नई दिल्लीः कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने भारत में बांग्लादेश जैसी स्थिति बनने की आशंका को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि भारत एक शांतिपूर्ण लोकतंत्र है और देश में सरकार बदलने का फैसला जनता चुनाव के जरिए करती है । नेहा बोरा के बांग्लादेश के छात्र आंदोलन से प्रेरणा लेने वाले बयान के बीच पायलट ने साफ किया कि कांग्रेस हिंसा का समर्थन नहीं करती और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग उठाती रहेगी।
बांग्लादेश से तुलना पर क्या बोले सचिन पायलट?
सचिन पायलट से जब भारत में बांग्लादेश जैसे आंदोलन और राजनीतिक बदलाव को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि भारत में जो भी बदलाव होगा वह जनता की इच्छा से होगा। पिछले 75 सालों में सरकारें चुनाव के जरिए बदली हैं और आगे भी यही लोकतांत्रिक तरीका रहेगा। उन्होंने कहा कि देश का संविधान सबसे ऊपर है और चुनाव निष्पक्ष व पारदर्शी होने चाहिए। लोकतंत्र में किसी भी सरकार को जनता के फैसले का सम्मान करना चाहिए।
नेहा बोरा ने बांग्लादेश के आंदोलन से ली प्रेरणा
दरअसल, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की नेता नेहा बोरा ने 14 अक्टूबर को बांग्लादेश के सोशलिस्ट स्टूडेंट्स फ्रंट के छठे राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए वीडियो संदेश भेजा था । इसमें उन्होंने बांग्लादेश के Gen Z आंदोलन की तारीफ करते हुए कहा था कि इस आंदोलन ने उन्हें रास्ता दिखाया है। उन्होंने दोनों देशों के युवाओं के साथ मिलकर बेहतर दक्षिण एशिया बनाने की बात भी कही थी ।
दिल्ली में पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
पायलट ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए । उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने पूछा कि क्या अपनी मांग रखने वाले प्रदर्शनकारी आतंकवादी या देशद्रोही थे? राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलने जाते समय बसों में ले जाए जाने की घटना पर भी उन्होंने नाराजगी जताई।
कांग्रेस नेता ने कहा कि कानून तोड़ने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए लेकिन शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोकना सही नहीं है। मल्लिकार्जुन खरगे के बयान पर उन्होंने राजनीतिक बहस में मर्यादा बनाए रखने की जरूरत भी बताई। साथ ही राहुल गांधी का बचाव करते हुए कहा कि विपक्ष को सरकार से सवाल पूछने और उसकी नीतियों की आलोचना करने का पूरा अधिकार है।