पीएम गति शक्ति: विकास की नई प्रशासनिक सोच

गति शक्ति : विकास की नई प्रशासनिक सोच

पीएम गति शक्ति के जरिए केंद्र, राज्यों और विभागों के बीच समन्वय बढ़ा है। इससे बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की बेहतर योजना, लागत में कमी और लॉजिस्टिक्स दक्षता सुधारने में मदद मिली है।

By : नरेंद्र कुमार
गति शक्ति : विकास की नई प्रशासनिक सोच

श्री नरेन्द्र मोदी ने सार्वजनिक जीवन के अपने 25 वर्षों के दौरान केंद्र और राज्य में निर्वाचित सरकारों के प्रमुख के रूप में, पहले गुजरात और बाद में पूरे देश में बुनियादी ढांचे के बड़े विस्तार में अग्रणी भूमिका निभाई है।

मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में सड़कों, बिजली, बंदरगाहों और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में गुजरात का रूपांतरण राज्य की विकास गाथा का महत्वपूर्ण हिस्सा बना। राष्ट्रीय स्तर पर भी बुनियादी ढांचे का परिवर्तन उल्लेखनीय रहा है। भारत का हवाई अड्डा नेटवर्क वर्ष 2014 के 74 से बढ़कर 165 हो गया है। आज दरभंगा और गया जैसे शहरों से दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु के लिए भी दैनिक उड़ानें उपलब्ध हैं। रेलवे प्रणाली में समर्पित माल गलियारों और विद्युतीकरण से लेकर वंदे भारत ट्रेनों तथा पुनर्विकसित रेलवे स्टेशनों तक व्यापक आधुनिकीकरण हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार हुआ है और नए एक्सप्रेसवे, बंदरगाहों तथा मेट्रो प्रणालियों ने देश के संपर्क परिदृश्य को बदल दिया है।

भारत की लॉजिस्टिक्स निष्पादन रैंकिंग वर्ष 2014 के 54वें स्थान से सुधरकर 2023 में 38वें स्थान पर पहुंच गई है। लॉजिस्टिक्स लागत घटकर सकल घरेलू उत्पाद का 7.97 प्रतिशत रह गई है। हालांकि, इन परिवर्तनों ने पर्याप्त ध्यान आकर्षित किया है, लेकिन प्रधानमंत्री श्री मोदी के शासन में एक और मौलिक बदलाव आया है। वह है बुनियादी ढांचे की अवधारणा, योजना और क्रियान्वयन के तरीके में परिवर्तन।पहले प्रत्येक मंत्रालय, विभाग या एजेंसी अपनी परियोजनाओं के लिए अलग-अलग दृष्टिकोण अपनाती थी। किंतु नागरिकों और कंपनियों को बुनियादी ढांचे का अनुभव विभागीय आधार पर नहीं होता। काम पर जाने वाला युवा, मंडी तक फसल पहुंचाने वाला किसान या आपूर्ति श्रृंखला का प्रबंधन करने वाला विनिर्माता सड़कों, रेलवे, बंदरगाहों, पानी और बिजली पर एक एकीकृत व्यवस्था के रूप में निर्भर करता है। इस श्रृंखला की एक कड़ी भी कमजोर होने पर अन्य निवेशों का प्रतिफल और जीवन की सुगमता प्रभावित होती है। किसी राजमार्ग का कोई अर्थ नहीं, यदि उसके लक्षित बंदरगाह पर बाधा हो। औद्योगिक पार्क विश्वसनीय बिजली और पानी के बिना अपनी क्षमता का पूरा उपयोग नहीं कर सकता। हवाई अड्डा भी अपने क्षेत्र से मजबूत संपर्क के अभाव में आर्थिक संभावनाओं को साकार नहीं कर सकता।

मेरे अनुभव में, बुनियादी ढांचे के प्रबंधन की कठिनाइयां प्रायः किसी एक गलत निर्णय से नहीं, बल्कि ऐसे अनेक निर्णयों से उत्पन्न होती हैं, जो अलग-अलग उचित होने के बावजूद अपेक्षित समग्र परिणाम नहीं दे पाते। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इस चुनौती को समझा। किसी परिसंपत्ति के निर्माण के लिए जिम्मेदार विभाग के दृष्टिकोण से बुनियादी ढांचे को देखने के बजाय, उन्होंने उस व्यापक परिणाम पर ध्यान केंद्रित किया, जिसे हासिल करना है। परिणामोन्मुख और नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण उनके प्रशासन की पहचान रहा है।गुजरात में उनके कार्यकाल के दौरान इस दृष्टिकोण की शुरुआत दिखाई देती है। वहां बुनियादी ढांचे की योजना विभिन्न क्षेत्रों की आवश्यकताओं और उनसे जुड़ी आर्थिक गतिविधियों के अनुरूप बनाई गई। प्रगति पथ, प्रवासी पथ, विकास पथ और किसान पथ जैसी पहलें अलग-अलग संपर्क आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की गईं। धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र सहित अन्य निवेश क्षेत्रों के विकास में भूमि, बुनियादी ढांचे और संपर्क सुविधाओं को एक साथ लाने का प्रयास किया गया। उद्देश्य यह समझना था कि लोग कहां रहते हैं, उनकी आजीविका कहां है, उद्योग कहां विकसित हो सकते हैं और वस्तुओं का परिवहन कैसे होना चाहिए।

