नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने GSLV-F18 रॉकेट से NVS-03 सैटेलाइट के सफल प्रक्षेपण पर ISRO के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई दी है । उन्होंने कहा कि यह मिशन भारत की अपनी सैटेलाइट नेविगेशन प्रणाली NavIC को मजबूत करने और जरूरी तकनीकों में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अहम कदम है। इस सैटेलाइट के जुड़ने से देश को बेहतर नेविगेशन सेवाएं मिल सकेंगी।
क्या है NVS-03 मिशन और क्यों है खास?
ISRO ने 30 अक्टूबर 2026 को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F18 रॉकेट के जरिए NVS-03 सैटेलाइट लॉन्च किया, रॉकेट ने सैटेलाइट को तय ट्रांसफर ऑर्बिट में सफलतापूर्वक पहुंचाया, यह GSLV रॉकेट की 20वीं उड़ान थी।
NVS-03 भारत की अगली पीढ़ी की नेविगेशन सैटेलाइट श्रृंखला का हिस्सा है इसमें स्वदेशी एटॉमिक क्लॉक के साथ अन्य एटॉमिक क्लॉक भी लगाई गई हैं । इसके अलावा इसमें L1 सिग्नल की सुविधा दी गई है, जो पहले से मौजूद L5 और S बैंड सिग्नल के साथ काम करेगी।
#WATCH | GSLV-F18 carrying NVS-03 lifts off from Satish Dhawan Space Centre, SHAR, Sriharikota. The GSLV-F18 vehicle will place NVS-03 satellite into a Geosynchronous Transfer Orbit. NVS-03 is the third satellite in next generation navigation satellite system envisaged for providing continuity of navigation services for IRNSS series. The satellite carries Indigenous Atomic clock, along with the procured Atomic clocks. It also includes L1 signal in addition to existing L5/S signals with Coverage over India land mass and a region extending 1500 km around Indian geopolitical boundary. #GSLVF18 #NVS03 #ISRO #NavIC
— DD News (@DDNewslive) October 30, 2026
भारत की अपनी GPS प्रणाली NavIC को क्या फायदा होगा?
NavIC भारत की अपनी नेविगेशन प्रणाली है। यह लोगों को लोकेशन, रास्ते और समय की जानकारी देने के साथ कई जरूरी सेवाओं में काम आती है। इसका इस्तेमाल परिवहन, समुद्री सुरक्षा, रक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में होता है ।यह प्रणाली भारत के पूरे क्षेत्र और सीमाओं से करीब 1,500 किलोमीटर बाहर तक सेवाएं देने के लिए बनाई गई है।
ISRO के मुताबिक, NVS-03 के सफल प्रक्षेपण से NavIC के सक्रिय सैटेलाइट की संख्या न्यूनतम जरूरी स्तर यानी चार तक पहुंच गई है। इससे भारत की अपनी नेविगेशन व्यवस्था को लगातार सेवाएं देने में मदद मिलेगी।
आम लोगों को कैसे मिलेगा फायदा?
NavIC का इस्तेमाल वाहनों की लोकेशन, रेलवे ट्रैकिंग, समुद्र में मछुआरों की सुरक्षा और मोबाइल नेविगेशन जैसी सेवाओं में किया जा सकता है, NVS-03 में L1 सिग्नल जुड़ने से आम लोगों के उपकरणों में NavIC के इस्तेमाल की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। हालांकि इसका पूरा लाभ डिवाइस के सपोर्ट और आगे होने वाले तकनीकी विकास पर निर्भर करेगा।