नरेंद्र मोदी जी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में सार्वजनिक जीवन के पच्चीस वर्ष पूरे होना महत्वपूर्ण पड़ाव है। 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद उन्होंने सरकार के प्रमुख के रूप में लगातार 25वें वर्ष की यात्रा पूरी की है। लेकिन इसे केवल पच्चीस वर्ष तक सत्ता में रहने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इन ढाई दशकों में देश, तकनीक, सामाजिक चुनौतियाँ, दुनिया और लोगों की अपेक्षाएँ बदलीं। ऐसे समय में लगातार प्रासंगिक बने रहना अध्ययन का विषय है। मेरी दृष्टि में इसका कारण है समय को समझना, उसके साथ बदलना और उसके अनुकूल निर्णय लेने का साहस।
समय को समझने वाला नेतृत्व:तकनीक, समाज, संचार, अर्थव्यवस्था और विश्व राजनीति बदल चुकी है। नरेंद्र मोदी जी की विशेषता यह रही है कि वे समय के अनुकूल परिवर्तन करते रहे हैं। समाज की आकांक्षाओं को समझना और नई परिस्थितियों के अनुसार नीतियों तथा नियमों में बदलाव करना उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा है। तकनीक को उन्होंने चुनौती नहीं, अवसर के रूप में देखा। नई पीढ़ी से संवाद किया और उसकी आकांक्षाओं को समझा। आज स्टार्टअप, डिजिटल अर्थव्यवस्था, अंतरिक्ष, नवाचार और नए उद्योग भारत की बदलती पहचान के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। यह भविष्य की तैयारी पर जोर देने वाली सोच है।
वैचारिक स्पष्टता के बीच नरेंद्र मोदी:भारत ने लंबे समय तक ऐसी राजनीति देखी, जिसमें देश की समस्याओं को देखने का एक निश्चित वैचारिक चश्मा रहा। वामपंथी विचारधारा ने भी बौद्धिक और राजनीतिक विमर्श को प्रभावित किया। राष्ट्र, संस्कृति, विकास, गरीबी, सुरक्षा और आर्थिक नीतियों को लेकर अनेक विमर्श हुए।
ऐसे वातावरण में नरेंद्र मोदी जी ने स्पष्ट वैकल्पिक दृष्टि प्रस्तुत की राष्ट्र प्रथम, विकास के साथ गरीब कल्याण, मजबूत राष्ट्रीय सुरक्षा, तकनीक के साथ आधुनिक भारत और अपनी संस्कृति के प्रति आत्मविश्वास। यह दृष्टि शासन की प्राथमिकताओं में भी दिखाई देती है। आज भारत अपनी बात कहने वाला, अपने हितों की रक्षा करने वाला और वैश्विक समस्याओं के समाधान में भूमिका निभाने की क्षमता रखने वाला देश बनकर सामने आया है।
आर्थिक महाशक्ति बनता भारत:भारत की बदलती भूमिका का बड़ा आधार उसकी आर्थिक शक्ति है। विनिर्माण, सेवा क्षेत्र, डिजिटल अर्थव्यवस्था, आधारभूत संरचना, स्टार्टअप और नए उद्योगों में भारत अपनी नई पहचान बना रहा है। भारत केवल बड़ा बाजार नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण आर्थिक शक्ति और भविष्य की वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है। भारत का आर्थिक विकास केवल आँकड़ों की कहानी नहीं है। इसके पीछे मानसिकता है—एक ऐसा भारत, जो अवसर खोज रहा है, उद्यम कर रहा है, निवेश कर रहा है, तकनीक अपना रहा है और दुनिया के साथ प्रतिस्पर्धा का आत्मविश्वास रखता है।
विकसित भारत का संकल्प इसी आर्थिक सामर्थ्य को आगे बढ़ाने का संकल्प है। यह परिवर्तन केवल नीतियों का परिणाम नहीं, बल्कि उस आत्मविश्वास का भी संकेत है, जिसमें भारत अपने संसाधनों, प्रतिभा और संस्थागत क्षमता पर भरोसा कर रहा है। यही भरोसा युवाओं को नए प्रयोग करने, उद्यमियों को जोखिम लेने और समाज को बदलती तकनीक के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। शासन की भूमिका यहाँ अवसरों का विस्तार करने और अंतिम व्यक्ति तक सुविधाएँ पहुँचाने की बनती है। जनसेवा की यही भावना राष्ट्रसेवा की व्यापक अवधारणा से जुड़ती है और नेतृत्व को केवल सत्ता-प्रबंधन से आगे ले जाती है।
