बृजेश मिश्रा, अमेठी: विकासखंड अमेठी में एडीओ पंचायत अनुराग यादव की लगातार गैरमौजूदगी को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। कार्यालय में अधिकारी की कुर्सी खाली मिलने से विभिन्न कामों के लिए ब्लॉक मुख्यालय पहुंचने वाले फरियादियों को बैरंग लौटना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारी के कार्यालय में नियमित नहीं बैठने की समस्या नई नहीं है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक, दूर-दराज के गांवों से लोग शिकायत, प्रमाणपत्र और पंचायत से जुड़े कार्यों के लिए ब्लॉक कार्यालय पहुंचते हैं। एडीओ पंचायत से संबंधित काम होने पर अधिकारी के कक्ष तक पहुंचने के बाद उन्हें खाली कुर्सी दिखाई देती है। अधिकारी कब आएंगे, इसकी जानकारी देने वाला भी कोई जिम्मेदार कर्मचारी नहीं मिलता। ऐसे में फरियादियों को बिना काम कराए वापस लौटना पड़ता है।
खाली कुर्सी देखकर लौटना पड़ा
सुनीता ने बताया कि वह अपनी समस्या लेकर एडीओ पंचायत कार्यालय पहुंचीं थीं। काफी देर इंतजार करने के बावजूद अधिकारी नहीं मिले। कार्यालय में उनकी कुर्सी खाली थी। कर्मचारियों से पूछने पर भी अधिकारी के आने का स्पष्ट समय नहीं बताया गया। मजबूर होकर उन्हें वापस लौटना पड़ा। मधु मिश्रा ने बताया कि अधिकारी से जरूरी काम के लिए मिलने आई थीं, लेकिन एडीओ पंचायत मौजूद नहीं थे। संबंधित कर्मचारियों से जानकारी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उनका कहना है कि ग्रामीणों को एक छोटे से काम के लिए भी कई बार ब्लॉक के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। आशीष ने कहा कि ग्रामीण अपना समय और पैसा खर्च कर ब्लॉक कार्यालय पहुंचते हैं। यदि अधिकारी मौजूद ही न मिलें तो उन्हें दोबारा आना पड़ता है। इससे सरकारी कार्यालयों में आने वाले लोगों की परेशानी बढ़ रही है।
जिम्मेदारों की निगरानी पर भी सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि किसी अधिकारी का कभी-कभार बैठक या क्षेत्रीय कार्य के लिए बाहर रहना अलग बात है, लेकिन कार्यालय में लगातार अनुपस्थिति से फरियादियों को परेशानी होना गंभीर विषय है। सवाल यह भी है कि यदि एडीओ पंचायत कार्यालय में मौजूद नहीं रहते तो उनकी अनुपस्थिति की निगरानी कौन करता है और फरियादियों को वैकल्पिक व्यवस्था के बारे में जानकारी क्यों नहीं दी जाती।
ग्रामीणों ने खंड विकास अधिकारी और उच्चाधिकारियों से मामले का संज्ञान लेकर एडीओ पंचायत की कार्यालय में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित कराने की मांग की है। साथ ही अधिकारी की अनुपस्थिति में संबंधित कार्यों के लिए वैकल्पिक जिम्मेदार कर्मचारी की व्यवस्था करने की मांग की है, ताकि ग्रामीणों को बेवजह ब्लॉक के चक्कर न लगाने पड़ें। अधिकारी का पक्ष जानने के लिए संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनका पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका।