सूर्य भान द्विवेदी, अमेठी: उत्तर प्रदेश के अमेठी में भवन निर्माण के दौरान की जा रही खुदाई के बीच तांबे से निर्मित संदिग्ध गोले चर्चा का विषय बन गए है। सूचना मिलते ही पुलिस और राजस्व टीम मौके पर पहुंच गई। संयुक्त टीम की प्रारंभिक जांच के बाद बुधवार को राज्य पुरातत्व विभाग की टीम मौके पर पहुंच कर जांच शुरू कर दिया।
भनौली गांव में मिले गोले
सहायक पुरातत्व अधिकारी, राज्य पुरातत्व विभाग लखनऊ डॉ. मनोज कुमार यादव ने बताया कि मुसाफिर खाना के भनौली गांव में गोलों के मिलने की सूचना मिली थी। तांबे से निर्मित गोले हैं। जिनका उपयोग गोला-बारूद की तरह किया जाता था। इनके ऊपर फ्यूज होल बना हुआ है। गोलों के ऊपरी हिस्से पर फ्यूज होल बना हुआ है और इन्हें लटकाकर या फेंककर इस्तेमाल करने जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। इन गोलों का व्यास लगभग 60 सेमी और ऊंचाई 20 सेमी है। जबकि इनका वजन 9 से 10 किलोग्राम के आसपास है।
तांबे के बने है गोले
तांबे के इन गोलों के पूरे धरातल पर प्राचीनता को दर्शाने वाला पैटीना का आवरण चढ़ा हुआ है। प्रथम दृष्टया ये तांबे के बने ऐतिहासिक गोले प्रतीत हो रहे हैं। जिनका उपयोग गोला-बारूद (तोप के गोले या प्राचीन बारूदी हथियारों) की तरह किया जाता था। उन्होंने आगे बताया कि ये भवन निर्माण की खुदाई के दौरान जमीन के मालिक को ये मिले थे।जिसके बाद प्रशासन की निगरानी में काम आगे बढ़ाया जा रहा है। आगे की खुदाई और शोध शासन व विभाग के निर्देशों के आधार पर की जाएगी।