर्षित किया है। अब तक अपेक्षाकृत तटस्थ भूमिका निभाने वाला यह देश अपनी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति के कारण पश्चिम एशिया के बदलते शक्ति-संतुलन में अधिक सक्रिय दिखाई दे रहा है। इस परिवर्तन के प्रभाव केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखलाओं और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यवस्था पर भी पड़ सकते हैं।

ओमान की भौगोलिक स्थिति और ऐतिहासिक भूमिका

भौगोलिक दृष्टि से ओमान होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिणी तट और प्रवेश द्वारों पर स्थित है। इस कारण समुद्री सुरक्षा, खोज एवं बचाव तथा नौवहन सेवाओं में उसकी स्वाभाविक भूमिका रही है। ऐतिहासिक रूप से उसने इस स्थिति का उपयोग सीमित किंतु प्रभावशाली ढंग से किया है। पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंधों को बनाए रखते हुए उसने ईरान के साथ संवाद और मध्यस्थता की परंपरा भी कायम रखी। यही कारण है कि ओमान लंबे समय से खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) और ईरान, दोनों के साथ कार्यशील संबंध बनाए रखने वाला ऐसा देश रहा है, जिसने स्वयं को आक्रामक समुद्री शक्ति के बजाय समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता का संरक्षक प्रस्तुत किया।जलडमरूमध्य के प्रबंधन में नई सक्रियता

2020 के दशक के मध्य से ओमान ने अपनी पारंपरिक अनौपचारिक भूमिका से आगे बढ़ते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य के यातायात और सुरक्षा प्रबंधन में अधिक संरचित भागीदारी के संकेत दिए हैं। ओमानी अधिकारियों ने ऐसा संयुक्त क्षेत्रीय तंत्र प्रस्तावित किया है, जिसके अंतर्गत ईरान और ओमान जलडमरूमध्य की निगरानी साझा करेंगे तथा नौवहन सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए स्वैच्छिक वित्तीय योगदान की व्यवस्था होगी। यही प्रस्ताव वैश्विक चिंता का कारण बना है, क्योंकि इससे ईरान के साथ ओमान भी जलडमरूमध्य के संचालन में औपचारिक भागीदार के रूप में उभरता दिखाई देता है। ऊर्जा आपूर्ति पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति आश्वस्त करने के बजाय नई आशंकाएँ उत्पन्न करती है।

कानूनी और संस्थागत प्रश्न

संयुक्त राष्ट्र समुद्र कानून कन्वेंशन के अनुसार, होर्मुज जैसे अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य से लगे तटीय राज्यों को सुरक्षा और पर्यावरणीय उद्देश्यों के लिए सीमित नियामक अधिकार प्राप्त हैं, किंतु वे पारगमन को बाधित नहीं कर सकते और न ही सामान्य शुल्क लगा सकते हैं। ईरान समय-समय पर अधिक नियंत्रण और शुल्क की वकालत करता रहा है, जिसे स्वयं ओमान भी स्वीकार नहीं करता। इसके बावजूद, संयुक्त प्रबंधन संबंधी उसके नए प्रस्तावों ने इस बहस को पुनः तेज कर दिया है कि कहीं यह व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून की स्थापित अवधारणाओं को चुनौती तो नहीं देगी।

पश्चिम एशिया के संघर्षों की पृष्ठभूमि

ओमान की यह सक्रियता ऐसे समय सामने आई है, जब पश्चिम एशिया अमेरिका-ईरान टकराव, समुद्री हमलों और बढ़ती सैन्य प्रतिस्पर्धा का केंद्र बना हुआ है। ईरान पहले भी मिसाइल और ड्रोन हमलों के माध्यम से जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को प्रभावित करने की क्षमता प्रदर्शित कर चुका है। उसके पास बड़ी संख्या में समुद्री खदानें भी हैं, जो उसे समुद्री यातायात के लिए एक प्रभावी विषम शक्ति प्रदान करती हैं। होर्मुज की पूर्ण अथवा आंशिक बंदी का संकेत कई बार राजनीतिक दबाव के साधन के रूप में दिया जाता रहा है। इसके परिणामस्वरूप अमेरिका ने बहुराष्ट्रीय नौसैनिक सुरक्षा व्यवस्थाओं को मजबूत करने का प्रयास किया है और खाड़ी के राजतंत्रों की सामरिक चिंताएँ भी बढ़ी हैं। ऐसे वातावरण में ओमान और ईरान के बीच नियंत्रण एवं प्रबंधन पर होने वाली बातचीत केवल तकनीकी विषय नहीं रह जाती, बल्कि व्यापक प्रतिरोध, निवारण और क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन का हिस्सा बन जाती है।

तटस्थता और क्षेत्रीय संतुलन

अमेरिका, खाड़ी सहयोग परिषद और ईरान तीनों की अलग-अलग अपेक्षाओं के बीच ओमान की स्थिति अत्यंत जटिल है। मस्कट ने तेहरान से संबंध समाप्त करने के अमेरिकी दबाव को स्वीकार नहीं किया और लगातार यह तर्क दिया कि उसका सहयोग केवल जलमार्ग के वैध प्रबंधन तक सीमित है। दूसरी ओर, उसने अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघनों और सीमा पार हमलों की आलोचना भी की है। इस प्रकार ओमान अपनी पारंपरिक तटस्थता को बनाए रखते हुए सुरक्षा संबंधी दायित्वों का संतुलन साधने का प्रयास करता रहा है।नौवहन सेवाओं, खोज एवं बचाव अभियानों तथा चालक दल को चिकित्सा सहायता जैसे क्षेत्रों में ईरान के साथ उसका सहयोग मानवीय उत्तरदायित्वों और क्षेत्रीय तनाव कम करने की नीति, दोनों का परिचायक है। यही संतुलित दृष्टिकोण अब उसकी सबसे बड़ी कूटनीतिक पूंजी बन गया है।

वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर प्रभाव

होर्मुज में ओमान की भूमिका का संस्थागत विस्तार वैश्विक राजनीति पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है। पहला, यह स्पष्ट करता है कि विश्व की ऊर्जा सुरक्षा आज भी कुछ सीमित समुद्री मार्गों पर अत्यधिक निर्भर है। इस जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार का संकट तेल और गैस की कीमतों, मुद्रास्फीति, मौद्रिक नीति और राजनीतिक स्थिरता तक को प्रभावित कर सकता है।दूसरा, यह संकीर्ण समुद्री मार्गों के शासन और अंतरराष्ट्रीय कानून पर नई बहस को जन्म देता है। प्रमुख शक्तियों तथा जहाजरानी पर निर्भर देशों को यह तय करना होगा कि तटीय राज्यों की निगरानी, सेवाओं और नियामक अधिकारों की सीमा क्या होनी चाहिए।

तीसरा, ओमान की सक्रिय मध्यस्थता उस बहुध्रुवीय कूटनीतिक व्यवस्था को मजबूत करती है, जिसमें मध्यम आकार के देश केवल दर्शक नहीं, बल्कि संकट-प्रबंधक और संस्थागत समाधान प्रस्तुत करने वाले महत्वपूर्ण पक्ष बनकर उभरते हैं। इससे बड़ी शक्तियों के एकतरफा प्रभाव को कुछ सीमा तक संतुलित किया जा सकता है। भारत, चीन तथा एशिया के अन्य बड़े ऊर्जा आयातकों के लिए ईरान और ओमान के बीच होने वाली वार्ताओं का परिणाम अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। इससे ऊर्जा मार्गों के विविधीकरण, नौसैनिक उपस्थिति और खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्थाओं में उनकी भविष्य की रणनीतियाँ प्रभावित होंगी।

