ढाकाः बांग्लादेश में कपड़ा उद्योग के करीब 10 लाख मजदूरों के प्रदर्शन से देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है । रविवार 1 नवंबर को वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन के कारण 529 कपड़ा फैक्ट्रियों में काम बंद रहा। मजदूर मौजूदा न्यूनतम मासिक वेतन 12,500 टका से बढ़ाकर 30,000 टका करने की मांग कर रहे हैं ।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस से झड़प, सड़क जाम और आगजनी की घटनाएं भी हुईं । बांग्लादेश के कपड़ा उद्योग को देश की अर्थव्यवस्था की सबसे अहम कड़ी माना जाता है। यह उद्योग देश के कुल निर्यात में 80 प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है और करीब 40 लाख लोगों को रोजगार देता है।
क्यों सड़कों पर उतरे कपड़ा मजदूर?
मजदूरों का कहना है कि खाने-पीने की चीजों, मकान किराए, आने-जाने और इलाज का खर्च लगातार बढ़ रहा है, मौजूदा 12,500 टका वेतन में परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। इसलिए वे न्यूनतम वेतन दोगुने से भी ज्यादा बढ़ाकर 30 हजार टका करने की मांग कर रहे हैं।
ढाका, मीरपुर, सावर, अशुलिया और गाजीपुर जैसे औद्योगिक इलाकों में प्रदर्शन हुए, पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछार का इस्तेमाल किया । कुछ जगह पुलिस वाहनों और फैक्ट्रियों में आग लगाने की घटनाएं सामने आईं।
सरकार ने बनाया वेतन बोर्ड, फिर भी जारी है चिंता
मजदूरों की मांग के बीच श्रम मंत्री आरिफुल हक चौधरी ने छह सदस्यीय न्यूनतम वेतन बोर्ड बनाने की घोषणा की, प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने भी अधिकारियों के साथ बैठक कर फैक्ट्रियों में उत्पादन जारी रखने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए । सरकार ने हिंसा में राजनीतिक संगठनों के लोगों के शामिल होने का आरोप लगाया है। हालांकि, मजदूर संगठनों का कहना है कि वेतन और नौकरी से जुड़ी समस्याएं आंदोलन की बड़ी वजह हैं।
सोमवार को कई फैक्ट्रियां फिर खुल गईं, लेकिन वेतन को लेकर विवाद बना हुआ है, लंबे समय तक उत्पादन प्रभावित होने से बांग्लादेश के कपड़ा निर्यात और अंतरराष्ट्रीय कारोबार पर भी असर पड़ सकता है।