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रांची/डेस्क: रांची सिविल कोर्ट के रिकॉर्ड रूम से करीब पांच दशक पुराने एक अहम दीवानी मुकदमे की पत्रावली गायब होने का मामला सामने आया है. मामला टाइटल सूट केस संख्या 14/1973 से जुड़ा है. रिकॉर्ड के लापता होने को गंभीर प्रशासनिक मामला मानते हुए सिविल कोर्ट के रजिस्ट्रार ने कोतवाली थाना प्रभारी को पत्र भेजकर अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की कार्रवाई की है.
रजिस्ट्रार की ओर से 10 सितंबर को जारी पत्र के मुताबिक, टाइटल सूट संख्या 14/1973 का निष्पादन 13 जुलाई 1977 को तत्कालीन द्वितीय अपर अधीनस्थ न्यायाधीश एच. नारायण की अदालत में हुआ था. मुकदमे के निस्तारण के बाद संबंधित दस्तावेजों को नियमानुसार सिविल रिकॉर्ड रूम में संरक्षित किया गया था.
रिकॉर्ड में 1999 में नष्ट किए जाने का उल्लेख
रिकॉर्ड रूम के रजिस्टर की जांच में सामने आया कि इस मुकदमे की पत्रावली को 4 सितंबर 1999 को नष्ट किए जाने के तौर पर दर्ज किया गया है. हालांकि, मामला यहीं गंभीर हो जाता है, क्योंकि न्यायिक रिकॉर्ड के संरक्षण से जुड़े नियमों के तहत किसी दीवानी मुकदमे की मुख्य पत्रावली यानी ‘फाइल-ए’ को स्थायी रिकॉर्ड के रूप में सुरक्षित रखा जाना जरूरी है.
नियमों के मुताबिक, जहां कुछ सहायक दस्तावेजों को निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद नष्ट किया जा सकता है, वहीं मुख्य केस फाइल को स्थायी तौर पर संरक्षित किया जाना चाहिए. ऐसे में ‘फाइल-ए’ का रिकॉर्ड में नष्ट दिखना या उसका वास्तविक रूप से उपलब्ध नहीं होना कई सवाल खड़े करता है.
कोर्ट प्रशासन ने माना गंभीर मामला
मूल केस फाइल के गायब होने की स्थिति को कोर्ट प्रशासन ने गंभीरता से लिया है. आशंका जताई जा रही है कि रिकॉर्ड को हटाने या नष्ट करने के पीछे किसी पक्ष को अनुचित लाभ पहुंचाने अथवा महत्वपूर्ण साक्ष्यों को समाप्त करने की मंशा हो सकती है. हालांकि, इन आशंकाओं की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी.
फिलहाल पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है. जांच का मुख्य केंद्र यह पता लगाना होगा कि स्थायी रूप से संरक्षित की जाने वाली केस फाइल रिकॉर्ड रूम से कैसे गायब हुई, रिकॉर्ड में उसे नष्ट किए जाने की प्रविष्टि किस आधार पर की गई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है.
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