National Engineers’ Day
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हर साल 15 सितंबर को क्यों मनाया जाता है National Engineers’ Day ? जानिए क्या है Sir M. Visvesvaraya का योगदान 

15 सितंबर को भारत में हर साल National Engineers’ Day मनाया जाता है. देश के विकास में इंजीनियरों की भूमिका को सम्मान देने के लिए यह दिन खास माना जाता है.

By : Ark Sahuliyar
हर साल 15 सितंबर को क्यों मनाया जाता है National Engineers’ Day ? जानिए क्या है Sir M. Visvesvaraya का योगदान 

न्यूज़11 भारत 
नई दिल्ली/डेस्क:
15 सितंबर को भारत में हर साल National Engineers’ Day मनाया जाता है. देश के विकास में इंजीनियरों की भूमिका को सम्मान देने के लिए यह दिन खास माना जाता है. सड़क, पुल, बांध और रेलवे जैसी मूलभूत सुविधाएं हों या कंप्यूटर, मोबाइल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मॉडर्न टेक्नोलॉजी तक, हमारी जिंदगी में हर एक हिस्से में इंजीनियरों का योगदान अहम है. पर क्या आपको पता है कि 15 सितंबर को ही इंजीनियर्स डे क्यों मनाया जाता है? 

किसी राष्ट्र के निर्माण का मार्ग अच्छे नागरिकों का निर्माण करना है. अधिकांश नागरिकों को कुशल, अच्छे चरित्र वाले और कर्तव्य की उचित उच्च भावना रखने वाले होना चाहिए.
- सर एम. विश्वेश्वरैया 

क्यों मनाया जाता है इंजीनियर्स डे 
इंजीनियर्स डे मानाने के पीछे भारत के महान इंजीनियर सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की कहानी जुड़ी है. इंडिया में हर वर्ष 15 सितंबर को नेशनल इंजीनियर्स डे सेलिब्रेट किया जाता है. 15 सितंबर 1861 को भारत के महान इंजीनियरों और दूरदर्शी लोगों में गिने जाने वाले सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का जन्म हुआ था. देश के लिए उनके योगदान को देखते हुए उनके जन्मदिवस को Engineers’ Day के तौर पर मनाये जाने का फैसला किया गया. अपने काम के जरिए सर विश्वेश्वरैया ने बताया कि इंजीनियरिंग का क्षेत्र केवल इमारतें बनाने या मशीनों के निर्माण तक सीमित नहीं है. शहरों के विकास के बड़े मुद्दे जैसे पानी की समस्या, सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण को सोल्व करने में भी इंजीनियरिंग अहम भूमिका निभाती है. 

सर एम. विश्वेश्वरैया का परिचय ?
15 सितंबर 1861 को कर्नाटक में जन्में सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और देश के प्रमुख इंजीनियरों के रूप में अपनी पहचान बनायीं. सिंचाई, पानी के प्रबंधन (Water Management) और सार्वजनिक निर्माण से जुड़े कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उन्होंने बड़े काम किए. सर विश्वेश्वरैया मैसूर रियासत के दीवान भी बनाए गए. इस पद पर रहते हुए उन्होंने  शिक्षा, उद्योग और विकास को बढ़ावा और मैसूर के विकास और औद्योगिक प्रगति (Industrial Progress) को नई दिशा दी. 

उनका सबसे बड़ा योगदान पानी के बेहतर इस्तेमाल और बाढ़ से बचाव के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए कामों को माना जाता है. सर विश्वेश्वरैया ने पानी के स्तर को नियंत्रित करने के लिए ऑटोमैटिक फ्लडगेट सिस्टम तैयार की थी, जिसे सबसे पहले पुणे के पास खडकवासला जलाशय में स्थापित किया गया था. कृष्णा राजा सागर बांध से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों में भी उनकी भूमिका काफी अहम रही. सिंचाई और क्षेत्र के विकास के लिए इस प्रोजेक्ट से काफी  मदद मिली. साथ ही हैदराबाद में बाढ़ से बचाव एवं विशाखापत्तनम पोर्ट की सुरक्षा से जुड़े कार्यों में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा. 

1955 में भारत रत्न से किया गया था सम्मानित 
देश के प्रति उनके योगदान को देखते हुए सर एम. विश्वेश्वरैया को 1955 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया. आज भी इंजीनियरिंग के छात्रों और युवा प्रोफेशनल्स के लिए उनकी जिंदगी प्रेरणाश्रोत है. सही तकनीकी ज्ञान, मेहनत और दूर की सोच के जरिए समाज और देश के लिए दिए गए उनके योगदान के लिए उनकी जयंती (15 सितंबर) को इंजीनियरों के सम्मान में National Engineers’ Day के रूप में मनाया जाता है. 

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