विवेक सिंह, संग्रामपुर, अमेठी: ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के दावों के बीच संग्रामपुर क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चंडेरिया और विशेश्वरगंज की व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। शुक्रवार को दोनों केंद्रों पर चिकित्सकों के नहीं पहुंचने का आरोप लगा। इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचे मरीजों को निराशा का सामना करना पड़ा। आरोप है कि चिकित्सकों की अनुपस्थिति में मरीजों को पुरानी पर्ची पर लिखी दवाएं देकर वापस कर दिया गया।
अस्पताल पहुंचे मरीज, लेकिन नहीं मिले डॉक्टर
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ग्रामीण आबादी के लिए सरकारी चिकित्सा व्यवस्था की पहली कड़ी हैं। दूर-दराज के गांवों से मरीज यहां उपचार की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। ऐसे में चिकित्सकों की गैरमौजूदगी मरीजों की परेशानी बढ़ा देती है। चंडेरिया और विशेश्वरगंज में शुक्रवार को सामने आई स्थिति ने स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और चिकित्सकों की नियमित उपस्थिति पर सवाल खड़े किए हैं।
पुरानी पर्ची के आधार पर दवा देना कितना उचित?
मरीज की बीमारी, मौजूदा लक्षण और स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार दवा तथा उसकी खुराक तय करना जरूरी होता है। बीमारी की स्थिति बदलने पर पहले से लिखी गई दवा उपयुक्त न भी हो सकती है। ऐसे में चिकित्सकीय परामर्श के बिना पुरानी पर्ची के आधार पर दवा देने से मरीजों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाने की आशंका रहती है।
फार्मासिस्ट के भरोसे इलाज, जिम्मेदारी किसकी?
चिकित्सक की अनुपस्थिति में फार्मासिस्ट के भरोसे स्वास्थ्य सेवाएं संचालित होने की स्थिति मरीजों के लिए गंभीर परेशानी बन सकती है। फार्मासिस्ट की भूमिका दवाओं के वितरण और औषधीय परामर्श तक सीमित होती है, जबकि बीमारी का निदान और उपचार निर्धारित करना चिकित्सक का काम है। ऐसे में अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करना स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है।
ग्रामीण मरीजों को कब मिलेगी नियमित चिकित्सा सुविधा?
चंडेरिया और विशेश्वरगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सकों की अनुपस्थिति को लेकर उठे सवालों के बीच अब स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी बढ़ गई है। विभाग को दोनों केंद्रों पर चिकित्सकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के साथ ही मरीजों को उचित चिकित्सकीय परामर्श और उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था करनी चाहिए। सवाल यह है कि जब ग्रामीण मरीज सरकारी अस्पतालों में इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, तो उन्हें चिकित्सक के अभाव में निराश होकर क्यों लौटना पड़े? स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और जवाबदेही से ही ऐसी स्थिति में सुधार संभव है।