बृजेश करीब, हरदोई: इमली रोड की पुरानी पहचान लौटाने की कोशिश के बीच पौधरोपण को लेकर नया सवाल खड़ा हो गया है। जिला गंगा समिति के सदस्य सुभाष पाण्डेय ने पिछली तीन बैठकों में इमली रोड की पुरानी सूरत लौटाने और पौधरोपण का मुद्दा उठाया था। सरकारी दावे के अनुसार 102 इमली पौधे रोपे जाने के बाद रविवार शाम उन्होंने मौका मुआयना किया। पाण्डेय के मुताबिक, पौधरोपण रेलवेगंज से नहीं, रामजानकी मंदिर से सांडी चुंगी तक कराया गया है। उन्होंने कहा कि इस ‘परदादारी’ को अगली बैठक में उघाड़ेंगे।
गल्ला मंडी-रेलवेगंज के बीच ही चूने के पानी से जलाई गईं थीं पौधों की जड़ों में
मामला इसलिए भी अहम है कि गल्ला मंडी से रेलवेगंज के बीच वे प्रतिष्ठान आते हैं, जिनके सामने वर्ष 2018 में नेकी की दीवार द्वारा लगाए गए इमली पौधों की जड़ों में चूने का पानी डालकर उन्हें नष्ट करने की शिकायत सामने आई थी। तब रेलवेगंज से सांडी चुंगी तक 211 पौधे लगाए गए थे, जिनसे इमली रोड की खोई पहचान लौटाने की उम्मीद जगी थी, लेकिन कई पौधे बच नहीं सके। अब प्रशासन ने इसी विरासत को फिर से जीवित करने के लिए 102 पौधे लगाए हैं।
पौधरोपण में न बुलाए जाने पर नाराज, प्रतिष्ठान स्वामियों को पौध सुरक्षा देने की मांग
पाण्डेय ने पौधरोपण कार्यक्रम में नहीं बुलाए जाने पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अगली बैठक में पौधरोपण की वास्तविक स्थिति के साथ ही बैठकों की सूचना में शामिल कोरम के नाम सरकारी प्रेस नोट में नहीं दिए जाने का मुद्दा भी उठाएंगे। उनकी मांग है कि रामजानकी मंदिर से रेलवेगंज तक भी इमली के पौधे लगाए जाएं और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित प्रतिष्ठान स्वामियों को दी जाए। इमली रोड की पुरानी छांव लौटाने की कवायद अब सिर्फ पौधे लगाने तक सीमित नहीं, बल्कि लगाए गए पौधों के संरक्षण और दावों की जमीनी हकीकत की भी परीक्षा है।