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रांची/डेस्क: झारखंड हाईकोर्ट ने करीब आठ साल से लंबित विभागीय जांच के कारण प्रमोशन से वंचित कृष्ण कुमार को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने राज्य सरकार को उन्हें 8 जून 2022 से जूनियर सिलेक्शन ग्रेड और 4 अक्टूबर 2024 से एडिशनल कलेक्टर के पद पर प्रमोशन देने का आदेश दिया है. प्रमोशन से वरिष्ठता और वेतनमान में बदलाव का लाभ मिलेगा, लेकिन पिछली अवधि का वेतन अंतर अभी नहीं दिया जाएगा. पूरी प्रक्रिया आठ सप्ताह के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया गया है. प्रमोशन को लेकर रामगढ़ निवासी कृष्ण कुमार ने प्रमोशन की मांग को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश दीपक रोशन ने मामले में प्रार्थी को बड़ी राहत देते हुए यह फैसला सुनाया है.
जूनियर अधिकारियों को प्रमोशन, कृष्ण कुमार का रुका था मामला
कृष्ण कुमार की नियुक्ति 2010 में तीसरी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के जरिए डिप्टी कलेक्टर के पद पर हुई थी. बाद में उनकी पोस्टिंग नागड़ी अंचल में अंचल अधिकारी के रूप में हुई. इसी दौरान जमीन के रिकॉर्ड में तय सीमा से अधिक जमीन का नाम दर्ज करने के आरोप में उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई. यह जांच वर्ष 2018 से लंबित थी.
इस बीच उनके ही बैच के उनसे जूनियर अधिकारियों को प्रमोशन मिल गया. उन्हें 8 जून 2022 को Junior Selection Grade और 4 अक्टूबर 2024 को Additional Collector के पद पर प्रमोशन दिया गया. कृष्ण कुमार का प्रमोशन विभागीय और आपराधिक मामलों के लंबित होने के कारण रोक दिया गया था.
जांच रिपोर्ट में भी आरोपों पर सवाल
कोर्ट ने रिकॉर्ड में मौजूद रिपोर्टों का भी उल्लेख किया. सरकार की ओर से मामले को रखने वाले अधिकारी की रिपोर्ट में कहा गया था कि अंचल अधिकारी के लिए यह पता लगाना संभव नहीं था कि पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए जमीन मालिक की तय जमीन से अधिक जमीन बेची गई है. कोर्ट ने यह भी पाया कि कृष्ण कुमार के खिलाफ विभागीय जांच आठ साल से अधिक समय से लंबित है और अभी तक अंतिम फैसला नहीं लिया गया है.
सरकार ने क्या कहा?
राज्य सरकार ने कहा कि विभागीय और आपराधिक मामले अभी लंबित हैं, इसलिए प्रमोशन पर फैसला बंद लिफाफे में रखने की प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए. सरकार ने यह भी कहा था कि कृष्ण कुमार ने अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण जमा नहीं किया था, जिसके कारण भी प्रमोशन में दिक्कत थी.
हालांकि, कृष्ण कुमार ने ऑनलाइन पोर्टल के रिकॉर्ड पेश किए, जिनसे पता चला कि उन्होंने 2022, 2023 और 2025 के लिए अपनी संपत्ति का विवरण जमा किया था. इस रिकॉर्ड को सरकार ने भी खारिज नहीं किया.
दो साल से ज्यादा मामला लंबित हो तो अस्थायी प्रमोशन का प्रावधान
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के 20 नवंबर 2008 के नियम का हवाला देते हुए कहा कि यदि किसी कर्मचारी का प्रमोशन विभागीय या आपराधिक मामले के कारण रोक दिया गया है और मामला दो साल के भीतर पूरा नहीं होता, तो नियम में दी गई परिस्थितियों के आधार पर उसे अस्थायी प्रमोशन दिया जा सकता है.
अदालत ने पाया कि सरकार ने यह नहीं बताया कि कृष्ण कुमार को अस्थायी प्रमोशन नहीं देने के लिए नियम में बताए गए कारणों में से कोई कारण मौजूद था. ऐसे में कोर्ट ने उन्हें उनके बैच के जूनियर अधिकारियों को प्रमोशन मिलने की तारीख से प्रमोशन देने का आदेश दिया.
पिछले वेतन पर बाद में फैसला होगा
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कृष्ण कुमार को अभी पिछली अवधि के वेतन का अंतर नहीं मिलेगा. विभागीय और आपराधिक मामलों के अंतिम नतीजे के बाद राज्य सरकार बकाया वेतन देने पर फैसला करेगी. हालांकि, वरिष्ठता और वेतनमान में बदलाव से जुड़े अन्य लाभ उन्हें दिए जाएंगे. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को प्रमोशन और उससे जुड़े लाभ की पूरी प्रक्रिया आठ सप्ताह के अंदर पूरी करने का निर्देश दिया है. इसके साथ ही याचिका को मंजूर कर लिया गया.
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