देश के कई हिस्सों में मानसून एक बार फिर मुश्किलें बढ़ा रहा है। उत्तर प्रदेश के 16 जिलों के 80 से ज्यादा गांव बाढ़ की चपेट में हैं। उन्नाव की रिहायशी कॉलोनियों में पानी भरने के बाद नावों से आवाजाही हो रही है, जबकि कानपुर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है।
मैदानी इलाकों के साथ पहाड़ी राज्यों में भी बारिश का असर दिख रहा है। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में लैंडस्लाइड के बाद पठानकोट-बैजनाथ पपरोला रेल सेक्शन पर चट्टानें गिर गईं, जिसके चलते चार ट्रेन सेवाएं अगले आदेश तक रद्द करनी पड़ी हैं। उत्तराखंड में भी भारी बारिश और भूस्खलन ने हालात बिगाड़े हैं।
यूपी में 16 जिले बाढ़ की चपेट में
उत्तर प्रदेश में बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर से कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित है। 10 प्रमुख नदियां उफान पर हैं और 80 से ज्यादा गांव बाढ़ प्रभावित बताए जा रहे हैं।उन्नाव में बाढ़ का पानी घरों तक पहुंच गया है। कई परिवारों को छतों पर रहना पड़ रहा है। रिहायशी इलाकों में पानी इतना बढ़ गया कि लोगों को आने-जाने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ा।गोरखपुर में भी तेज बारिश के बाद सड़कों पर करीब एक फीट तक पानी भर गया। कई जगह वाहन पानी में फंस गए।वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाट किनारे बने 100 से ज्यादा छोटे मंदिर पानी में डूब गए हैं। वहीं शारदा नदी के तेज बहाव से करीब 70 एकड़ जमीन के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।
बिहार के छपरा में 100 से ज्यादा दुकानों में घुसा पानी
बिहार में 13 अगस्त की शाम हुई तेज बारिश ने उमस से राहत तो दी, लेकिन कई शहरों में जलजमाव की स्थिति पैदा कर दी। छपरा में करीब 45 मिनट की तेज बारिश के बाद मुख्य सड़कों और चौक-चौराहों पर डेढ़ से ढाई फीट तक पानी भर गया।शहर की करीब 100 दुकानों में भी बारिश का पानी घुस गया। दूसरी ओर पटना में अधिकतम तापमान 36.3 डिग्री और न्यूनतम 29.4 डिग्री दर्ज किया गया।मौसम विभाग ने शुक्रवार को बिहार के 18 जिलों में बारिश, आंधी और बिजली गिरने की आशंका जताई है। कुछ इलाकों में तेज हवाएं भी चल सकती हैं।
हिमाचल में लैंडस्लाइड से रेल और सड़क यातायात प्रभावित
हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के साथ भूस्खलन ने मुश्किल बढ़ा दी है। कांगड़ा जिले में पठानकोट-बैजनाथ पपरोला रेल सेक्शन पर चट्टानें गिरने के बाद चार ट्रेन सेवाओं को अगले आदेश तक रद्द कर दिया गया।सोलन के वकनाघाट में चंडीगढ़-शिमला हाईवे पर भी बारिश के बाद घना कोहरा छा गया। विजिबिलिटी कम होने से वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।शिमला में भी पहाड़ी से बड़ी चट्टानें हाईवे पर गिरने के बाद रास्ता बंद हो गया।
उत्तराखंड में टनल में पानी-मलबा घुसा, 7 मजदूरों की मौत
उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी में निर्माणाधीन हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की करीब 3 किलोमीटर लंबी टनल में पानी और मलबा भर गया। हादसे के वक्त 22 मजदूरों के फंसे होने की जानकारी सामने आई थी। इस हादसे में 7 मजदूरों की मौत हुई है।लगातार बारिश के बीच देहरादून, पिथौरागढ़, बागेश्वर और नैनीताल में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। खराब मौसम को देखते हुए पिथौरागढ़, देहरादून और नैनीताल में 12वीं तक के स्कूल बंद किए गए हैं। प्रदेश में 61 सड़कें भी बंद हैं।
राजस्थान में बरसाती नदियां बहीं
राजस्थान में भारी बारिश का दौर कुछ धीमा पड़ा है, लेकिन कई जिलों में अभी भी बारिश जारी है। शुक्रवार को 18 जिलों में तेज बारिश का अलर्ट है।जैसलमेर, जोधपुर, बाड़मेर और सिरोही में गुरुवार को करीब 2 इंच तक बारिश दर्ज हुई। जैसलमेर में बारिश के बाद बरसाती नदियां बहने लगीं।बीसलपुर बांध में भी पानी की आवक बढ़ी है। पिछले 48 घंटे में बांध का जलस्तर करीब 27 सेंटीमीटर बढ़ा है। हालांकि, मौसम विभाग का अनुमान है कि 16 अगस्त से राजस्थान में बारिश कमजोर पड़ सकती है और ज्यादातर इलाकों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी देखने को मिलेगी।
MP में 12 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
मध्य प्रदेश में भी मानसून फिर सक्रिय हुआ है। शुक्रवार को जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के कई इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।मौसम विभाग के मुताबिक, अगले 24 घंटे में 12 जिलों में 4 इंच या उससे ज्यादा बारिश हो सकती है। भोपाल और इंदौर समेत कई शहरों में भी हल्की से तेज बारिश के आसार हैं।बंगाल की खाड़ी में बने डिप्रेशन का असर प्रदेश के मौसम पर पड़ रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में भी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।
हरियाणा में भी भारी बारिश का अलर्ट
हरियाणा के अंबाला, पंचकूला, यमुनानगर और कुरुक्षेत्र में शुक्रवार को भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। करनाल और कैथल समेत आसपास के जिलों में भी तेज बारिश हो सकती है।राज्य के 12 अन्य जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान है। पंचकूला में शुक्रवार सुबह बारिश के बाद मौसम सुहावना हो गया।मानसून की मौजूदा स्थिति को देखते हुए उत्तर भारत के कई राज्यों में अगले 24 से 48 घंटे अहम रहने वाले हैं। खासकर बाढ़ प्रभावित मैदानी इलाकों और पहाड़ी राज्यों में प्रशासन की नजर जलस्तर, भूस्खलन और सड़क-रेल संपर्क पर बनी हुई है।