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बोकारो/डेस्क: बोकारो जिले के हरला थाना क्षेत्र और सेक्टर-9 इलाके में बीते समय हुई चर्चित शंकर रवानी हत्याकांड और जयंत हत्याकांड के बाद पुलिस-प्रशासन की कार्यशैली को लेकर एक बड़ा सवाल सामने आया है. सूत्रों के मुताबिक, जिले में सक्रिय और गंभीर आपराधिक मामलों में नामजद कुछ अपराधियों पर नकेल कसने के उद्देश्य से पुलिस विभाग की ओर से करीब 12 अपराधियों के खिलाफ सीसीए लगाने का प्रस्ताव बोकारो उपायुक्त के पास भेजा गया है. बताया जा रहा है कि इनमें कुछ प्रस्ताव करीब छह महीने पहले, जबकि कुछ प्रस्ताव हाल के महीनों में भेजे गए हैं.
सूत्रों का दावा है कि सूची में ऐसे अपराधी भी शामिल हैं, जिनके खिलाफ कई-कई आपराधिक मामले दर्ज हैं. कुछ आरोपियों पर आठ या उससे अधिक कांड दर्ज होने की बात भी सामने आ रही है. इनमें हत्या समेत गंभीर आपराधिक मामलों का उल्लेख बताया जा रहा है. इधर, शंकर रवानी और जयंत हत्याकांड के कुछ आरोपियों को जमानत मिलने के बाद पुलिस की चुनौती और बढ़ गई है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि गंभीर आपराधिक इतिहास वाले लोगों की गतिविधियों पर निगरानी और कानून के तहत प्रभावी कार्रवाई कैसे सुनिश्चित की जाए?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर पुलिस विभाग ने सीसीए के लिए प्रस्ताव भेजा है, तो उन प्रस्तावों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई? क्या प्रस्तावों की समीक्षा चल रही है, या किसी कानूनी अथवा प्रशासनिक कारण से निर्णय लंबित है? हालांकि, इन प्रस्तावों और उन पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति को लेकर प्रशासन की ओर से आधिकारिक तौर पर कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है.
कानून-व्यवस्था के लिहाज से यह बेहद गंभीर विषय है. अगर किसी अपराधी का आपराधिक रिकॉर्ड लंबा है और उसके खिलाफ कई गंभीर मामले दर्ज हैं, तो ऐसे मामलों में पुलिस और प्रशासन के बीच समन्वय के साथ समयबद्ध निर्णय जरूरी माना जाता है. अब देखना होगा कि 12 प्रस्तावों पर प्रशासन कब फैसला लेता है और गंभीर आपराधिक मामलों में शामिल बताए जा रहे आरोपियों पर कानून का शिकंजा कितना मजबूत होता है. यह खबर सूत्रों के हवाले से है. आधिकारिक पुष्टि और संबंधित पक्षों का पक्ष मिलने पर खबर को अपडेट किया जाएगा.