शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी। इसी कारण उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति भी कहा जाता है. मान्यता है कि मां की आराधना करने से जीवन में सुख-समृद्धि, सकारात्मकता और खुशहाली आती है. आइए जानते हैं मां कूष्मांडा की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, प्रिय भोग, शुभ रंग, मंत्र और आरती।
मां कूष्मांडा पूजा विधि
नवरात्रि के चौथे दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल पर मां दुर्गा के सामने दीपक जलाएं और मां कूष्मांडा का ध्यान करें।
- मां को लाल फूल, अक्षत, चंदन और फल अर्पित करें।
- धूप-दीप जलाकर विधि-विधान से पूजा करें।
- मां कूष्मांडा के मंत्रों का जाप करें।
- माता को मालपुआ, पेठा या अन्य मिठाइयों का भोग लगाएं।
- अंत में मां की आरती करें और सुख-समृद्धि की कामना करें।
मां कूष्मांडा पूजा के शुभ मुहूर्त
14 अक्टूबर 2026 के लिए उपलब्ध जानकारी के अनुसार पूजा के प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार हैं:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:54 से 5:43 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 से दोपहर 12:30 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:22 से 3:09 बजे तक
- अमृत काल: दोपहर 4:14 से शाम 5:57 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:17 से 6:42 बजे तक
नोट: पूजा के मुहूर्त स्थान और पंचांग के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
मां कूष्मांडा को क्या भोग लगाएं?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा को मालपुआ का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इसके अलावा पेठा, कद्दू से बनी मिठाई और दही भी अर्पित किए जा सकते हैं।
नवरात्रि के चौथे दिन का शुभ रंग
नवरात्रि के चौथे दिन हरा रंग शुभ माना जाता है। इस दिन हरे रंग के वस्त्र पहनकर मां की पूजा करना धार्मिक परंपरा के अनुसार शुभ माना जाता है।
मां कूष्मांडा का प्रिय फूल
मां कूष्मांडा की पूजा में लाल गुड़हल, लाल गुलाब और लाल कमल के फूल अर्पित किए जा सकते हैं। भक्त अपनी श्रद्धा और उपलब्धता के अनुसार माता को फूल चढ़ा सकते हैं।
मां कूष्मांडा के मंत्र
1. मां कूष्मांडा का मूल मंत्र
ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥
2. मां कूष्मांडा का बीज मंत्र
ऐं ह्रीं क्लीं कूष्माण्डायै नमः॥
3. मां कूष्मांडा का स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
मां कूष्मांडा की आरती
कूष्मांडा जय जग सुखदानी।
मुझ पर दया करो महारानी॥
पिंगला ज्वालामुखी निराली।
शाकंभरी मां भोली-भाली॥
लाखों नाम निराले तेरे।
भक्त कई मतवाले तेरे॥
भीमा पर्वत पर है डेरा।
स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥
सबकी सुनती हो जगदंबे।
सुख पहुंचाती हो मां अंबे॥
तेरे दर्शन का मैं प्यासा।
पूर्ण कर दो मेरी आशा॥
मां के मन में ममता भारी।
क्यों न सुनेगी अरज हमारी॥
तेरे दर पर किया है डेरा।
दूर करो मां संकट मेरा॥
मेरे कारज पूरे कर दो।
मेरे तुम भंडारे भर दो॥
तेरा दास तुझे ही ध्याए।
भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥
मां कूष्मांडा की पूजा का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा की आराधना से भक्तों को साहस, ऊर्जा और सकारात्मकता का आशीर्वाद मिलता है। नवरात्रि के चौथे दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं और मां की विधिवत पूजा करके परिवार की सुख-शांति की कामना करते हैं।
जय माता दी!