नई पीढ़ी: आकांक्षा से आत्मविश्वास तक:इस बदलते भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी युवा पीढ़ी है। वह उद्यम करना, नई तकनीक बनाना, स्टार्टअप खड़ा करना, अंतरिक्ष में जाना और खेलों में भारत का तिरंगा फहराना चाहती है। नरेंद्र मोदी जी ने इस आकांक्षा को समझा है। तकनीक, शोध और युवाओं के साथ संवाद की यह दृष्टि भविष्य के लिए आज से तैयारी करना चाहती है।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं:आर्थिक शक्ति के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा भी राष्ट्र की ताकत का आधार है। नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में यह संदेश गया कि भारत केवल प्रतिक्रिया देने वाला देश नहीं रहेगा। सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर जैसी कार्रवाइयों ने आतंकवाद के विरुद्ध नीति में दृढ़ता का संकेत दिया। ऑपरेशन सिंदूर 7 मई 2025 को आतंकवादी ढाँचे के विरुद्ध लक्षित कार्रवाई के रूप में शुरू हुआ था। राष्ट्रीय सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं—यह नेतृत्व की स्पष्ट पहचान बनी है।
सत्ता को सेवा का उपकरण बनाना:गरीब के घर तक राशन पहुँचे, सिर पर पक्का मकान हो, रसोई में गैस हो, परिवार को स्वास्थ्य सुरक्षा मिले, वह बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े और स्वरोजगार पाए—इन सबको सेवा के रूप में मिशन मोड में आगे बढ़ाया गया। इनके पीछे यह सोच दिखाई देती है कि शासन का लाभ उस व्यक्ति तक पहुँचे, जो सबसे पीछे है। सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास शासन की दिशा बताने वाला मंत्र बना।
भारत का बढ़ता आत्मविश्वास:पच्चीस वर्षों की यात्रा को यदि किसी एक भाव में समेटना हो, तो वह है भारत के आत्मविश्वास में वृद्धि। आज भारत अपनी बात मजबूती से रखता है, आर्थिक रूप से आगे बढ़ रहा है, राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर सजग है और अपनी सांस्कृतिक पहचान के साथ खड़ा है। भू-राजनीतिक संकटों के दौर में भारत वैश्विक समस्याओं के समाधान में भी भूमिका निभाने की क्षमता रखता है। यह आत्मविश्वास उस गरीब के जीवन में दिखाई देता है, जिसे पक्का घर मिला; उस युवा में, जिसने स्टार्टअप शुरू किया; उस खिलाड़ी में, जो विश्व मंच पर तिरंगा लेकर खड़ा होता है; और उस वैज्ञानिक में, जो भारत के लिए नई उपलब्धि हासिल करता है। यही आत्मविश्वास आज के भारत की बड़ी पूँजी है।
विकास के साथ सांस्कृतिक पुनर्जागरण:किसी राष्ट्र का उत्थान केवल अर्थव्यवस्था से नहीं होता। अपनी संस्कृति, इतिहास और विरासत के प्रति आत्मविश्वास भी आवश्यक है। भारत की संस्कृति, योग, परंपराएँ, विरासत और सभ्यतागत सोच को दुनिया के सामने रखने का प्रयास अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। आर्थिक रूप से मजबूत और सांस्कृतिक रूप से आत्मविश्वासी भारत को साथ लेकर चलना इस नेतृत्व की विशेषता है। यही समन्वय इस यात्रा को अलग आयाम देता है—विकास और विरासत, तकनीक और परंपरा, सुरक्षा और अवसर, शासन और सेवा को एक साथ देखने का प्रयास।
पच्चीस वर्षों की यात्रा का अर्थ:यह बदलते भारत के साथ चलने की यात्रा है। तकनीक, परिस्थितियाँ, सामाजिक चुनौतियाँ और दुनिया की राजनीति बदलीं, लेकिन नेतृत्व को समय के अनुरूप ढालने की क्षमता बनी रही। यही उनकी निरंतर प्रासंगिकता का आधार है। नई पीढ़ी की आकांक्षाओं को अवसर मिल रहे हैं, गरीब के जीवन में सुविधाएँ पहुँच रही हैं और भारत अपनी संस्कृति के साथ दुनिया के सामने खड़ा है।
भारत आज आत्मविश्वास के साथ उठ रहा है। विकसित भारत का संकल्प उस भारत की आकांक्षा है, जो आर्थिक रूप से मजबूत हो, तकनीक में आगे हो, सुरक्षित हो, गरीब और कमजोर व्यक्ति को अवसर दे, अपनी संस्कृति पर गर्व करे और दुनिया में सम्मान के साथ खड़ा हो।यह केवल एक नेता के पच्चीस वर्षों की यात्रा नहीं है। यह बदलते भारत, बढ़ते भारत और आत्मविश्वास के साथ खड़े होते भारत की भी यात्रा है। और राष्ट्र का आत्मविश्वास उसकी सामूहिक शक्ति में निरंतर परिवर्तित होता रहे, स्थायी हो।

रजनीश अग्रवाल
(लेखक राज्यसभा सदस्य हैं।)