उत्तर प्रदेश में बाढ़ के हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। लखनऊ में 18 साल बाद भीषण बाढ़ ने शहर के कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया है। गोमती नदी का जलस्तर लगातार 7वें दिन बढ़ रहा है। फैजुल्लागंज इलाके में करीब 40 हजार घरों में 4 से 5 फीट तक पानी भर गया है, जिससे लगभग 3 लाख लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं।हालात ऐसे हैं कि हजारों लोगों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ा है। कई इलाकों में सड़कें पूरी तरह जलमग्न हैं और नावों के जरिए लोगों को बाहर निकाला जा रहा है।
बारिश रुकी, फिर भी क्यों बढ़ रहा पानी?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब यूपी में पिछले करीब 8 दिनों से बारिश नहीं हुई, तो नदियों का जलस्तर लगातार क्यों बढ़ रहा है?दरअसल, नेपाल, उत्तराखंड और यूपी के ऊपरी इलाकों में हुई भारी बारिश का पानी नदियों के जरिए मैदानी क्षेत्रों में पहुंच रहा है। इसके अलावा बैराज और जलाशयों से छोड़ा गया पानी भी कुछ समय बाद मैदानी इलाकों में पहुंचता है। यही वजह है कि बारिश थमने के बावजूद लखनऊ समेत कई जिलों में बाढ़ का संकट बढ़ रहा है।
11 जिलों में बाढ़, 10 नदियां उफान पर
यूपी के 11 जिले बाढ़ की चपेट में हैं और करीब 10 नदियां उफान पर हैं। लखनऊ के अलावा लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, बहराइच, श्रावस्ती, सीतापुर, गोंडा और बाराबंकी में भी बाढ़ का असर दिखाई दे रहा है।बलिया और गोंडा में कई गांवों का संपर्क आसपास के इलाकों से कट गया है। कई जगह गांव टापू में तब्दील हो गए हैं।
लखनऊ के कई धार्मिक स्थल भी जलमग्न
बढ़ते जलस्तर का असर लखनऊ के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भी पड़ा है। गोमती रिवर फ्रंट के पास हनुमंत धाम, लेटे हुए हनुमान मंदिर और चंद्रिका देवी मंदिर के आसपास पानी पहुंच गया है।फैजुल्लागंज में कृष्ण लोक कॉलोनी से लेकर नंदपुरम तक बाढ़ का पानी फैल चुका है।
40 नावों से राहत, लोगों ने व्यवस्था पर उठाए सवाल
प्रशासन का दावा है कि प्रभावित इलाके में करीब 40 नावें लगाई गई हैं, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि नावों की संख्या पर्याप्त नहीं है। कई परिवार सुरक्षित जगहों पर चले गए हैं और पीछे छूटे घरों में चोरी की घटनाओं की भी शिकायतें सामने आई हैं।