ढाकाः बांग्लादेश में भारत को ट्रांजिट कॉरिडोर देने की कथित कोशिश को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है । विपक्षी नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के नेता नाहिद इस्लाम ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार को चेतावनी दी है कि बांग्लादेश की जमीन का इस्तेमाल भारत के लिए कॉरिडोर बनाने में नहीं होना चाहिए, उन्होंने गंगा जल समझौते में भी बांग्लादेश का हिस्सा सुरक्षित रखने की मांग की है।
भारत के लिए कॉरिडोर बनाने के आरोप पर विवाद
शुक्रवार को ढाका में NCP की रैली हुई, इसमें गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद और बिजली एवं ऊर्जा मंत्री इकबाल हसन महमूद टुकू के इस्तीफे की मांग की गई। पार्टी ने आरोप लगाया कि दोनों मंत्री कानून-व्यवस्था और गैस-बिजली की समस्या संभालने में नाकाम रहे हैं।
इसी रैली में नाहिद इस्लाम ने आरोप लगाया कि जापान की मदद से बांग्लादेश के रास्ते क्षेत्रीय कॉरिडोर बनाने की योजना पर काम हो रहा है. जिसका फायदा भारत को मिल सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसा कोई फैसला जनता की इच्छा के खिलाफ नहीं लेना चाहिए ।
यह विवाद प्रधानमंत्री तारिक रहमान के 26 से 29 अक्टूबर तक जापान दौरे के बाद सामने आया है । इस दौरान दोनों देशों ने व्यापार, निवेश और बंगाल की खाड़ी में संपर्क बढ़ाने पर बातचीत की। जापान मातारबाड़ी बंदरगाह को विकसित करने में भी मदद कर रहा है हालांकि, बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा है कि जापान दौरे में किसी तीसरे देश से जुड़े मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई।
जापान दौरे से क्यों जुड़ा कॉरिडोर का मुद्दा?
तारिक रहमान 26 से 29 अक्टूबर तक जापान के दौरे पर थे, इस दौरान जापान और बांग्लादेश ने बंगाल की खाड़ी में संपर्क बढ़ाने और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई । जापान मातारबाड़ी गहरे समुद्र के बंदरगाह को विकसित करने में भी मदद कर रहा है।
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 28 अक्टूबर को कहा था कि भारत और जापान की कई योजनाओं में पूर्वोत्तर भारत की भूमिका अहम है । भारत इन संपर्क योजनाओं को आगे बढ़ाना चाहता है। हालांकि बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा कि जापान दौरे में किसी तीसरे देश से जुड़े मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई।
12 दिसंबर को खत्म होगी गंगा जल संधि
भारत और बांग्लादेश के बीच 12 दिसंबर 1996 को गंगा जल बंटवारे को लेकर 30 साल की संधि हुई थी, यह संधि 12 दिसंबर 2026 को खत्म हो रही है। इसके तहत पश्चिम बंगाल के फरक्का बैराज पर जनवरी से मई के बीच कम पानी के मौसम में दोनों देशों के बीच जल बंटवारे का नियम तय किया गया है बांग्लादेश चाहता है कि नई संधि पहले से ज्यादा लंबी अवधि की हो और उसमें सूखे के मौसम में उसके हिस्से का पानी मिलने की गारंटी भी हो।