अंततः, होर्मुज जलडमरूमध्य के संरचित नियंत्रण और प्रबंधन में ओमान का प्रवेश अवसर और जोखिम, दोनों का संकेत देता है। यदि साझा व्यवस्थाएँ पारदर्शी, अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप और व्यापक क्षेत्रीय सहमति पर आधारित रहती हैं, तो वे इस अत्यंत संवेदनशील समुद्री मार्ग को स्थिरता प्रदान कर सकती हैं। किंतु यदि नियंत्रण अत्यधिक तेहरान-केंद्रित हो गया, तो ईरानी प्रभाव का संस्थागत विस्तार वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए नई चुनौती बन सकता है। ऐसे समय में, जब पश्चिम एशिया परस्पर जुड़े संघर्षों, प्रतिस्पर्धी गठबंधनों और अस्थिर ऊर्जा राजनीति से गुजर रहा है, होर्मुज में ओमान की भूमिका का विकास यह स्पष्ट करता है कि भूगोल, अंतरराष्ट्रीय कानून और कूटनीति मिलकर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा ही नहीं, बल्कि व्यापक वैश्विक व्यवस्था को भी नया स्वरूप देने की क्षमता रखते हैं।

प्रो. अंशु जोशी

(लेखिका जेएनयू में प्राध्यापक हैं।)

संबंधित सामग्री

दिल्ली में CJP के प्रदर्शन से बाजारों में तनाव, 150 प्रदर्शनकारी हिरासत में; कारोबारियों ने जताई नाराजगी

दिल्ली में CJP के प्रदर्शन से बाजारों में तनाव, 150 प्रदर्शनकारी हिरासत में; कारोबारियों ने जताई नाराजगी

दिल्ली में CJP के तिरंगा मार्च के दौरान करीब 150 प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए। कनॉट प्लेस और खान मार्केट के कारोबारियों ने त्योहारों में बिक्री घटने की शिकायत की।

Oct 16, 2026
SP MLA Join BJP: सपा के तीन बागी विधायकों ने थामा भाजपा का दामन

SP MLA Join BJP: सपा के तीन बागी विधायकों ने थामा भाजपा का दामन

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है।

Oct 14, 2026
BSF Jawan Shivkumar Mishra: लद्दाख से गांव पहुंचा BSF जवान शिवकुमार मिश्र का पार्थिव शरीर

BSF Jawan Shivkumar Mishra: लद्दाख से गांव पहुंचा BSF जवान शिवकुमार मिश्र का पार्थिव शरीर

तिरंगे में लिपटा गांव का लाल पहुंचा तो हर आंख नम हो गई। ‘शहीद शिवकुमार मिश्र अमर रहें’ के नारों के बीच बुधवार सुबह बीएसएफ जवान का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा।

Oct 14, 2026
दमोह जिला अस्पताल में इंसानियत शर्मसार, मरीज की बुजुर्ग मां से लगवाया पोंछा, सफाई सुपरवाइजर और नर्सों को नोटिस

दमोह जिला अस्पताल में इंसानियत शर्मसार, मरीज की बुजुर्ग मां से लगवाया पोंछा, सफाई सुपरवाइजर और नर्सों को नोटिस

दमोह जिला अस्पताल के पुरुष वार्ड में मरीज की बुजुर्ग मां से पोछा लगवाने का मामला सामने आया है। वीडियो वायरल होने के बाद सफाई सुपरवाइजर और दो नर्सों को नोटिस जारी हुए हैं।

Oct 12, 2026
Gauriganj News: मां-मां पुकार रहे मासूम, करंट ने छीन ली मां की ममता

Gauriganj News: मां-मां पुकार रहे मासूम, करंट ने छीन ली मां की ममता

पंखे में उतरे करंट ने तीन मासूम बच्चों से उनकी मां की ममता छीन ली। हादसे में संतोष कुमारी (30) की मौत हो गई।

Oct 11, 2026