नई दिल्लीः देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की योजना पर संसद की संयुक्त समिति (JPC) विचार कर रही है । समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने बताया कि इस व्यवस्था को लागू करने के लिए संवैधानिक, राजनीतिक और व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा की जा रही है। समिति अब तक दिल्ली में 25 बैठकें कर चुकी है और करीब 10 राज्यों का दौरा कर चुकी है ।
1952 से 1967 तक एक साथ हुए थे चुनाव
पीपी चौधरी ने बताया कि देश में 1952, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ हुए थे। बाद में कुछ राज्यों की विधानसभाएं समय से पहले भंग होने और 1970 में लोकसभा भंग होने के कारण यह व्यवस्था टूट गई, इसके बाद देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव अलग-अलग समय पर होने लगे। उनका कहना है कि संविधान बनाने के समय भी एक साथ चुनाव कराने की सोच मौजूद थी। समिति इसी व्यवस्था को फिर से लागू करने के रास्ते तलाश रही है ।
25 बैठकें और 10 राज्यों का दौरा
चौधरी के मुताबिक, समिति ने राजनीतिक दलों, उद्योग जगत, सामाजिक संगठनों, सरकारी अधिकारियों, मुख्यमंत्रियों, उपमुख्यमंत्रियों और विधानसभा अध्यक्षों से सुझाव लिए हैं, इन सुझावों के आधार पर प्रस्ताव के अलग-अलग पहलुओं को समझा जा रहा है।
क्षेत्रीय दलों और संघीय व्यवस्था पर भी चर्चा
एक साथ चुनाव कराने को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि इससे क्षेत्रीय दलों की भूमिका और राज्यों की राजनीतिक ताकत पर क्या असर पड़ेगा, समिति ने 1967 से 2024 तक के चुनावी इतिहास और अलग-अलग दौर में बनी सरकारों का अध्ययन किया है ।
पीपी चौधरी ने बताया कि विशेषज्ञों से इस विषय पर राय ली जा रही है, समिति का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिससे चुनाव प्रक्रिया व्यवस्थित हो और देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत बनी रहे।