इस दृष्टिकोण में प्रौद्योगिकी की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। गुजरात में बीआईएसएजी ने उपग्रह अनुप्रयोगों, भौगोलिक सूचना प्रणाली और स्थानिक योजना की क्षमताएं विकसित कीं। इससे भूमि, सड़कों, जल संसाधनों, बस्तियों, उद्योगों और अन्य बुनियादी ढांचे को एक साथ देखकर विकास की अधिक समग्र समझ विकसित करना संभव हुआ।इसी पृष्ठभूमि में राष्ट्रीय स्तर पर पीएम गति शक्ति का शुभारंभ हुआ। इसका महत्व केवल गुजरात में अपनाए गए तरीकों को दोहराने में नहीं, बल्कि भूगोल, बुनियादी ढांचे और आर्थिक गतिविधियों को परस्पर जोड़ने वाली प्रशासनिक सोच को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने में है। गति शक्ति ने केंद्र, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के विभिन्न मंत्रालयों को एक साथ लाकर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की एकीकृत योजना और समन्वित क्रियान्वयन के लिए संपूर्ण सरकारी दृष्टिकोण विकसित किया।

प्रश्न उठ सकता है कि क्या गति शक्ति से पहले सरकारी विभाग आपस में समन्वय नहीं करते थे? निस्संदेह, करते थे। किंतु परंपरागत रूप से समन्वय प्रायः तब शुरू होता था, जब परियोजना के दौरान कोई समस्या उत्पन्न हो जाती थी। सड़क के लिए रेलवे क्रॉसिंग, पाइपलाइन के लिए सड़क के साथ समन्वय अथवा किसी प्राधिकरण से मंजूरी की आवश्यकता पड़ने पर अंतर-विभागीय बैठकें होती थीं। गति शक्ति ने इस समन्वय को योजना के प्रारंभिक चरण में ही संभव बनाया।अब योजनाकार जमीन पर काम शुरू होने से पहले ही परस्पर निर्भरताओं और संभावित बाधाओं की पहचान कर सकते हैं। सड़क बनाने से पहले यह देखा जा सकता है कि संबंधित गलियारे में अन्य कौन-सी परियोजनाएं प्रस्तावित हैं। औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने से पहले रेल, सड़क, बिजली, पानी और लॉजिस्टिक्स की आवश्यकताओं का आकलन किया जा सकता है। इससे परियोजनाओं की बेहतर योजना बनाने, लागत घटाने तथा भूमि अधिग्रहण और वन भूमि के उपयोग से जुड़ी आवश्यकताओं को कम करने में सहायता मिलती है।

पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान में 3,291 से अधिक डेटा परतों के माध्यम से 58 मंत्रालयों और विभागों की बुनियादी ढांचा योजना को एकीकृत किया गया है। अगस्त 2026 तक नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप के माध्यम से 18 लाख करोड़ रुपये से अधिक की अनुमानित लागत वाली 396 बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का मूल्यांकन किया जा चुका है।अब गति शक्ति का उपयोग परिवहन और बुनियादी ढांचे से आगे बढ़कर सामाजिक क्षेत्र में भी हो रहा है। दस लाख से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों की मैपिंग की गई है। कुछ राज्य इस मंच का उपयोग उन वंचित क्षेत्रों की पहचान करने के लिए कर रहे हैं, जहां नए विद्यालयों की आवश्यकता है।

योजना निर्माण चुनौती का केवल एक हिस्सा है; प्रभावी क्रियान्वयन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। भूमि अधिग्रहण, वैधानिक मंजूरियों, उपयोगिताओं के स्थानांतरण और केंद्र-राज्य समन्वय जैसी बाधाएं परियोजनाओं में विलंब का कारण बनती हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए प्रगति की परिकल्पना की गई। इसके अंतर्गत प्रधानमंत्री प्रत्येक महीने लगभग 25-30 परियोजनाओं की समीक्षा करते हैं, जिसमें केंद्र सरकार के सचिव और राज्यों के मुख्य सचिव भाग लेते हैं। उच्चतम स्तर पर निरंतर निगरानी से जवाबदेही और तात्कालिकता बढ़ी है। इससे विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और राज्य सरकारों को उन समस्याओं के समाधान के लिए एक साथ लाने में सहायता मिली है, जिन्हें कोई एक प्राधिकरण अकेले हल नहीं कर सकता।

आज भारतीय कंपनियां वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा कर रही हैं, जहां लॉजिस्टिक्स लागत, विश्वसनीयता और आपूर्ति का समय उत्पाद की अंतिम कीमत को प्रभावित करते हैं। व्यापार समझौतों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की बढ़ती भागीदारी के बीच कच्चे माल तथा तैयार वस्तुओं का कुशल परिवहन प्रतिस्पर्धा का महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए लॉजिस्टिक्स लागत घटाने के लिए सड़कों, रेलवे, बंदरगाहों, जलमार्गों, गोदामों और औद्योगिक क्षेत्रों की एकीकृत योजना आवश्यक है।अंततः, सार्वजनिक पद पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 25 वर्षों के कार्यकाल का महत्व केवल धरातल पर निर्मित परिसंपत्तियों तक सीमित नहीं है। इसका महत्व इस बात में भी है कि उन्होंने बुनियादी ढांचे के प्रति सरकार की सोच और दृष्टिकोण को नया स्वरूप दिया है। इसके परिणामस्वरूप सरकार ऐसी व्यवस्था के रूप में कार्य करने की दिशा में आगे बढ़ी है, जो समग्र दृष्टिकोण अपनाते हुए नागरिकों को निर्बाध सेवाएं और बेहतर अनुभव प्रदान करने के साथ-साथ व्यापक अर्थव्यवस्था की उत्पादकता बढ़ाने पर केंद्रित है।

राजीव गौबा

(लेखक नीति आयोग के सदस्य और भारत सरकार के पूर्व कैबिनेट सचिव हैं।)

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